ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से भारत द्वारा अग्नि-3 इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस परीक्षण के माध्यम से मिसाइल की परिचालन क्षमता और विश्वसनीयता की पुष्टि हुई।
अग्नि-3 इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के बारे में
- अग्नि-3 मध्यम से लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी अधिकतम मारक क्षमता लगभग 3,000 किलोमीटर है।
- यह अग्नि मिसाइल परिवार का हिस्सा है और भारत की भूमि-आधारित परमाणु प्रतिरोधक प्रणाली में अहम भूमिका निभाती है।
- इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने किया है। इसे रणनीतिक बल कमान के अधीन परिचालन रूप से तैनात किया गया है।
उद्देश्य
- संभावित लंबी दूरी के खतरों के विरुद्ध विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना
- भारत की द्वितीय-प्रहार क्षमता को सुदृढ़ करना
- अल्प एवं मध्यम दूरी की मिसाइलों से आगे रणनीतिक पहुंच का विस्तार करना
मुख्य विशेषताएँ
- मारक क्षमता: लगभग 3,000 किलोमीटर
- श्रेणी: इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
- प्रक्षेपण प्रणाली: सड़क पर चलने योग्य मोबाइल लॉन्चर, जिनके कैनिस्टरयुक्त संस्करणों का पहले परीक्षण हो चुका है
- वारहेड: पारंपरिक तथा परमाणु दोनों प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम
- मार्गदर्शन प्रणाली: उच्च सटीकता प्रदान करने वाली उन्नत जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली
- प्रणोदन तकनीक: द्वि-चरणीय ठोस ईंधन आधारित इंजन
- परीक्षण परिणाम: वर्ष 2026 में हुए परीक्षण के दौरान सभी तकनीकी एवं परिचालन मानकों की सफल पुष्टि हुई
महत्व
- रणनीतिक सुरक्षा: यह मिसाइल भारत की विस्तृत क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है।
- सैन्य तैयारी: परिचालन कमान के अंतर्गत परमाणु डिलीवरी प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रमाणित करती है।
- मिसाइल नेटवर्क: अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-4 एवं अग्नि-5 के साथ मिलकर 700 से 5,000 किलोमीटर तक की दूरी को कवर करने वाली मिसाइल श्रृंखला को पूर्णता प्रदान करती है।