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एकात्म मानववाद दर्शन की 60वीं जयंती

 चर्चा में क्यों?

  • नई दिल्ली के कन्वेंशन सेंटर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के "एकात्म मानववाद" दर्शन की 60वीं जयंती पर राष्ट्रीय स्मारक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
  • प्रमुख वक्ता: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान
  • नियोजक: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्राइवेट लिमिटेड  

एकात्म मानववाद:

  • इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 1965 में प्रस्तुत किया था। 
  • इसका उद्देश्य भारतीय समाज और संस्कृति के अनुरूप एक समग्र सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक दर्शन प्रदान करना था, जो न तो पूंजीवाद की अतिव्यक्ति है, न ही साम्यवाद का अति-राज्यवादी रूप।

एकात्म मानववाद की मूल अवधारणाएँ:

1. भारतीय संस्कृति की मूल भावना पर आधारित:

  • यह दर्शन भारत की धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित विचारों पर आधारित है।
  • व्यक्ति को केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि आत्मा-युक्त सामाजिक प्राणी माना गया है।

2. मनुष्य का चतुर्वेधी विकास:

  • मनुष्य का विकास शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा – इन चारों स्तरों पर होना चाहिए।
  • यह दृष्टिकोण सामाजिक समरसता और समग्र कल्याण की बात करता है।

3. राज्य और समाज में संतुलन:

  • न तो अत्यधिक राज्य का समर्थन करता है (जैसे साम्यवाद), और न ही व्यक्ति की स्वतंत्रता की अति (जैसे पूंजीवाद)।
  • "राज्य समाज का एक अंग है, अधिनायक नहीं" – यह इसकी प्रमुख धारणा है।

4. स्वदेशी और आत्मनिर्भरता:

  • आर्थिक दृष्टिकोण में स्वदेशी, स्वावलंबन और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर बल दिया गया।
  • उपभोक्तावाद का विरोध किया गया और नैतिक उपभोग पर ज़ोर।

5. धर्म का व्यापक अर्थ:

  • यहाँ "धर्म" का अर्थ नैतिक और सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ति है, न कि केवल पूजा-पद्धति।
  • धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – ये चार पुरुषार्थ संतुलन में रहें, यह एकात्म मानववाद का मूल है।

 पंडित दीन दयाल उपाध्याय का परिचय:

जन्म

25 सितम्बर 1916, नगला चंद्रभान, जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश)

मृत्यु

11 फरवरी 1968, मुगलसराय (अब 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन') पर संदिग्ध परिस्थितियों में

शिक्षा

स्नातक (संस्कृत), फिर राजनीति और अर्थशास्त्र में अध्ययन; RSS से विचारधारा की प्रेरणा

संघ से जुड़ाव

1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े

राजनीतिक भूमिका

भारतीय जनसंघ के महासचिव और 1967 में अध्यक्ष बने

प्रश्न. एकात्म मानववाद दर्शन की 60वीं जयंती पर एक राष्ट्रीय स्मारक संगोष्ठी का आयोजन नई दिल्ली के कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इस दर्शन को किसने प्रस्तुत किया था?

(a) डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

(b) श्री शिवराज सिंह चौहान

(c) पंडित दीनदयाल उपाध्याय

(d) इनमें से कोई नहीं

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