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ADR रिपोर्ट 2026: राज्यसभा के 31% सांसदों पर आपराधिक मामले, राजनीति के अपराधीकरण पर उठे गंभीर सवाल

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms-ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (National Election Watch-NEW) द्वारा जारी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्तमान राज्यसभा के लगभग 31 प्रतिशत सांसदों ने अपने चुनावी शपथपत्रों में स्वयं के विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जबकि 16 प्रतिशत सांसद गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। 

रिपोर्ट ने भारतीय लोकतंत्र में राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण (Criminalisation of Politics) और धनबल के प्रभाव को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।

ADR और National Election Watch क्या हैं ?

  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 1999 में भारतीय लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से की गई थी। 
  • यह संगठन चुनावी उम्मीदवारों के शपथपत्रों, राजनीतिक दलों की फंडिंग, चुनावी सुधारों तथा मतदाता जागरूकता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करता है।
  • नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) देशभर के अनेक नागरिक संगठनों का एक नेटवर्क है, जो ADR के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की आपराधिक, वित्तीय एवं शैक्षिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण करता है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • ADR और NEW ने राज्यसभा के 233 में से 226 सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। 
  • पश्चिम बंगाल की चार सीटें रिक्त होने के कारण तथा तीन सांसदों के शपथपत्र उपलब्ध न होने के कारण उनका विश्लेषण नहीं किया जा सका।
  • विश्लेषण के अनुसार, 226 में से 69 सांसद (31 प्रतिशत) ने अपने विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है। 
  • इनमें से 36 सांसद (16 प्रतिशत) ऐसे हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।
  • रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एक सांसद पर हत्या (Murder) का मामला दर्ज है, चार सांसदों पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के मामले हैं तथा चार सांसदों पर महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामले दर्ज हैं।
  • वित्तीय स्थिति के संदर्भ में रिपोर्ट बताती है कि 31 सांसद (14 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनकी घोषित संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है। वर्तमान राज्यसभा सांसदों की औसत घोषित संपत्ति 115.25 करोड़ रुपये है।

ADR के अनुसार गंभीर आपराधिक मामला (Serious Criminal Case) क्या है ?

  • ADR के अनुसार गंभीर आपराधिक मामला वह होता है जो गैर-जमानती (Non-Bailable) तथा संज्ञेय (Cognizable) अपराध की श्रेणी में आता हो और जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। 
  • इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध, भ्रष्टाचार, चुनाव संबंधी अपराध तथा सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक अपराध शामिल होते हैं।

राजनीतिक दलों के अनुसार आपराधिक मामलों की स्थिति

  • रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 107 सांसदों में से 28 सांसद (26%), कांग्रेस के 29 सांसदों में से 12 सांसद (41%), अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के 9 सांसदों में से 2 सांसद (22%), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के 8 सांसदों में से 2 सांसद (25%) तथा समाजवादी पार्टी (SP) के 4 सांसदों में से 2 सांसद (50%) ने अपने विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है।
  • इसी प्रकार, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 4 में से 3 सांसद (75%), भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सभी 3 सांसद (100%), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के सभी 3 सांसद (100%), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 3 में से 2 सांसद (67%), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के 4 में से 1 सांसद (25%), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 4 में से 1 सांसद (25%) तथा आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 में से 1 सांसद (33%) ने भी अपने शपथपत्रों में आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है।

राज्यसभा में धनबल का प्रभाव

  • रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 31 सांसद (14 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनकी घोषित संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • प्रमुख राजनीतिक दलों में भारतीय जनता पार्टी के 7 प्रतिशत, कांग्रेस के 21 प्रतिशत, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के 50 प्रतिशत, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 50 प्रतिशत, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के 67 प्रतिशत तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 50 प्रतिशत सांसदों ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है।

राजनीति का अपराधीकरण (Criminalisation of Politics) क्या है ?

  • जब आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति चुनाव लड़ते हैं, निर्वाचित होकर संसद या विधानसभाओं तक पहुँचते हैं तथा राजनीतिक दल जानबूझकर ऐसे उम्मीदवारों को चुनावी टिकट प्रदान करते हैं, तब इस प्रवृत्ति को राजनीति का अपराधीकरण कहा जाता है। 
  • यह लोकतंत्र की पारदर्शिता, सुशासन तथा कानून के शासन (Rule of Law) के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।

राजनीति के अपराधीकरण के प्रमुख कारण

  • राजनीति और अपराध के बीच बढ़ते गठजोड़ (Politico-Criminal Nexus) को इस समस्या का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। 
  • एन.एन. वोहरा समिति (1993) ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अपराधी, राजनेता, नौकरशाह और कुछ कारोबारी समूहों के बीच गठजोड़ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
  • राजनीतिक दल अक्सर ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं जिनके पास पर्याप्त धनबल, बाहुबल और स्थानीय प्रभाव हो, क्योंकि उन्हें चुनाव जीतने की संभावना अधिक दिखाई देती है।
  • न्यायालयों में मामलों के वर्षों तक लंबित रहने के कारण आरोपी चुनाव लड़ते रहते हैं और सजा न होने तक जनप्रतिनिधि बने रहते हैं।
  • चुनावों में लगातार बढ़ते खर्च के कारण आर्थिक रूप से संपन्न उम्मीदवारों को टिकट मिलने की संभावना अधिक रहती है।
  • कुछ क्षेत्रों में मतदाता भी जातीय समीकरण, स्थानीय प्रभाव या व्यक्तिगत सहायता जैसे आधारों पर मतदान करते हैं, जिससे स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों की तुलना में प्रभावशाली उम्मीदवारों को लाभ मिल जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • ADR के अनुसार देशभर में लगभग 45 प्रतिशत विधायकों (MLAs) ने भी अपने विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जो यह दर्शाता है कि राजनीति का अपराधीकरण केवल संसद तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य स्तर की राजनीति में भी व्यापक रूप से मौजूद है।

राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए उठाए गए कदम

  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 8 के तहत दोषसिद्ध जनप्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त करने तथा उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है।
  • इसी अधिनियम की धारा 33A के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी शपथपत्र में देना अनिवार्य है।

प्रमुख समितियों एवं आयोगों की सिफारिशें

  • गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों तथा उम्मीदवारों की पारदर्शिता बढ़ाने पर बल दिया।
  • विधि आयोग (Law Commission) की 170वीं तथा 244वीं रिपोर्ट में गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने तथा उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की सिफारिश की गई।
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (Second Administrative Reforms Commission-2008) ने भी राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करने हेतु व्यापक चुनावी सुधारों की अनुशंसा की।

सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय

  • ADR बनाम भारत संघ (2002) में सर्वोच्च न्यायालय ने उम्मीदवारों के लिए अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया।
  • लिली थॉमस बनाम भारत संघ (2013) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(4) को असंवैधानिक घोषित करते हुए यह व्यवस्था दी कि किसी सांसद या विधायक के दोषसिद्ध होते ही उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाएगी।
  • पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2019) में सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे अपने उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार पत्रों में सार्वजनिक करें तथा ऐसे उम्मीदवार को टिकट देने का कारण भी स्पष्ट करें।

आगे की राह (Way Forward)

  • राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए गंभीर आपराधिक मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। 
  • राजनीतिक दलों को स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी चाहिए। 
  • चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए तथा मतदाताओं में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग को अधिक प्रभावी प्रवर्तन शक्तियाँ प्रदान करने तथा विभिन्न समितियों एवं विधि आयोग की प्रमुख सिफारिशों को लागू करने की आवश्यकता है।
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