एशियाई शेर

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारत में कुल 669 एशियाई शेरों की मौत हुई है किंतु शिकार के कारण कोई मौत दर्ज नहीं की गई है।

एशियाई शेर (Asiatic Lion) के बारे में 

  • परिचय : शेर की यह प्रजाति केवल भारत के गुजरात में पायी जाती है। इसलिये इसे ‘भारतीय शेर’ भी कहते हैं।
    • विश्व में शेर की केवल दो प्रजातियाँ अफ्रीकी शेर एवं एशियाई शेर पायी जाती हैं। 
  • आवास : गुजरात में गिर का जंगल एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
    • गिर में शेरों के लिए पर्याप्त शिकार आधार है जिससे इनकी आबादी बढ़ रही है।
  • वैज्ञानिक नाम : पेंथेरा लियो पेर्सिका  (Panthera leo persica)
  • संरक्षण स्थिति :
    • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) लाल सूची : संकटग्रस्त (Endangered)
    • अंतर्राष्ट्रीय लुप्तप्राय वन्यजीव एवं वनस्पति प्रजाति व्यापार अभिसमय (CITES) : परिशिष्ट I
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 : अनुसूची (I)

संबंधित चिंताएँ 

  • विगत 5 वर्षों में शेरों की मौत : वर्ष 2020 में 142 शेरों की मौत हुई, 2021 में 124, 2022 में 117, 2023 में 121 और 2024 में 165 शेरों की मौत हुई।
  • शेरों की मौत के कारण : वृद्धावस्था, बीमारी, लड़ाई में चोट लगना, शावकों की मृत्यु, खुले कुओं में गिरना, बिजली का झटका लगना, दुर्घटनाएँ आदि।
    • हालाँकि, शिकार के कारण एक भी शेर की मौत दर्ज नहीं की गई है।

आगे की राह 

  • पिछले कुछ वर्षों में विशेषज्ञों ने भारत में शेरों के स्थानांतरण की मांग की है क्योंकि बड़ी बिल्लियाँ (शेर) गिर में भौगोलिक रूप से अलग-थलग हैं। 
  • स्थानांतरण प्राकृतिक आवास, महामारी, शिकार में अप्रत्याशित कमी या प्राकृतिक आपदाओं के मामले में शेरों की आबादी को विलुप्त होने से बचाएगा।
    • सितंबर 2018 में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के कारण गिर में 27 शेरों की मौत हो गई थी।
  • शेरों का वितरण क्षेत्र वर्ष 2015 में 22,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 30,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है जिससे उन्हें अधिक संरक्षण एवं शिकार की आवश्यकता है।
  • हालाँकि, गुजरात वन विभाग शेरों के लिए शिकार आधार बढ़ाने के लिए बरदा अभयारण्य के भीतर जानवरों के लिए एक प्रजनन केंद्र भी संचालित करता है।
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