New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM

अंटार्कटिका का रहस्यमयी ज्वालामुखी हर साल उगलता है करोड़ों रुपये का सोना! जानिए क्या है माउंट एरेबस का वैज्ञानिक रहस्य

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में अंटार्कटिका (Antarctica) के सक्रिय ज्वालामुखी Mount Erebus को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुनिया का एकमात्र ज्ञात ज्वालामुखी है, जो वातावरण में शुद्ध सोने (Pure Gold) के सूक्ष्म क्रिस्टल छोड़ता है। अनुमान है कि यह ज्वालामुखी प्रतिवर्ष लगभग 80 ग्राम प्रतिदिन की दर से सोने के सूक्ष्म कण उत्सर्जित करता है, जिनका वार्षिक मूल्य लगभग 19 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।

प्रमुख बिंदु

  • माउंट एरेबस विश्व का सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखी है।
  • यह पृथ्वी का एकमात्र ज्ञात ज्वालामुखी है जो शुद्ध सोने के सूक्ष्म क्रिस्टल उत्सर्जित करता है।
  • प्रतिदिन लगभग 80 ग्राम सोने के सूक्ष्म कण वातावरण में निकलते हैं।
  • सोने के कण लगभग 1000 किलोमीटर तक हवा के साथ यात्रा कर सकते हैं।
  • वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि यह सोना वास्तव में कैसे बनता और वातावरण में कैसे पहुंचता है।

माउंट एरेबस (Mount Erebus) क्या है ?

  • माउंट एरेबस अंटार्कटिका के रॉस द्वीप (Ross Island) पर स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है। 
  • यह रॉस सागर (Ross Sea) के निकट तथा दक्षिणी ध्रुव (South Pole) से लगभग 1,350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ

  • विश्व का सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखी।
  • इसके भीतर स्थायी लावा झील (Permanent Lava Lake) मौजूद है।
  • यह निरंतर ज्वालामुखीय गैसों का उत्सर्जन करता रहता है।

ज्वालामुखी से सोना कैसे निकलता है ?

  • वैज्ञानिकों के अनुसार माउंट एरेबस से निकलने वाली गर्म ज्वालामुखीय गैसों में अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में शुद्ध सोने के कण (Gold Crystals) मौजूद रहते हैं।
  • ये कण सूक्ष्म क्रिस्टल (Microscopic Crystals) के रूप में होते हैं।
  • इनका आकार लगभग 60 माइक्रोमीटर तक हो सकता है।
  • हवा के साथ लगभग 1000 किलोमीटर तक यात्रा कर सकते हैं।
  • अंततः अंटार्कटिका की बर्फ पर जम जाते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से किए गए अध्ययन में पाया गया कि ये केवल धूल के कण नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित क्रिस्टलीय (Crystalline) संरचना वाले शुद्ध सोने के कण हैं।

सोना बनने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्वालामुखीय गैसों में क्लोरीन (Chlorine) एवं सल्फर (Sulfur) युक्त यौगिक मौजूद रहते हैं।
  • अत्यधिक तापमान पर सोना इन गैसों के साथ ऊपर उठता है।
  • जैसे-जैसे गैसें ठंडी होती हैं, सोना अलग होकर सूक्ष्म क्रिस्टलों का रूप ले लेता है।
  • हालांकि, माउंट एरेबस में यह प्रक्रिया अन्य ज्वालामुखियों से अलग दिखाई देती है।

क्या अन्य ज्वालामुखियों में भी सोना मिलता है ?

  • हाँ, वैज्ञानिकों ने अन्य सक्रिय ज्वालामुखियों की गैसों में भी अल्प मात्रा में सोना पाया है, जैसे —
    • Kīlauea (हवाई)
    • Mount Etna (इटली)
    • Augustine Volcano (अलास्का)
    • El Chichón (मैक्सिको)
  • किन्तु माउंट एरेबस अब तक एकमात्र ऐसा ज्ञात ज्वालामुखी है जो क्रिस्टलीय शुद्ध सोने के कण वातावरण में उत्सर्जित करता है।

रहस्य अब भी बरकरार

वैज्ञानिकों ने इस घटना को समझाने के लिए दो प्रमुख परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की हैं -

1. गैसों से प्रत्यक्ष क्रिस्टलीकरण

  • इस सिद्धांत के अनुसार क्लोरीन युक्त ज्वालामुखीय गैसें ठंडी होने पर सोने के क्रिस्टलों का निर्माण करती हैं। हालांकि गैसों में सोने की मात्रा अत्यंत कम होने के कारण इस सिद्धांत पर अभी भी प्रश्न बने हुए हैं।

2. लावा झील में पहले से बनने वाले क्रिस्टल

  • दूसरे सिद्धांत के अनुसार सोने के सूक्ष्म क्रिस्टल पहले लावा झील की सतह पर धीरे-धीरे बनते हैं और बाद में गैसों के साथ वातावरण में पहुंच जाते हैं।
  • अब तक इनमें से किसी भी सिद्धांत की निर्णायक पुष्टि नहीं हो सकी है।

वैज्ञानिक महत्त्व

  • ज्वालामुखीय भू-रसायन (Volcanic Geochemistry) को समझने में सहायता।
  • पृथ्वी के भीतर धातुओं के संचरण की प्रक्रिया पर नई जानकारी।
  • ज्वालामुखीय गैसों की रासायनिक संरचना के अध्ययन में उपयोगी।
  • खनिज निर्माण (Mineral Formation) की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझने में योगदान।

निष्कर्ष

माउंट एरेबस पृथ्वी के सबसे अद्वितीय ज्वालामुखियों में से एक है। इसकी स्थायी लावा झील, निरंतर गैस उत्सर्जन और वातावरण में शुद्ध सोने के सूक्ष्म क्रिस्टलों का उत्सर्जन इसे वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। तीन दशक से अधिक समय के शोध के बावजूद यह रहस्य अब भी अनसुलझा है कि यह ज्वालामुखी सोने के क्रिस्टलों का निर्माण और उत्सर्जन किस सटीक प्रक्रिया से करता है। यही कारण है कि माउंट एरेबस आज भी भूविज्ञान और ज्वालामुखी विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR