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स्टार्टअप इंडिया के एक दशक

(प्रारंभिक परीक्षा: आर्थिक एवं सामाजिक विकास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय, भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास व रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

16 जनवरी, 2025 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया पहल की 10वीं वर्षगांठ पर भारत के स्टार्टअप समुदाय को संबोधित किया। स्टार्टअप इंडिया नामक महत्वाकांक्षी योजना 16 जनवरी, 2016 को आरंभ की गई थी।

स्टार्टअप इंडिया पहल: उद्देश्य एवं ढांचा 

  • स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है जिसकी शुरुआत 2016 में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाला मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए की गई थी। 
  • इसका मूल उद्देश्य भारत को नौकरी तलाशने वाले देश से रोजगार सृजन करने वाले राष्ट्र में बदलना है।  

योजना के तीन आधारभूत स्तंभ: 

  • प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं मार्गदर्शन (हैंडहोल्डिंग)
  • वित्तीय सहयोग
  • इन्क्यूबेशन एवं उद्योग–शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी 
  • इन प्रावधानों के अंतर्गत पात्र स्टार्टअप्स को कर छूट, अनुपालन में आसानी, प्रारंभिक पूंजी (सीड फंडिंग) और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है जिससे आर्थिक प्रगति व बड़े पैमाने पर रोजगार निर्माण को बल मिलता है। 

स्टार्टअप इंडिया के 10 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियाँ 

1. स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेज़ विस्तार

  • वर्ष 2025 में लगभग 44,000 नए स्टार्टअप्स का पंजीकरण हुआ, जो किसी भी वर्ष की सर्वाधिक वृद्धि है।
  • भारत वर्तमान में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
  • जहाँ 2014 में 500 से भी कम स्टार्टअप्स और केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स और लगभग 125 सक्रिय यूनिकॉर्न अस्तित्व में हैं।
  • परिणामस्वरूप, स्टार्टअप से यूनिकॉर्न और फिर IPO तक की यात्रा ने रोजगार सृजन एवं नवाचार आधारित विकास का एक सशक्त चक्र तैयार किया है। 

2. जोखिम लेने की संस्कृति में बदलाव

  • आज जोखिम उठाना सामाजिक रूप से स्वीकार्य एवं सम्मानजनक माना जाता है जबकि पहले इसे असफलता से जोड़ा जाता था। अब युवा नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने की ओर अग्रसर हैं।
  • उद्यमिता का दायरा अब केवल संपन्न वर्ग तक सीमित न रहकर मध्यम व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक फैल चुका है जिससे उद्यमशील संस्कृति एवं जोखिम पूंजी को बढ़ावा मिला है। 

3. सरकारी सहयोग और वित्तीय समर्थन 

  • फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS) के माध्यम से अब तक 25,000 करोड़ का निवेश किया गया है।
  • फंड ऑफ फंड्स 2.0 (10,000 करोड़) को अप्रैल 2025 में स्वीकृति मिली, जिसका लक्ष्य डीप टेक क्षेत्रों को सशक्त बनाना है, जिनमें शामिल हैं;
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
  • मशीन लर्निंग
  • क्वांटम प्रौद्योगिकी
  • रक्षा एवं एयरोस्पेस 
  • इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों को धैर्यपूर्ण जोखिम पूंजी उपलब्ध कराना है जहाँ परिणाम आने में समय लगता है। 

4. स्वदेशी AI और उन्नत विनिर्माण पर बल

  • प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रतिभा द्वारा विकसित स्वदेशी AI समाधान अपनाने का आह्वान किया, जो भारतीय सर्वरों पर संचालित हों, ताकि डेटा संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।
  • IndiaAI मिशन के अंतर्गत 38,000 से अधिक GPU जोड़े गए हैं जिससे स्टार्टअप्स को उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुँच मिल सके।
  • सरकार का जोर केवल सहयोग पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर के उत्पादों एवं नई तकनीकों में नेतृत्व पर है जिससे रणनीतिक स्वायत्तता व आर्थिक सुरक्षा को मजबूती मिले। 

5. स्टार्टअप आंदोलन में समावेशिता 

  • महिला उद्यमिता:
    • 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।
    • भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महिला-नेतृत्व वाला स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। 
  • क्षेत्रीय विस्तार:
    • टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्टार्टअप गतिविधियों में तेज़ बढ़ोतरी।
    • स्थानीय समस्याओं के समाधान पर ध्यान देकर समावेशी एवं संतुलित विकास को बढ़ावा। 

6. नियामक सुधार और व्यापार सुगमता

  • जन विश्वास अधिनियम के तहत 180 से अधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया।
  • सुधारों में शामिल हैं:
    • विभिन्न कानूनों में स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा
    • विलय एवं निकास प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  • इंस्पेक्टर राज में कटौती 
    • अटल टिंकरिंग लैब्स, हैकाथॉन एवं इन्क्यूबेशन सहायता ने नवाचार को नई ऊर्जा दी है। 

7. नीतिगत समर्थन से क्षेत्रीय उपलब्धियाँ 

  • रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र: 
    • iDEX के माध्यम से स्टार्टअप्स की रक्षा खरीद में भागीदारी।
    • अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण से लगभग 200 अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को वैश्विक मान्यता। 
  • ड्रोन सेक्टर:
    • पुराने और प्रतिबंधात्मक नियम हटाए जाने से नवाचार को बढ़ावा मिला। 
  • Government e-Marketplace (GeM):
    • लगभग 35,000 स्टार्टअप्स और MSMEs प्लेटफॉर्म से जुड़े।
    • 5 लाख से अधिक ऑर्डर, जिनकी कुल कीमत 50,000 करोड़ से अधिक रही। 

चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा

  • वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच निरंतर निवेश प्रवाह बनाए रखना
  • डीप टेक में कौशल और अनुसंधान की कमी को दूर करने के लिए अकादमिक–उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करना
  • गुणवत्ता आधारित विस्तार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना
  • AI आधारित विकास में साइबर सुरक्षा और डेटा शासन सुनिश्चित करना
  • क्षेत्रीय व सेक्टोरल असंतुलन से बचते हुए निर्यातोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन

निष्कर्ष

स्टार्टअप इंडिया पहल के दस वर्ष पूरे होने पर भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ वृद्धि के चरण से आगे बढ़कर टिकाऊ विकास और वास्तविक अर्थव्यवस्था से गहरे जुड़ाव की दिशा में अग्रसर हो चुका है। वस्तुतः यह परिवर्तन केवल संख्या तक सीमित नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जो जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और निरंतर सुधारों पर आधारित है। 

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