यह सम्मेलन अब तक आयोजित एआई से संबंधित सबसे बड़े वैश्विक आयोजनों में से एक होगा। इसमें विभिन्न क्षेत्रों और महाद्वीपों से व्यापक भागीदारी देखने को मिलेगी।
इस आयोजन में सरकारों के साथ-साथ उद्योग, अकादमिक जगत, शोध संस्थान, नागरिक समाज संगठन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भाग लेंगी। यह एआई गवर्नेंस के लिए समावेशी एवं बहु-हितधारक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इस सम्मेलन के दौरान विभिन्न कार्य समूहों में रोजगार पर एआई के प्रभाव, एआई प्रणालियों के लिए भरोसेमंद और सुरक्षित ढांचे तथा स्वास्थ्य, उद्योग व सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एआई के अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा होगी।
चीन की संभावित भागीदारी : चीन के एक प्रतिनिधिमंडल के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। भारत ने औपचारिक रूप से चीन को आमंत्रित किया था क्योंकि दोनों देश अपनी घरेलू एआई क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सम्मेलन का स्वरूप और कूटनीतिक लचीलापन : यह सम्मेलन किसी औपचारिक बहुपक्षीय संगठन के अंतर्गत नहीं आता है, बल्कि इसकी संरचना मेज़बान देश द्वारा निर्धारित की जाती है। इससे भारत को भू-राजनीतिक संवेदनशीलताओं के बावजूद चीन को आमंत्रित करने की स्वतंत्रता मिली है।
द्विपक्षीय संबंधों में नरमी के संकेत : चीन को आमंत्रण देना भारत–चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी को दर्शाता है। हाल ही में दोनों देशों के बीच पाँच वर्षों के अंतराल के बाद सीधी उड़ानों की बहाली और दुर्लभ खनिज आपूर्ति से जुड़े प्रतिबंधों में ढील इसके उदाहरण हैं।
कंप्यूटिंग हार्डवेयर पर निर्भरता : एआई क्षेत्र में भारत की एक प्रमुख कमजोरी उन्नत कंप्यूटिंग हार्डवेयर का घरेलू उत्पादन न होना है। उच्च-स्तरीय जी.पी.यू., जो एआई प्रणालियों की रीढ़ हैं, मुख्यतः आयात पर निर्भर हैं जिससे आत्मनिर्भरता सीमित होती है।
भारत–अमेरिका तकनीकी सहयोग की संभावनाएँ : प्रस्तावित अंतरिम भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से तकनीकी उत्पादों, विशेषकर जी.पी.यू. और डेटा सेंटर उपकरणों के व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है जिससे भारत की एआई क्षमता को कुछ हद तक बल मिल सकता है।
डेटा सेंटर नीति और बजटीय संकेत : भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक डेटा सेंटर स्थापना पर कर अवकाश की घोषणा की है ताकि घरेलू एआई अवसंरचना विकसित की जा सके। हालाँकि, केंद्रीय बजट 2026–27 में IndiaAI मिशन के तहत कंप्यूट सब्सिडी के लिए आवंटन में कटौती यह संकेत देती है कि नीति प्राथमिकताओं में पुनर्संतुलन हो रहा है।
ऊर्जा आवश्यकताएँ और परमाणु विकल्प : एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा मांग एक नई चुनौती के रूप में उभर रही है। दीर्घकालिक समाधान के रूप में सरकार परमाणु ऊर्जा को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखने लगी है।
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत के लिए केवल एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है बल्कि वैश्विक एआई गवर्नेंस में नेतृत्व स्थापित करने का रणनीतिक अवसर है। समावेशी विकास, व्यावहारिक नीतियों और ग्लोबल साउथ के हितों पर केंद्रित भारत का दृष्टिकोण वैश्विक एआई विमर्श को नई दिशा दे सकता है। हालाँकि, हार्डवेयर, ऊर्जा और निवेश से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान किए बिना इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाना कठिन होगा। फिर भी, यह सम्मेलन भारत की तकनीकी कूटनीति और वैश्विक भूमिका को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।
Our support team will be happy to assist you!