New
Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 6:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 1st May 2026, 8:30PM Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 6:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 1st May 2026, 8:30PM

 विरोध का अधिकार और कानून व्यवस्था

(सामान्य अध्ययन, मुख्य परीक्षा प्रश्नपत्र-2 : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में नागरिकता (संशोधन) कानून के विरोध और समर्थन में देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए। साथ ही, कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की ओट में हिंसात्मक गतिविधियों का सहारा लेकर सार्वजानिक संपत्ति को क्षति भी पहुँचाई गई।
  • पिछले कुछ समय में नागरिकता संशोधन कानून के बारे में अफवाह और त्रुटिपूर्ण जानकारियों के कारण देश भर में हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने प्रशासन व कानून व्यवस्था के लिये गम्भीर खतरा उत्पन्न कर दिया है।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019

  • इसके माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया। यह कानून 31 दिसम्बर, 2014 तक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीडन के चलते भारत आए हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान करता है।
  • कानून के मुताबिक, धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत आए इन 6 समुदायों के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिये पासपोर्ट एवं वीज़ा जैसे दस्तावेज़ों की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इस कानून के मुताबिक, किसी व्यक्ति को ‘देशीयकरण’ (Naturalisation) द्वारा भारत की नागरिकता तभी दी जा सकती है, जब-
    • विगत 14 वर्षों में 11 वर्षों तक वह भारत में रहा हो; साथ ही, पिछले 12 माह से वह देश में रह रहा हो।
    • पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान से आए उपर्युक्त 6 समुदायों के व्यक्तियों के लिये 11 वर्षों तक देश में निवास की शर्त को घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
  • किसी भी विदेशी व्यक्ति को भारत की नागरिकता, नागरिकता अधिनियम, 1955 की कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रदान की जाएगी।

विरोध प्रदर्शन का अधिकार

  • संविधान के अनुछेद-19 में ‘वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ सहित कुल 6 अधिकार दिये गए, किंतु इनके साथ ही कुछ युक्तियुक्त निर्बंधन भी आरोपित किये गए हैं।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से राज्य की सुरक्षा, सम्प्रभुता एवं अखंडता को क्षति नहीं पहुँचनी चाहिये।
  • प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ उसमें शामिल व्यक्तियों के पास कोई हथियार या अन्य घातक सामग्री नहीं होना चाहिये।
  • प्रदर्शन करने से पहले स्थानीय संस्थाओं और पुलिस प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है।

सार्वजानिक संपत्ति की क्षति पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश

  • नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा किसी भी सरकार का मुख्य एवं प्राथमिक दयित्व है।
  • सार्वजानिक संपत्ति को हुई क्षति की ज़िम्मेदारी आरोपी की होगी।
  • आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होता है, निर्दोष साबित होने तक आरोपी को ही ज़िम्मेदार माना जाएगा।

सार्वजानिक संपत्ति की क्षति से सम्बंधित अन्य प्रावधान

  • लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 141 से 160 (लोक शांति भंग करने विरुद्ध दंड का प्रावधान) और धारा 425 (सामान्य जन-धन की क्षति के विरुद्ध दंड का प्रावधान)
  • हाल ही में, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजानिक संपत्ति को क्षति पहुँचाने के विरुद्ध एक कठोर अध्यादेश लाया गया है।

सी.आर.पी.सी. की धारा 144

  • दंड प्रक्रिया सहिंता, 1973 की धारा 144 का उपयोग शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिये किया जाता है।
  • इस धारा को कार्यपालक मजिस्ट्रेट (जिलाधिकारी) द्वारा लागू किया जाता है।
  • किसी भी सार्वजानिक स्थल पर धारा 144 के लागू होने पर 5 या उससे अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकते हैं।

धारा 144 एवं कर्फ्यू

  • धारा 144 में पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी लगाई जाती है, जबकि कर्फ्यू में घरों से बाहर निकलने पर भी रोक होती है। अतः कर्फ्यू, धारा 144 का ही कठोर स्वरूप है।
  • धारा 144 लागू होने पर स्कूल, कॉलेज, बाज़ार खुले रहते हैं, जबकि कर्फ्यू के दौरान निर्धारित क्षेत्र को पूर्णतः बंद कर दिया जाता है।

भविष्य की राह

  • मौलिक अधिकारों के उपयोग के साथ-साथ लोगों को अपने कर्त्तव्यों के प्रति भी जागरूक एवं ज़िम्मेदार होना चाहिये।
  • भारत जैसी विविधापूर्ण संस्कृति में मतभेद एवं असहमति स्वाभाविक हैं, संविधान में इसे व्यक्त करने के लिये भी उचित प्रावधान हैं। लोकतंत्र में प्रदर्शन के दौरान हिंसा का सहारा लेना किसी भी सभ्य, उदार एवं सहिष्णु समाज का सूचक नहीं हो सकता है।
  • विरोध प्रदर्शन में आगजनी करना, स्वयं से भिन्न समुदाय/वर्ग के प्रति द्वेषपूर्ण या हिंसक रवैया अपनाना तथा सार्वजानिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना, किसी भी रूप में संवैधानिक दायरे में नहीं आते हैं, ये निश्चित रूप से आपराधिक कृत्य एवं प्रवृत्ति को उजागर करते हैं।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR