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एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान

संदर्भ 

  • भारत सरकार देश को एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) की 16वीं बैठक के दौरान एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान के नए परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वस्तुतः यह पहल केवल कार्यक्रम के विस्तार का संकेत नहीं है, बल्कि एनीमिया के विरुद्ध देशव्यापी अभियान को अधिक व्यापक, जन-केंद्रित और तकनीक-संचालित स्वरूप प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन भी है।  

एनीमिया मुक्त भारत से एनीमिया मुक्त भारत अभियान तक

  • अब तक संचालित एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम मुख्यतः आयरन एवं फोलिक एसिड अनुपूरण पर केंद्रित था, लेकिन नए स्वरूप में इसे एनीमिया मुक्त भारत अभियान के रूप में विकसित किया गया है। 
  • अब एनीमिया की रोकथाम और उपचार केवल आयरन सप्लीमेंट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें समय पर जांच, वैज्ञानिक उपचार, संतुलित एवं आयरन युक्त आहार, डिजिटल निगरानी तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी समान महत्व दिया जाएगा। 

6x6x6 से 7x7x7 रणनीति की ओर 

  • नए परिचालन दिशा-निर्देशों के अंतर्गत मौजूदा 6x6x6 रणनीति का विस्तार कर 7x7x7 ढांचे में परिवर्तित किया गया है। इस नई रणनीति में सातवां लाभार्थी समूह, सातवां हस्तक्षेप (उपाय) और सातवां संस्थागत तंत्र जोड़ा गया है।
  • जीवन के शुरुआती चरण में एनीमिया की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए जन्म के समय कम वजन (Low Birth Weight) वाले शिशुओं (0–6 माह) को पहली बार विशेष लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है। इससे ऐसे शिशुओं की प्रारंभिक अवस्था से ही निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।

सही खान-पान पर विशेष बल

  • नई रणनीति में सही खान-पान को सातवें प्रमुख उपाय के रूप में शामिल किया गया है। 
  • इसका उद्देश्य लोगों में आयरन युक्त एवं विविधतापूर्ण भोजन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की आदत विकसित करना है। केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय पोषण आधारित व्यवहार परिवर्तन को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।

टी-3 से टी-4 रणनीति की ओर बदलाव 

  • इस अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता टी-3 (जांच, उपचार और चर्चा) से आगे बढ़कर टी-4 (जांच, उपचार, चर्चा और निगरानी) दृष्टिकोण को अपनाना है। 
  • नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों के हीमोग्लोबिन की नियमित जांच, राष्ट्रीय एनीमिया प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार, व्यवस्थित फॉलो-अप, आवश्यकतानुसार रेफरल तथा संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में निरंतर परामर्श पर विशेष बल दिया जाएगा। 
  • इससे उपचार की प्रभावशीलता बढ़ेगी और एनीमिया की पुनरावृत्ति को भी रोका जा सकेगा।

गंभीर एनीमिया के उपचार को मिलेगी नई मजबूती 

  • गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं में गंभीर एनीमिया अथवा उपचार के प्रति अनुत्तरदायी मामलों के लिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ (FCM) तथा आयरन सुक्रोज के माध्यम से अंतःशिरा (Intravenous) आयरन थेरेपी को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यह कदम गंभीर मामलों में शीघ्र एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

डिजिटल तकनीक से होगी प्रभावी निगरानी  

  • अभियान को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक सशक्त डिजिटल निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन संबंधी आंकड़े जननी पोर्टल के माध्यम से तथा बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी विवरण आरबीएसके और यू-विन पोर्टल के माध्यम से एकत्र किए जाएंगे। 
  • इन सभी प्लेटफॉर्मों को एकीकृत कर एएमबी अभियान पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे लाभार्थियों की वास्तविक समय में निगरानी, डेटा विश्लेषण तथा साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण को गति मिलेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों में सुधार आएगा।

जनभागीदारी बनेगी अभियान की सफलता की कुंजी 

  • नए अभियान में केवल सरकारी स्वास्थ्य तंत्र ही नहीं, बल्कि समुदाय, परिवारों और लाभार्थियों की सक्रिय भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है। 
  • जन-जागरूकता, पोषण संबंधी शिक्षा तथा व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से एनीमिया की रोकथाम को जन-आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जाएगा।

निष्कर्ष 

  • एनीमिया मुक्त भारत अभियान देश में एनीमिया की रोकथाम और उपचार की दिशा में एक व्यापक, वैज्ञानिक एवं तकनीक-आधारित पहल है। 7x7x7 रणनीति, टी-4 दृष्टिकोण, डिजिटल निगरानी प्रणाली, पोषण आधारित व्यवहार परिवर्तन तथा गंभीर एनीमिया के आधुनिक उपचार जैसे प्रावधान इस अभियान को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाएंगे।
  • यह पहल न केवल महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक होगी, बल्कि कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार की यह नई पहल एक स्वस्थ, सशक्त और एनीमिया मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
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