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ओडिशा तट पर 765 डॉल्फ़िन की मौजूदगी

चर्चा में क्यों ?

ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में समुद्री डॉल्फ़िन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 20 जनवरी 2026 को आयोजित राज्यव्यापी जनगणना के अनुसार, राज्य में कुल 765 डॉल्फ़िन पाई गई हैं।

प्रमुख बिन्दु:

  • यह पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है और समुद्री जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
  • यह जनगणना ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वन्यजीव विंग द्वारा कराई गई।

प्रजातिवार स्थिति

  • जनगणना में छह प्रजातियों की डॉल्फ़िन दर्ज की गईं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं-
    • हंपबैक डॉल्फ़िन – 497
    • इरावदी डॉल्फ़िन – 208
    • बॉटलनेक डॉल्फ़िन – 55
    • स्पिनर डॉल्फ़िन – 3
    • फिनलेस पोरपोइज़ - 2
  • हंपबैक डॉल्फ़िन की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि इरावदी डॉल्फ़िन दूसरी सबसे बड़ी आबादी के रूप में सामने आई।

पिछले पाँच वर्षों का तुलनात्मक आंकड़ा

वर्ष

कुल डॉल्फ़िन

इरावदी डॉल्फ़िन

2020-21

544

209

2021-22

726

208

2022-23

733

69

2023-24

743

181

2024-25

710

188

2025-26

765

208

  • आंकड़ों से स्पष्ट है कि समग्र रूप से डॉल्फ़िन की संख्या में वृद्धि की प्रवृत्ति बनी हुई है।

चिलिका झील: इरावदी डॉल्फ़िन का वैश्विक केंद्र

  • एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिलिका इरावदी डॉल्फ़िन का प्रमुख आवास है।
  • कुल 208 इरावदी डॉल्फ़िन में से 159 डॉल्फ़िन केवल चिलिका झील में पाई गईं
  • हालांकि पिछले दो वर्षों से यहाँ इनकी संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है। 
  • विशेषज्ञों के अनुसार, इरावदी डॉल्फ़िन धीमी प्रजनन दर वाली प्रजाति है और कुछ डॉल्फ़िन अन्य क्षेत्रों में प्रवास भी करती हैं।

गहिरमाथा: हंपबैक डॉल्फ़िन का प्रमुख क्षेत्र

  • केंद्रपाड़ा जिले में स्थित गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में 474 हंपबैक डॉल्फ़िन दर्ज की गईं, जिससे यह क्षेत्र समुद्री संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

संरक्षण प्रयासों का प्रभाव

  • प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रेम कुमार झा के अनुसार, डॉल्फ़िन की आबादी में वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण हैं-
    • मजबूत संरक्षण रणनीतियाँ
    • पर्यावास संरक्षण
    • सामुदायिक भागीदारी
    • नियमित वैज्ञानिक निगरानी
    • फील्ड स्टाफ का प्रशिक्षण
  • 2008 में चिलिका से शुरू हुआ डॉल्फ़िन आकलन कार्यक्रम 2015 से सभी तटीय वन प्रभागों तक विस्तारित किया गया। 
  • आज यह एक वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित वार्षिक अभ्यास बन चुका है।

कानूनी संरक्षण

  • डॉल्फ़िन को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है।
  • इसे IUCN रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा गया है (प्रजाति अनुसार स्थिति भिन्न हो सकती है)।

चुनौतियाँ

  • संरक्षण प्रयासों के बावजूद कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं-
  • झींगा पकड़ने वाली बाड़ें
  • नायलॉन मछली जाल
  • तटीय पारिस्थितिक तंत्र पर मानवीय दबाव
  • विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर निगरानी और सामुदायिक सहयोग से इन चुनौतियों का समाधान संभव है।

समुद्री डॉल्फ़िन:

  • समुद्री डॉल्फ़िन जल में रहने वाले स्तनधारी जीव हैं जो व्हेल परिवार से संबंधित हैं। ये उच्च बुद्धिमत्ता, सामाजिक व्यवहार और अनोखे संवाद क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। 
  • डॉल्फ़िन मुख्यतः महासागर, समुद्री तट और खारे पानी की झीलों में पाई जाती हैं।

वैज्ञानिक वर्गीकरण:

  • परिवार: Delphinidae
  • प्रजातियाँ: हंपबैक डॉल्फ़िन, इरावदी डॉल्फ़िन, बॉटलनेक डॉल्फ़िन, स्पिनर डॉल्फ़िन आदि
  • शारीरिक लक्षण:
    • लंबे, चिकने शरीर
    • पृष्ठीय पंख (Dorsal Fin)
    • नुकीले मुंह वाले स्नाउट
    • उच्च गति से तैरने की क्षमता
  • आयु और प्रजनन:
    • अधिकांश समुद्री डॉल्फ़िन की आयु 20-50 वर्ष तक होती है।
    • इरावदी डॉल्फ़िन जैसी प्रजातियाँ धीमी प्रजनन क्षमता वाली होती हैं।

व्यवहार और जीवनशैली

  • सामाजिक व्यवहार: डॉल्फ़िन समूह में रहती हैं, जिन्हें पॉड कहा जाता है।
  • संचार: अल्ट्रासोनिक सिग्नल, सीटी और आवाज़ के माध्यम से संवाद।
  • भोजन: मुख्य रूप से मछली, स्क्विड और समुद्री जीव।
  • शिकार और रक्षा: तेज़ गति से तैरकर शिकार और शिकारियों से बचाव।

ओडिशा में समुद्री डॉल्फ़िन

  • ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में छह प्रमुख डॉल्फ़िन प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • नवीनतम जनगणना (2025-26) के अनुसार कुल 765 डॉल्फ़िन दर्ज हुईं।
  • प्रमुख आबादी वाले क्षेत्र:
    • चिलिका झील - इरावदी डॉल्फ़िन (159)
    • गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य - हंपबैक डॉल्फ़िन (474)

कानूनी संरक्षण

  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल।
  • IUCN रेड लिस्ट: लुप्तप्राय श्रेणी में।

संरक्षण के उपायों में शामिल हैं:

  • तटीय और आर्द्रभूमि संरक्षण
  • मछली पकड़ने के नियम और प्रतिबंध
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी

संरक्षण की चुनौतियाँ

  • मछली पकड़ने के लिए जाल और बाड़ें डॉल्फ़िन की आवासीय क्षेत्र में बाधा डालती हैं।
  • समुद्री और तटीय पारिस्थितिक तंत्र पर मानवीय दबाव।
  • धीमी प्रजनन दर और प्राकृतिक प्रवास के कारण आबादी में वृद्धि सीमित।

महत्व और निहितार्थ

  • डॉल्फ़िन समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य का सूचक हैं।
  • उनकी सुरक्षा और संरक्षण समुद्री जैव विविधता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्थिर आबादी यह संकेत देती है कि संरक्षण प्रयास और सामुदायिक भागीदारी सफल हैं।

निष्कर्ष

  • ओडिशा में डॉल्फ़िन की संख्या का 765 तक पहुँचना राज्य की प्रभावी समुद्री संरक्षण नीति का प्रमाण है। 
  • वैज्ञानिक निगरानी, पर्यावास संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 
  • यदि यही प्रयास जारी रहे, तो ओडिशा समुद्री जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है।
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