(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, आर्थिक व सामाजिक विकास, सामान्य विज्ञान) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: सरकारी नीतियों व विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय; औद्योगिक नीति में परिवर्तन एवं औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव; बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता) |
संदर्भ
भारत में नवाचार आकलन को मानकीकृत करने के लिए 29 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन प्रारूप (NTRAF) का अनावरण किया गया।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन प्रारूप का उद्देश्य
- भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से विकसित यह प्रारूप प्रौद्योगिकी परियोजनाओं की परिपक्वता को प्रयोगशाला अवधारणा से लेकर व्यावसायिक तैनाती तक मापने के लिए एकीकृत व वस्तुनिष्ठ मानक स्थापित करता है। यह प्रारूप 31 जनवरी, 2026 तक सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला है।
- इस प्रारूप का उद्देश्य राष्ट्रीय मिशनों के तहत शुरू किए गए विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कोषों के लिए एक परिचालन आधार के रूप में कार्य करना है।
- इसके कड़े मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी स्टार्टअप जो ‘तैनाती के लिए तैयार’ होने का दावा करता है, वह वास्तविक रूप से औद्योगिक-स्तर की मान्यता प्राप्त करने में सक्षम है।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन प्रारूप की कार्यप्रणाली
- 9 तकनीकी तत्परता स्तरों (TRL) में परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए एक सुसंगत पद्धति प्रदान करके यह प्रारूप वित्तपोषण करने वाली एजेंसियों को संसाधनों को अधिक सटीकता के साथ आवंटित करने और निजी निवेश के लिए प्रारंभिक चरण की तकनीकों के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाएगा।
- इसमें अवधारणा का प्रमाण (TRL 1-3) से लेकर प्रोटोटाइप विकास (TRL 4-6) और परिचालन परिनियोजन (TRL 7-9) शामिल हैं।
- उच्च-जोखिम, उच्च-लाभ वाली परियोजनाओं का मूल्यांकन करने में इसके द्वारा प्रस्तुत की गयी संरचनात्मक कठोरता; उपकरण को परिष्कृत करने और इसे भारत के गतिशील नवाचार परिदृश्य के अनुरूप विकसित करने में मदद करेगी।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन प्रारूप की आवश्यकता
- लंबे समय तक भारतीय डीपटेक इकोसिस्टम एक अप्रत्याशित स्थिति का सामना करती रही है जहाँ अकादमिक जगत और उद्योग जगत तकनीकी तत्परता के बारे में अलग-अलग भाषा का प्रयोग करते हैं।
- यह असंगति प्राय: टी.आर.एल. 4 एवं टी.आर.एल. 7 के बीच ‘व्यापक अंतर’ को जन्म देती है, जहाँ अनुमानित जोखिमों के कारण वित्तपोषण बंद हो जाता है। एन.टी.आर.ए.एफ. वस्तुनिष्ठ साक्ष्य की ओर ले जाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल वैज्ञानिक प्रयोगों को ही नहीं, बल्कि हासिल करने योग्य, बाजार-तैयार समाधानों को भी वित्तपोषित किया जा रहा है।
- यह वैज्ञानिक समुदाय के लिए ‘निश्चित मार्गदर्शिका’ के रूप में है। प्रौद्योगिकी परिपक्वता के लिए एक सामान्य भाषा स्थापित करने का लक्ष्य शोधकर्ता के तत्परता दावे और निवेशक या मूल्यांकनकर्ता की प्रमाण की आवश्यकता के बीच अक्सर-विषयनिष्ठ अंतर को कम करना है।
- एन.टी.आर.ए.एफ. एकीकृत पैमाना स्थापित करके तकनीकी हस्तांतरण में होने वाली अस्पष्टता को दूर करता है जो शोध प्रयोगशालाओं, उद्योग एवं सरकार का तत्परता की मान्य व निर्माण योग्य परिभाषा को लेकर समन्वय करता है।
प्रारूप की प्रमुख विशेषताएँ
- वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ, भारतीय संदर्भ: वैश्विक मानकों (जैसे- नासा) से अनुकूलित किंतु भारतीय अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप है।
- विषयनिष्ठता के बदले वस्तुनिष्ठता: विकास के प्रत्येक चरण के लिए गुणात्मक अनुमान के स्थान पर संरचित, साक्ष्य-आधारित चेकलिस्ट प्रदान करता है।
- क्षेत्र-विशेष जटिलताएँ: स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स तथा सॉफ्टवेयर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए विशेष परिशिष्ट शामिल हैं, यह स्वीकार करते हुए कि विभिन्न क्षेत्रों के विकास मार्ग अलग होते हैं।
- स्व-मूल्यांकन उपकरण: परियोजना, अन्वेषकों को अपनी स्थिति का वास्तविक रूप से आकलन करने और निधि प्राप्त करने से पहले तकनीकी अंतर की पहचान करने में सक्षम बनाती है।
आगे की राह
प्रौद्योगिकी तत्परता बाजार सत्यापन के समानांतर चलनी चाहिए, विशेष रूप से टी.आर.एल. 4 से आगे। साथ ही, वास्तविक धरातल पर लाने से पूर्व एक पायलट चरण भी अपनाया जा सकता है।