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ए.आई. द्वारा विनिर्माण क्षेत्र में क्रांति

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान व प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)

संदर्भ 

चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0) में साइबर-भौतिक प्रणालियाँ, जैसे- इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) एवं AI शामिल हैं, जो ‘स्मार्ट फ़ैक्टरियों’ का निर्माण करती हैं जहाँ मशीनें स्वयं अनुकूलन करने के साथ ही स्वायत्त निर्णय लेती हैं और मनुष्यों के साथ सहयोग करती हैं।

विनिर्माण क्षेत्र में ए.आई. का उपयोग 

  • रखरखाव तथा खराबी (जैसे- कंपन, तापमान संबंधी असामान्यताएँ) का पूर्वानुमान लगाने के लिए सेंसर एवं ए.आई. का उपयोग किया जाता है।
  • इसी प्रकार निर्देशात्मक रखरखाव समस्याओं का निदान करता है और सुधारात्मक कार्रवाई की सिफ़ारिश करता है।

विनिर्माण क्षेत्र में लाभ 

समय व लागत में कमी

  • वैश्विक कंपनियों को ब्रेकडाउन के कारण वार्षिक 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान होता है।
  • ए.आई. इसे काफी हद तक कम करता है जिससे कंपनियों की सेवा लागत में लगभग 23% की बचत होती है। 

सुरक्षा एवं दक्षता में वृद्धि

रोबोट ड्रोन/एआई सिस्टम (जैसे- गेको रोबोटिक्स) खतरनाक बुनियादी ढाँचे का निरीक्षण कर सकते हैं, जिससे सुरक्षा में सुधार होने के साथ ही वास्तविक समय विश्लेषण संभव होता है।

असेंबली लाइन अनुकूलन

एआई-सक्षम रोबोटिक्स गति को ठीक एवं समायोजित कर सकते हैं, जिससे कार्य की गति बढ़ जाती है। जैसे- फोर्ड के टॉर्क-कन्वर्टर प्लांट की गति में 15% की वृद्धि देखी गई। 

डाटा-संचालित गुणवत्ता नियंत्रण

ए.आई. दोषों का शीघ्र पता लगाने, अपव्यय को कम करने और उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद करता है।

भारत में ए.आई. उपयोग की स्थिति 

  • भारत में बढ़ता ए.आई. बाज़ार : भारत के विनिर्माण क्षेत्र में ए.आई. बाज़ार के वर्ष 2028 तक 12.6 अरब रुपए तक पहुँचने का अनुमान है (CAGR ~59%)
  • विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग : ए.आई. एवं IoT डेयरी (अमूल), ऑटो (मारुति, बजाज), फार्मा, कपड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पूर्वानुमानित गुणवत्ता मूल्यांकन, रखरखाव, आपूर्ति शृंखला अनुकूलन को सक्षम बना रहा है।
  • सरकारी पहल : भारत का राष्ट्रीय ए.आई. मिशन (जैसे- AI4ICPS, IndiaAI मिशन) औद्योगिक अनुप्रयोगों में ए.आई. अनुसंधान एवं विकास का समर्थन करने के लिए कंप्यूटिंग अवसंरचना में  भारी निवेश  का प्रावधान करता है।

चुनौतियाँ 

  • उच्च अग्रिम लागत : स्मार्ट सेंसर व ए.आई. उपकरणों के लिए उच्च पूंजीगत व्यय की आवश्यकता होती है। 
  • कौशल अंतराल एवं प्रतिरोध : पारंपरिक कर्मचारियों में प्राय: ए.आई./डाटा कौशल का अभाव होता है और उन्हें नौकरी छूटने का डर रहता है। हालाँकि, ए.आई. को एक सहयोगी के रूप में स्थापित किया गया है।
  • अंतर- संचालनीयता एवं डाटा संबंधी समस्याएँ : खंडित डाटा साइलो, मानकीकरण का अभाव और साइबर सुरक्षा संबंधी कमज़ोरियाँ ए.आई. को निर्बाध रूप से अपनाने में बाधा डालती हैं।
  • विश्वासनीयता का अभाव : ब्लैक-बॉक्स ए.आई. मॉडल कर्मचारियों के विश्वास को कम करते हैं।
    • ब्लैक बॉक्स AI (Black Box AI) ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल होते हैं जिनके निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती है अर्थात यह स्पष्ट नहीं होता है कि AI किसी विशेष निष्कर्ष या निर्णय पर कैसे पहुँचा। जब कार्यस्थलों या संगठनों में ऐसे AI सिस्टम उपयोग किए जाते हैं, तो यह कर्मचारियों की विश्वसनीयता (Trustworthiness) को प्रभावित कर सकता हैं। 
      • यदि किसी कर्मचारी का प्रमोशन AI द्वारा रोका जाता है किंतु कारण नहीं बताया जाता है तो वह इसे भेदभाव या पक्षपात मान सकता है।

सरकारी प्रयास

  • प्रोत्साहन योजनाएँ : स्टार्टअप एवं मध्यम एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन (जैसे- पी.एल.आई., ए.आई. तकनीक के लिए सब्सिडी, कर में छूट) बाधाओं को कम कर सकते हैं।
  • कौशल विकास कार्यक्रम : कार्यबल को पुनः कुशल/अपस्किल करने के लिए ए.आई., रोबोटिक्स, डाटा एनालिटिक्स में केंद्रित प्रशिक्षण। 
  • मानदंडों की स्थापना : मानकीकरण, प्रमाणन मानदंड, एल्गोरिथम प्रभाव आकलन (AIA) एवं डाटा-साझाकरण ढाँचे विश्वास का निर्माण करेंगे।
  • बुनियादी ढाँचा निवेश : स्वदेशी जी.पी.यू. फ़ार्म, ए.आई. हब एवं राष्ट्रीय डाटा प्लेटफ़ॉर्म में निरंतर सार्वजनिक निवेश।
  • नैतिक ए.आई. को बढ़ावा : औद्योगिक ए.आई. प्रणालियों में व्याख्यात्मकता, मॉडल ऑडिट और एल्गोरिथम निष्पक्षता को बढ़ावा देना।
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