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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 17 नवंबर, 2021


 नोरोवायरस 

जनजातीय गौरव दिवस 

राजनीतिक दलों को चंदा तथा चुनावी बॉण्ड 

हिरासत में मृत्यु 

ग्रीन ग्रिड पहल को अमेरिका का समर्थन 

संयुक्त राज्य अमेरिका: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 101वाँ सदस्य  

वायु गुणवत्ता का गिरता स्तर

आर.बी.आई. की दो नवीन योजनाएँ


 नोरोवायरस 

चर्चा में क्यों

हाल ही में, केरल के वायनाड में ‘नोरोवायरस’ के मामले की पुष्टि हुई है। केरल सरकार ने इस वायरस से लोगों को सतर्क रहने को कहा है तथा इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

नोरोवायरस 

  • यह वायरस ‘कैलिसिविरिडे’ परिवार से संबंधित है। यह गैर-आच्छादित, सिंगल स्ट्रेंडेड (एक रेशे से संगठित/एकरेशीय) आर.एन.ए. विषाणुओं का समूह है। यह मुख्य रूप से तीव्र गैस्ट्रोएंटेराईटिस (आँतों की सूजन) का कारण बनता है।
  • नोरोवायरस को पहले नॉरवॉक वायरस कहा जाता था। इसका नाम मूल नॉरवॉक स्ट्रेन के नाम पर रखा गया था। इसके कारण वर्ष 1968 में ओहियो के नॉरवॉक के एक स्कूल में गैस्ट्रोएंटेराइटिस का प्रकोप हुआ था।          
  • यह एक बहुत ही संक्रामक पशु जनित वायरस है। यह सभी उम्र के लोगों को संक्रमित कर सकता है।

लक्षण

  • किसी व्यक्ति के इस वायरस के संपर्क में आने के लगभग 12 से 48 घंटे के बाद इसके लक्षण विकसित होते हैं।
  • यह वायरस आँतों की सूजन का कारण बनता है। इसे तीव्र आंत्रशोध कहा जाता है। पेट में दर्द, दस्त, मितली, बुखार, सिरदर्द आदि इस वायरस के प्रमुख लक्षण हैं।

वायरस का प्रसार

  • किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से
  • दूषित भोजन या जल के सेवन से
  • दूषित सतह को छूने के बाद अपने हाथों को बिना धुले भोजन या अन्य कुछ ग्रहण करने से

उपचार 

  • अभी तक इस बीमारी के लिये कोई प्रभावी उपचार ज्ञात नहीं है। हालाँकि, इस बीमारी में उल्टी के कारण शरीर में होने वाली तरल पदार्थों की कमी अथवा निर्जलीकरण को रोकना महत्त्वपूर्ण है।
  • इस बीमारी के रोकथाम के लिये स्वच्छता का पालन करना, बीमारी को रोकने के प्रमुख तरीकों में से एक है। इसके लिये भोजन करने एवं शौच के बाद हाथ धोना आवश्यक है।

जनजातीय गौरव दिवस 

चर्चा में क्यों

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 नवंबर (बिरसा मुंडा के जन्मदिवस) को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

प्रमुख बिंदु

  • पहले जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।
  • यह दिवस सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा राष्ट्रीय गौरव के भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिये आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता देने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष मनाया जाएगा।

जनजातियों की सुरक्षा के लिये संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 46 अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की अभिवृद्धि तथा सामाजिक अन्याय एवं सभी प्रकार के शोषण से संरक्षण प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 243 में पंचायतों में, अनुच्छेद 330 में लोकसभा में तथा अनुच्छेद 337 में राज्य विधानमंडलों में अनुसूचित जनजातियों के लिये स्थानों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • अनुच्छेद 342 में राष्ट्रपति को अनुसूचित जनजातियों को विनिर्दिष्ट करने की शक्ति प्रदान की गई है। इसके अनुसार राष्ट्रपति किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में, राज्य की स्थिति में संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा उन जातियों को उल्लिखित करेगा, जो उस प्रयोजन के लिये अनुसूचित जातियाँ समझी जाएंगी। हालाँकि, अनुसूचित जनजातियों को संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
  • अनुच्छेद 350 में मातृभाषा में शिक्षण तथा लिपि एवं संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • अनुच्छेद 371 में पूर्वोत्तर राज्यों एवं सिक्किम के संबंध में विशेष उपबंध किये गए हैं।

    राजनीतिक दलों को चंदा तथा चुनावी बॉण्ड 

    चर्चा में क्यों

    हाल ही में, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों को प्राप्त चंदे का 55 प्रतिशत से अधिक तथा राष्ट्रीय दलों को प्राप्त चंदे का 70.98 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से प्राप्त हुआ है।

    प्रमुख बिंदु

    • ए.डी.आर. की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में 25 क्षेत्रीय दलों को मिला कुल चंदा 803.24 करोड़ रुपए था। इसमें 445.7 करोड़ रूपए अज्ञात स्रोतों से प्राप्त किये गए। अज्ञात स्रोत से प्राप्त चंदे में 426.23 करोड़ रूपए (95.6%) चुनावी बॉण्ड से तथा 4.97 करोड़ स्वेच्छिक योगदान से आए।
    • क्षेत्रीय दलों को उनकी आय का 22.98 प्रतिशत चंदा ज्ञात दाताओं से, 21.52 प्रतिशत अन्य ज्ञात स्रोतों, जैसे- सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशन की बिक्री आदि से प्राप्त हुआ।
    • वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय दलों को अज्ञात स्रोतों से प्राप्त आय पार्टियों की कुल आय का 70.98 प्रतिशत है। इसका 88 प्रतिशत भाग चुनावी बॉण्ड से प्राप्त किया गया है।

    चुनावी बॉण्ड

    • राजनीतिक दलों को प्राप्त होने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2017-18 में चुनावी बॉण्ड योजना को प्रारंभ करने की घोषणा की गई।
    • चुनावी बॉण्ड को वित्त विधेयक 2017 के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था। इसके लिये रिज़र्व बैंक अधिनियम-1934, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम- 1951 एवं आयकर अधिनियम-1961 में संशोधन किया गया।
    • चुनावी बॉण्‍ड्स को किसी व्यक्ति द्वारा, जो भारत का नागरिक हो तथा ऐसी कंपनी द्वारा जो भारत में निगमित हो, क्रय किया जा सकता है। ये बॉण्ड 1000, 10000, 100000, तथा 10000000 रूपए के गुणक में जारी किये जाते हैं। ये बॉण्ड बैंक नोटों के समान होते हैं जो मांग पर वाहक को देय होते हैं। इन बॉण्‍ड्स पर ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है।
    • भारतीय स्टे्ट बैंक चुनावी बॉण्‍ड्स की बिक्री के लिये भारत सरकार द्वारा अधिकृत एकमात्र बैंक है।
    • कोई भी राजनीतिक दल जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29(A) के अंतर्गत पंजीकृत है तथा हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों या विधानसभा चुनावों में कम से कम एक प्रतिशत मत प्राप्त किया है, वह चुनावी बॉण्ड प्राप्त करने का पात्र नही है।
    • चुनावी बॉण्ड की वैधता-अवधि जारी किये जाने की तिथि से पंद्रह दिन होगी। यदि वैधता-अवधी के समाप्त होने पर चुनावी बॉण्ड जमा किये जाते हैं तो राजनीतिक दलों को कई भुगतान नहीं किया जाएगा।  

    हिरासत में मृत्यु 

    चर्चा में क्यों

    हाल ही में, देश के गृह राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस हिरासत में 348 लोगों की मृत्यु हुई है तथा 1,189 लोगों को प्रताड़ित किया गया है।

    प्रमुख बिंदु  

    • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में 136, वर्ष 2019 में 112 तथा वर्ष 2020 में 100 लोगों की पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु हुई।
    • संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, पुलिस एवं सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के विषय हैं। इसके अंतर्गत जाँच, अपराध पंजीकृत करने, अभियुक्तों की दोष सिद्धि तथा जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा इत्यादि विषय सम्मिलित हैं।
    • हिरासत में होने वाली मृत्यु के संदर्भ में वर्ष 1996 में डी. के. बसु मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये थे। इसका उद्देश्य गिरफ्तार करने की शक्ति के दुरूपयोग तथा हिरासत में होने वाली प्रताड़ना को रोकना था।

    किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाना

    • आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अध्ययाय 5 की धारा 41-60 में गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधान दिये गए हैं परंतु इसमें गिरफ्तारी को परिभाषित नहीं किया गया है। किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह सबूतों को प्रभावित न करे तथा जाँच के लिये उपस्थित रहे।
    • अपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 41 (1) के अनुसार, कोई पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश तथा वारंट के बिना भी किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है जिसने संज्ञेय अपराध किया है या राज्य का अपराधी है या किसी मामले में बाधा डालता है। 
    • अपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 42 के अनुसार पुलिस अधिकारी को किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार है जिसने कोई असंज्ञेय अपराध किया है तथा अपना नाम एवं निवास स्थान बताने से मना करता है या गलत बताता है 

    पुलिस अभिरक्षा में अधिकार

    संविधान के अनुच्छेद 22 के अनुसार, किसी गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं-

    • गिरफ्तारी का कारण बताए जाने का अधिकार 
    • अपने वकील से परामर्श का अधिकार 
    • गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करने का अधिकार 
    • गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना 24 घंटे से अधिक निरुद्ध नहीं करने का अधिकार 

    मौन का अधिकार 

    किसी आरोपी से पुलिस हिरासत में बल पूर्वक कोई बयान नही लिया जा सकता। इसके अंतर्गत आरोपी को दी जाने वाली शारीरिक एवं मानसिक दोनों यातनाएँ शामिल हैं। आरोपी यदि बयान न देना चाहे तो उसे मौन रहने का अधिकार प्राप्त है।

    मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार 

    आर्थिक या किसी अन्य कारण से कोई व्यक्ति न्याय प्राप्त करने से वंचित नहीं रहना चाहिये। यदि किसी व्यक्ति को आवश्यकता है तो उसे निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    चिकित्सक द्वारा जाँच का अधिकार

    गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को पंजीकृत चिकित्सक से जाँच कराने का अधिकार प्राप्त है। जाँच यह सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान कोई यातना तो नहीं दी गई।  


    ग्रीन ग्रिड पहल को अमेरिका का समर्थन 

    चर्चा में क्यों

    जलवायु शिखर सम्मलेन कॉप-26 (ग्लासगो, ब्रिटेन) में अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा ग्रिड से संबंधित भारत एवं ब्रिटेन की पहल में भागीदारी की है।

    प्रमुख बिंदु    

    • कॉप-26 शिखर सम्मलेन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ‘ग्रीन ग्रिड पहल- वन वर्ल्ड वन सन वन ग्रिड’ की शुरुआत की। वैश्विक ऊर्जा ग्रिड की अवधारणा की घोषणा अक्तूबर 2018 में आई.एस.ए. की पहली बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
    • इस पहल की संचालन समिति में भारत एवं ब्रिटेन के अतिरिक्त अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं फ्रांस भी शामिल हैं। इसके अंतर्गत 80 देशों ने ‘वन सन डिक्लेरेशन’ का समर्थन करते हुए इंटरकनेक्टेड ग्रिड बनाने के अपने प्रयासों को समेकित करने का संकल्प लिया है।
    • आई.एस.ए. के अनुसार, ‘वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड’ के अंतर्गत पूरी दुनिया को एक ग्रिड से जोड़ा जाएगा तथा इसके माध्यम से पूरी दुनिया से समेटी गई सौर ऊर्जा को अलग-अलग लोड सेंटर्स तक पहुँचाया जाएगा।  
    • भारत, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और नेपाल पहले से ही सीमाओं के पार ऊर्जा हस्तांतरण के लिये पारेषण क्षमता साझा करते हैं। इस क्षमता का उपयोग इन देशों के मध्य सौर ऊर्जा के हस्तांतरण के लिये किया जा सकता है।

    संयुक्त राज्य अमेरिका: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 101वाँ सदस्य  

    चर्चा में क्यों 

    यू.एन.एफ.सी.सी. के कॉप-26 सम्मलेन में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में 101वें सदस्य के रूप में सम्मिलित होने की घोषणा की।

    प्रमुख बिंदु

    • आई.एस.ए. के गठन की घोषणा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकोइस ओलांद ने 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में कॉप-21 के सत्र में की थी। 
    • आई.एस.ए. संधि आधारित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें मुख्यतः सौर संसाधन संपन्न देशों (विशेषतः कर्क एवं मकर रेखा के मध्य स्थित) को सम्मिलित करने की कल्पना की गई है। इसके अंतर्गत 122 सनबेल्ट देश हैं, जो इसके संभावित सदस्य देशों के रूप में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित हैं।    

    आई.एस.ए. के मुख्य उद्देश्य

    • सौर ऊर्जा अनुप्रयोगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप बढ़ाने के लिये प्रमुख चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करना।  
    • वर्ष 2030 तक 1000 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश जुटाना।
    • सदस्य देशों के मध्य ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में सहयोगी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।

      वायु गुणवत्ता का गिरता स्तर

      चर्चा में क्यों

      हाल ही में, दिल्ली का ‘वायु गुणवत्ता सूचकांक’ (AQI) सबसे खराब (Severe) स्तर पर पहुँच गया था। इस स्थिति से निपटने के लिये ‘ग्रेडेड रेस्पोंस एक्शन प्लान’ (GRAP) के तहत कुछ आपातकालीन कदम उठाए गए हैं।

      ग्रेडेड रेस्पोंस एक्शन प्लान (GRAP)

      • यह वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिये आपातकालीन उपायों का समुच्चय है। इन्हें केंद्रीय ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ द्वारा वर्ष 2017 में अधिसूचित किया गया था।
      • इसके तहत निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाना, ऑड-ईवन प्रारूप में वाहन संचालन की अनुमति जैसे कदम उठाए जाते हैं।
      • हाल ही में, ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (CAQM) के अंतर्गत एक उप-समिति गठित की गई थी। इसने ग्रैप उपायों के मद्देनज़र वाहनों के उपयोग में 30% तक की कमी लाने का सुझाव दिया था।

      वायु गुणवत्ता में गिरावट के तात्कालिक कारण

      • दीपावली के दौरान पटाखों का दहन, दिल्ली एन.सी.आर. व आस-पास के क्षेत्रों में पराली दहन इत्यादि। इस दौरान पी.एम.-2.5 की वृद्धि में पराली दहन का करीब 35% योगदान रहा।
      • तापमान में कमी, सतह पर स्थानीय वायु की गति में वृद्धि ने भी वायु प्रदूषण के बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई।

      सरकार द्वारा उठाए गए कदम

      • केंद्र व राज्य स्तर पर ‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड्स’ का गठन।
      • ‘वायु गुणवत्ता सूचकांक’ (AQI) का शुभारंभ।
      • ‘ग्रेडेड रेस्पोंस एक्शन प्लान’ (GRAP) लॉन्च।
      • ‘सफर’ (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) की शुरुआत।

      आर.बी.आई. की दो नवीन योजनाएँ

      चर्चा में क्यों

      हाल ही में, प्रधानमंत्री ने भारतीय रिज़र्व बैंक की दो उपभोक्ता-केंद्रित योजनाएँ लॉन्च की हैं- खुदरा प्रत्यक्ष योजना; भारतीय रिज़र्व बैंक – एकीकृत लोकपाल योजना।

      खुदरा प्रत्यक्ष योजना

      • उद्देश्य : खुदरा निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का अवसर उपलब्ध कराना तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
      • भारत में ऐसा पहली बार हुआ है कि खुदरा निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों में प्रत्यक्ष निवेश कर सकते हैं। इससे पूर्व, खुदरा निवेशक सिर्फ म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से ही सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते थे।
      • अभी तक, सरकारी प्रतिभूति बाज़ार में संस्थागत निवेशकों, यथा– बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड्स आदि का आधिपत्य था। यह योजना सरकारी प्रतिभूतियों के लिये निवेशक-आधार का विस्तार करेगी, इससे सरकारी प्रतिभूति बाज़ार का लोकतंत्रीकरण होगा।
      • इस योजना का लाभ लेने के लिये खुदरा निवेशकों को आर.बी.आई. के हवाले से ‘रिटेल डायरेक्ट गिल्ट’ (RDG) अकाउंट खुलवाना होगा। यह एक निःशुल्क सुविधा होगी।

      भारतीय रिज़र्व बैंक – एकीकृत लोकपाल योजना

      • उद्देश्य : उपभोक्ताओं के लिये शिकायत निवारण तंत्र में सुधार करना तथा बैंकिंग क्षेत्र में ‘एक राष्ट्र, एक लोकपाल’ व्यवस्था स्थापित करना।
      • इस योजना में निम्नलिखित 3 योजनाओं का विलय कर दिया गया है–
        1. बैंकिंग लोकपाल योजना
        2. एन.बी.एफ.सी. के लिये लोकपाल योजना
        3. डिजिटल लेन-देन के लिये लोकपाल योजना।

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