संदर्भ
- भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार लगातार आर्थिक सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने वाले कदम उठा रही है। इसी क्रम में नीति आयोग ने निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index-IFI) जारी किया है। यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निवेश वातावरण का वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन-से राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए सबसे अनुकूल माहौल उपलब्ध करा रहे हैं।
- यह पहल जुलाई 2024 में आयोजित नीति आयोग की नौवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस निर्देश का परिणाम है, जिसमें राज्यों के लिए निवेश-अनुकूल चार्टर तैयार करने का दायित्व नीति आयोग को सौंपा गया था। इसके बाद केंद्रीय बजट 2025–26 में निवेश अनुकूलता सूचकांक विकसित करने की घोषणा की गई, ताकि राज्यों में सुधारों को बढ़ावा मिले और प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद को और मजबूती मिल सके।
निवेश अनुकूलता सूचकांक के बारे में
- निवेश अनुकूलता सूचकांक (आईएफआई) एक व्यापक मूल्यांकन प्रणाली है, जिसके माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की नीतियों, संस्थागत व्यवस्था, नियामकीय ढांचे, अवसंरचना तथा कारोबारी वातावरण का आकलन किया जाता है।
- इसका उद्देश्य यह जानना है कि कौन-से राज्य निवेशकों के लिए सबसे बेहतर माहौल तैयार कर रहे हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
- रिपोर्ट का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर किए गए आर्थिक सुधार विकास की समग्र दिशा तय करते हैं, लेकिन निवेश के वास्तविक निर्णय राज्यों में उपलब्ध कारोबारी वातावरण, अवसंरचना, प्रशासनिक दक्षता और नीतिगत स्थिरता पर निर्भर करते हैं। इसलिए राज्यों के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सूचकांक ?
- पिछले तीन दशकों में भारत ने तेज आर्थिक विकास दर्ज किया है और अब विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि जरूरी है, क्योंकि यही औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन, नवाचार और सतत आर्थिक विकास का आधार बनेगा।
- यद्यपि केंद्र सरकार व्यापक आर्थिक नीतियां तैयार करती है, लेकिन निवेशक किसी राज्य में निवेश करने से पहले वहां उपलब्ध औद्योगिक भूमि, सड़क एवं डिजिटल अवसंरचना, नियामकीय प्रक्रियाओं की सरलता, संस्थागत क्षमता और नीति की स्थिरता जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करते हैं। ऐसे में निवेश अनुकूलता सूचकांक राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें अपनी कमजोरियों की पहचान कर सुधार करने का अवसर भी प्रदान करता है।
आठ प्रमुख मानकों पर होता है मूल्यांकन
निवेश अनुकूलता सूचकांक के तहत देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन आठ प्रमुख स्तंभों के आधार पर किया गया है -
- अवसंरचना
- कारोबारी वातावरण
- संसाधनों की उपलब्धता
- सरकारी नीतियां
- नियामकीय सुगमता
- संस्थागत वातावरण
- वित्तीय सुदृढ़ता
- पर्यावरणीय लचीलापन
इस रूपरेखा को वैश्विक और घरेलू निवेश मूल्यांकन प्रणालियों के अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। इसमें कुल 84 संकेतकों का उपयोग किया गया है, जिनमें सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ निवेशकों के सर्वेक्षण से प्राप्त धारणा-आधारित जानकारी भी शामिल है।
राज्यों का वर्गीकरण
समग्र अंकों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है –
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता – 50 से अधिक अंक
- अग्रणी राज्य – 45 से 50 अंक
- उभरते प्रदर्शनकर्ता – 40 से 45 अंक
- आकांक्षी राज्य – 40 से कम अंक
इस वर्गीकरण का उद्देश्य केवल रैंकिंग करना नहीं, बल्कि राज्यों को सुधार की दिशा दिखाना और उन्हें बेहतर नीतियां अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
शीर्ष प्रदर्शनकर्ता राज्य
- समग्र निवेश अनुकूलता सूचकांक में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में सामने आए हैं।
- वहीं 15 राज्यों को अग्रणी राज्य, जबकि आठ-आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उभरते प्रदर्शनकर्ता तथा आकांक्षी श्रेणियों में रखा गया है।
श्रेणीवार शीर्ष राज्य:
बड़े राज्यों में:
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- तमिलनाडु
पर्वतीय एवं पूर्वोत्तर राज्यों में:
- उत्तराखंड
- असम
- हिमाचल प्रदेश
केंद्र शासित प्रदेश एवं नगर राज्यों में
राज्य प्रोफाइल की विशेषता
- रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश का विस्तृत प्रोफाइल भी शामिल किया गया है। इनमें विभिन्न मानकों पर प्रदर्शन, समान राज्यों से तुलना, प्रमुख उपलब्धियां, सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्र तथा निवेशकों की धारणा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
- इन प्रोफाइलों में मात्र आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत और निवेशकों के अनुभवों को भी शामिल किया गया है। इससे नीति-निर्माताओं को यह समझने में सहायता मिलेगी कि निवेश आकर्षित करने के लिए किन क्षेत्रों में सुधार करना आवश्यक है।
सुधारों का रणनीतिक उपकरण
- नीति आयोग का मानना है कि निवेश अनुकूलता सूचकांक केवल राज्यों की रैंकिंग करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक सुधार उपकरण है। इसके माध्यम से राज्यों को समय-समय पर अपनी नीतियों, प्रक्रियाओं और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन करने तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधार करने का अवसर मिलेगा।
- केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर यह सूचकांक अधिक पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
-
भारत को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में निवेश अनुकूलता सूचकांक एक महत्वपूर्ण पहल है। यह राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सहकारी संघवाद की भावना को भी मजबूत करता है। वैज्ञानिक मूल्यांकन, स्पष्ट मानकों और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से यह सूचकांक राज्यों को निवेश आकर्षित करने की दिशा में बेहतर नीतियां अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह पहल निजी निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति के लिए एक प्रभावी आधार साबित हो सकती है।