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शॉर्ट न्यूज़: 22 फरवरी , 2021


वर्षा क्षेत्रों में वर्षा का घटता स्वरुप


वर्षा क्षेत्रों में वर्षा का घटता स्वरुप

संदर्भ

विगत 119 वर्षों में बदलते वर्षा के स्वरुप पर किये गए हाल के एक अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि चेरापूँजी, मॉसिनराम और आस-पास के क्षेत्रों में बारिश में कमी आई है। 

घटती हुई वर्षा के प्रमुख कारण

  • अध्ययन में वर्ष 1901–2019 के दौरान दैनिक वर्षा की मापों का विश्लेषण किया गया और यह पाया गया कि हिंद महासागर के तापमान में परिवर्तन का इस क्षेत्र में वर्षा पर प्रभाव पड़ा है।
  • पिछले दो दशकों में पूर्वोत्तर भारत में वनस्पति क्षेत्र में कमी आई थी, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि वर्षा के बदलते स्वरुप में मानव हस्तक्षेप भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • खेती का पारंपरिक तरीका, जिसे झूम खेती के रूप में भी जाना जाता है, अब कम हो गया है और अब अन्य तरीकों की तरफ ध्यान दिया जा रहा है।
  • अध्ययन में क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनों की हो रही कटाई भी महत्त्वपूर्ण पक्ष के रूप में सामने आई। 

मॉसिनराम

  • मॉसिनराम पूर्वोत्तर भारत में मेघालय के ‘पूर्व खासी हिल्स ’ज़िले का एक शहर है, जो शिलॉन्ग से 9 किलोमीटर दूर अवस्थित है।
  • यह भारत में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाला क्षेत्र है।
  • कुछ मौसम विज्ञानी इसे पृथ्वी पर सबसे अधिक नमी वाला क्षेत्र भी मानते हैं।
  • यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 11,872 मिमी.होती है। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, वर्ष 1985 में मॉसिनराम में 26,000 मिमी. (1,000 इंच) बारिश हुई थी।

मॉसिनराम में सबसे ज़्यादाबारिश क्यों होती है?

  • कई पर्वत श्रृंखलाओं तथा असमान स्थलाकृतियों की उपस्थिति के कारण मानसून भारत में समान रूप से नहीं पहुँच पाता है।
  • यहाँ वायु की ओर के क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है और अनुवात क्षेत्रों (leeward sides) में कम वर्ष होती है।
  • मॉसिनराम मेघालय में खासी रेंज के कारण बने कीप के आकार के गर्त में स्थित है। अतः बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा इसमें फंस जाती है और क्षेत्र में भारी वर्षा का कारण बनती है।

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