• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 8 जनवरी, 2022


सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

स्वर्ण का दोगुना आयात

चुनावी व्यय सीमा में वृद्धि

व्युत्क्रम कर संरचना


सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

चर्चा में क्यों?

रूस के प्रभुत्व वाले सैन्य गठबंधन ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (The Collective Security Treaty Organization: CSTO) ने कजाकिस्तान में सैन्य टुकड़ी भेजने का निर्णय लिया है। 

प्रमुख बिंदु 

  • पूर्व सोवियत गणराज्य का हिस्सा रहा कजाकिस्तान मध्य एशिया का एक शांतिपूर्ण व ऊर्जा समृद्ध देश है। हालाँकि, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण ही कजाकिस्तान व्यापक विरोध प्रदर्शन और अशांति का सामना कर रहा है।
  • बढ़ते दबाव के चलते कजाकिस्तान के राष्ट्रपति ने ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ से सैन्य सहायता भेजने की अपील की है।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

  • सी.एस.टी.ओ. यूरेशिया का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है। सोवियत संघ के विघटन के बाद के चुनिंदा देश आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान इसके सदस्य हैं, जबकि अफगानिस्तान तथा सर्बिया को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा प्राप्त है।
  • इसकी उत्पत्ति का स्रोत वर्ष 1992 में हुई ‘सामूहिक सुरक्षा संधि’ या ‘ताशकंद संधि’ को मानते है।
  • इसका मुख्यालय मॉस्को में है। इसका गठन विदेशों से व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त ‘आतंकवादी समूहों’ का मुकाबला करने के लिये किया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के आधार पर स्वतंत्रता तथा शांति और अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व साइबर सुरक्षा को मज़बूत करना है।

स्वर्ण का दोगुना आयात

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के नए रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में भारत ने सोने के आयात पर विगत वर्ष की तुलना में दोगुना व्यय किया है।

प्रमुख बिंदु  

  • भारत ने सोने के आयात पर वर्ष 2021 में 55.7 अरब डॉलर खर्च किये जबकि वर्ष 2020 में स्वर्ण आयात पर खर्च इसका लगभग आधा था।
  • भारत ने वर्ष 2021 में 1,050 टन स्वर्ण आयात किया जो विगत वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
  • देश में वर्ष 2020 में लॉकडाउन और विवाह कार्यक्रम पर आरोपित कड़ी पाबंदियों के कारण सोने का आयात कम हो गया था।


चुनावी व्यय सीमा में वृद्धि

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के लिये चुनावी व्यय सीमा में वृद्धि कर दी है।

प्रमुख बिंदु 

  • बड़े राज्यों, जैसे- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा कर्नाटक आदि में लोकसभा चुनाव में व्यय सीमा को 70 लाख से बढ़ाकर 95 लाख रुपए कर दिया गया है, जबकि इन राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिये व्यय सीमा को 28 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दिया गया है।
  • वहीं छोटे राज्यों, जैसे- गोवा, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश तथा केंद्रशासित प्रदेश के लिये लोकसभा चुनाव व्यय की सीमा 54 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपए जबकि विधानसभा चुनाव के लिये 20 लाख से बढ़ाकर 28 लाख रुपए कर दिया गया है।

पूर्व में संशोधन 

  • इससे पूर्व फ़रवरी 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले व्यय सीमा को संशोधित किया गया था, जबकि विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिये अक्तूबर 2018 में इसमें संशोधन किया गया था।
  • हालाँकि, कोविड-19 महामारी के चलते पिछले वर्ष कुछ विशेष दिशा-निर्देशों के साथ विधानसभा और लोकसभा के लिये चुनावी खर्च की सीमा में 10% की वृद्धि की गई थी।
  • निर्वाचन आयोग मतदाता संख्या तथा लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index) में वृद्धि के कारण कारण समय-समय पर चुनावी व्यय सीमा में वृद्धि करता है।
  • विदित है कि वर्ष 2020 में निर्वाचन आयोग ने चुनावी व्यय सीमा को लेकर श्री उमेश सिन्हा की सदस्यता में एक समिति का गठन किया गया था।

व्युत्क्रम कर संरचना

चर्चा में क्यों?

वस्तु एवं सेवा कर परिषद् ने कपड़ा उद्योग के लिये जी.एस.टी. दर में वृद्धि को प्रभावी होने से पूर्व अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।

प्रमुख बिंदु 

  • जी.एस.टी. परिषद् ने ‘व्युत्क्रम कर संरचना’ (Inverted Duty Structure) में सुधार के लिये फुटवियर और वस्त्रों पर कर की दर में संशोधन की सिफारिश की थी। वर्तमान में मानव निर्मित रेशे, सूत और वस्त्रों पर कर की दर क्रमश: 18, 12 और 5 प्रतिशत है। 
  • परिषद् ने कपड़ा क्षेत्र के लिये कर की दर को 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया था, जिसे 1 जनवरी से लागू किया जाना था। हालाँकि, गुजरात, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों की मांग के बाद इस निर्णय को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है।

व्युत्क्रम कर संरचना

  • ‘व्युत्क्रम कर संरचना’ से तात्पर्य ऐसी शुल्क संरचना से है जब उत्पादन या अंतिम उत्पाद पर लगाए गए कर की दर आगतों (इनपुट) पर लगाए गए दर से कम हो। इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) संचयन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और इसे ज़्यादातर मामलों में वापस करना पड़ता है।
  • इससे सरकारी राजस्व के बहिर्वाह में वृद्धि हुई है, जिससे सरकार कर संरचना पर पुन: विचार करने के लिये प्रेरित हुई है। उदाहरणस्वरुप सरकार को फुटवियर क्षेत्र में एक वर्ष में लगभग 2,000 करोड़ रुपए वापस करना पड़ता है।
  • वस्त्रों पर जी.एस.टी. दर को 12 प्रतिशत करने का निर्णय कपड़ा उद्योग को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मांग में गिरावट तथा मंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

जी.एस.टी. परिषद्

जी.एस.टी. परिषद् भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है। यह वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित मुद्दों पर केंद्र व राज्य सरकार को सिफारिशें करता है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा की जाती है।


CONNECT WITH US!

X