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महत्वपूर्ण खनिजों ( क्रिटिकल मैटर्स) की नीलामी प्रक्रिया

प्रारंभिक परीक्षा- समसामयिकी, क्रिटिकल खनिज, MMDR
मुख्य परीक्षा- सामान्य अध्ययन, पेपर- 3 

संदर्भ-

  • क्रिटिकल मैटर भविष्य के संसाधन हैं और देश के आर्थिक विकास एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। सरकार ने 30 खनिजों की पहचान क्रिटिकल मैटर के रूप में की है और उनके खनन के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किया है।

मुख्य बिंदु-

  • क्रिटिकल मैटर के 20 ब्लॉकों को निजी क्षेत्र को वाणिज्यिक खनन के लिए नीलाम किया जा रहा है। 
  • खनिज ब्लॉकों में लिथियम अयस्क होता है, जिसका उपयोग बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है और 30 खनिजों में से 10 अन्य हैं जिन्हें सरकार ने जुलाई,2023 में क्रिटिकल घोषित किया था।
  •  पहली बार लिथियम अयस्क के खनन से संबंधित अधिकार निजी क्षेत्र को दिया जा रहा है। 
  • ब्लॉकों में अन्य खनिजों में निकल, तांबा, मोलिब्डेनम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REE) शामिल हैं। 

खान और खनिज (विकास और विनियमन) (MMDR) अधिनियम में संशोधन-

  • 17 अगस्त, 2023 को एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन कर 24 खनिजों को क्रिटिकल और सामरिक खनिजों के रूप में अधिसूचित किया गया था। 
  • संशोधन केंद्र सरकार को इन खनिजों में खनिज रियायत देने की शक्ति प्रदान करता है ताकि केंद्र सरकार देश की आवश्यकताओं को देखते हुए इन खनिजों की नीलामी को प्राथमिकता दे सके। 
  • इन नीलामियों से उत्पन्न राजस्व राज्य सरकारों को मिलेगा। 
  • नीलामी में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए क्रिटिकल खनिजों की रॉयल्टी दरों को तर्कसंगत बनाया गया है। 
  • सरकार ने मार्च, 2022 में प्लेटिनम ग्रुप ऑफ मेटल्स (पीजीएम) के लिए रॉयल्टी दरें 4%, मोलिब्डेनम 7.5%, ग्लौकोनाइट और पोटाश के लिए 2.5% निर्दिष्ट की थीं। 
  • 12 अक्टूबर, 2023 को सरकार ने लिथियम के लिए रॉयल्टी दरें 3%, नाइओबियम 3% और दुर्लभ पृथ्वी तत्व 1% निर्दिष्ट की।

क्रिटिकल खनिजों की स्थिति एवं नीलामी में दिए जाने वाले अधिकार-

mineral

  • खान मंत्रालय द्वारा जारी निविदा आमंत्रण सूचना (NIT) के अनुसार, 20 ब्लॉक आठ राज्यों में फैले हुए हैं। 
  • तमिलनाडु में सात ब्लॉक, ओडिशा में चार, बिहार में तीन, उत्तर प्रदेश में दो और गुजरात, झारखंडछत्तीसगढ़ और जम्मू और कश्मीर में एक-एक ब्लॉक हैं।
  • इन 20 ब्लॉकों में से केवल चार को खनन लाइसेंस (ML) के लिए नीलाम किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि एक बार लाइसेंस मिल जाने के बाद लाइसेंसधारी अपेक्षित मंजूरी प्राप्त करने के बाद खनन कार्य शुरू कर सकता है।
  • इन चार ब्लॉकों में से तीन ओडिशा में हैं, जिसमें निकल, तांबा, ग्रेफाइट और मैंगनीज के भंडार हैं। चौथा ब्लॉक तमिलनाडु में है, जहाँ मोलिब्डेनम का भंडार है।

अन्य 16 ब्लॉकों की नीलामी में दिए जाने वाले अधिकार -

  • शेष 16 ब्लॉकों को कंपोजिट लाइसेंस (CL) के लिए नीलाम किया जा रहा है, जो लाइसेंसधारी को खनिज सामग्री के साक्ष्य का पता लगाने के लिए क्षेत्र के आगे भूवैज्ञानिक अन्वेषण करने की अनुमति देता है।
  • एक बार जब लाइसेंसधारी खनिज भंडार पर पर्याप्त जानकारी एकत्र कर लेते हैं, तो वे अपेक्षित मंजूरी मिलने तक खनन कार्य शुरू करने के लिए अपने कंपोजिट लाइसेंस (CL) को खनन लाइसेंस (ML) में बदलने के लिए संबंधित राज्य सरकार को आवेदन कर सकते हैं। 
  • लाइसेंसधारक के पास अन्वेषण के निर्धारित स्तर को पूरा करने के लिए तीन से पांच वर्ष का समय होगा, उसके पश्चात लाइसेंस वापस ले लिया जाएगा।

परिचालन शुरू करने के लिए अन्य मंजूरी-

  • निविदा आमंत्रण सूचना (NIT) के अनुसार, 7,197 हेक्टेयर (सभी 20 ब्लॉकों के लिए) के कुल रियायती क्षेत्र में से 17 प्रतिशत या 1,234 हेक्टेयर पीएम गतिशक्ति पोर्टल के अनुसार वन भूमि है, जो पूरे देश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और निगरानी की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। 
  • एक बार लाइसेंस मिलने के बाद, लाइसेंसधारी को परिचालन शुरू करने से पहले 15 अनुमोदन और मंजूरी प्राप्त करनी होगी। इनमें वन मंजूरी, पर्यावरण मंजूरी, ग्राम सभा की सहमति आदि शामिल हैं।

नीलामी के लिए चुने गए ब्लॉकों में प्रमुख क्रिटिकल खनिजों का अनुमानित भंडार -

  • लिथियम भंडार के दो ब्लॉक जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में एक-एक CL के लिए नीलामी के लिए तैयार हैं।
  • NIT के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ब्लॉक में 5.9 मिलियन टन (एमटी) बॉक्साइट कॉलम का अनुमानित भंडार है, जिसमें 3,400 टन से अधिक लिथियम धातु सामग्री है। इस ब्लॉक में 70,000 टन से अधिक टाइटेनियम धातु सामग्री भी शामिल है।
  • छत्तीसगढ़ के ब्लॉक में लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REE) हैं, लेकिन कुल भंडार का अनुमान लगाने के लिए अभी तक कोई ड्रिलिंग नहीं की गई है।
  • निकल अयस्क के भंडार तीन ब्लॉकों में पाए गए हैं, जिनमें से बिहार, गुजरात और ओडिशा एक- एक हैं। 
  •  बिहार और गुजरात के ब्लॉकों में ड्रिलिंग नहीं की गई है, ओडिशा ब्लॉक में NIT ने 2.05 मिलियन टन निकल अयस्क का अनुमान लगाया जा रहा है।
  • ओडिशा के इस ब्लॉक की नीलामी ML के लिए की जा रही है। यह 20 में से एकमात्र ब्लॉक है जिसमें तांबे का भंडार है - 6.09 मिलियन टन तांबा अयस्क और 28,884 टन तांबा धातु सामग्री।

वर्तमान में क्रिटिकल खनिजों की आपूर्ति -

  • केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अगस्त,2023 में लोकसभा में बताया था कि वित्त वर्ष 2022- 23 में भारत ने 732 करोड़ रुपये का  2,145 टन लिथियम कार्बोनेट और लिथियम ऑक्साइड का आयात किया। 
  • लिथियम कार्बोनेट में 19 प्रतिशत तक लिथियम होता है। 
  • लिथियम ऑक्साइड, जिसे आमतौर पर लिथियम हाइड्रॉक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, में 29 प्रतिशत लिथियम होता है।
  • भारत ने 2022-23 में 6,549 करोड़ रुपये का 32,000 टन कच्चा निकल और 27,374 करोड़ रुपये का 1.2 मिलियन टन तांबा अयस्क का भी आयात किया।
  • भारत लिथियम और निकल के लिए 100 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। तांबे के लिए यह आंकड़ा 93 फीसदी है।

नीलामी का मौजूदा दौर ख़त्म होने के बाद क्या होगा-

  • सरकार द्वारा 30 खनिजों को क्रिटिकल घोषित करने के बाद बोली प्रक्रिया 29 नवंबर, 2023 को शुरू हुई और वर्ष, 2023 की शुरुआत में तीन महत्वपूर्ण खनिजों, लिथियम, नाइओबियम और आरईई के खनन की अनुमति देने के लिए एक प्रमुख कानूनों में संशोधन किया गया था। 
  • बोलीदाताओं को आकर्षित करने के लिए सरकार ने वैश्विक मानकों के अनुसार महत्वपूर्ण खनिजों के लिए नई रॉयल्टी दरें भी निर्दिष्ट कीं।
  • चल रही नीलामी प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद क्रिटिकल खनिज ब्लॉकों की दूसरी किश्त की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। 
  • फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरी किश्त में राजस्थान और झारखंड में पाए गए नए लिथियम भंडार शामिल होंगे या नहीं।

क्रिटिकल खनिज का महत्व-

  • क्रिटिकल खनिज  देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। 
  • इन खनिजों की उपलब्धता की कमी या कुछ देशों में उनके निष्कर्षण या प्रसंस्करण के संकेंद्रण से आपूर्ति श्रृंखला कमजोर हो सकती है। 
  • भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था उन प्रौद्योगिकियों पर आधारित होगी जो लिथियम, ग्रेफाइट, कोबाल्ट, टाइटेनियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) जैसे खनिजों पर निर्भर हैं। 
  • भारत 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50% संचयी विद्युत स्थापित क्षमता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। 
  • ऊर्जा परिवर्तन के लिए इस तरह की महत्वाकांक्षी योजना इलेक्ट्रिक कारों, पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं और बैटरी भंडारण प्रणालियों की मांग को बढ़ाने के लिए तैयार है, जिससे क्रिटिकल खनिजों की मांग में वृद्धि होगी। 
  • क्रिटिकल और रणनीतिक खनिजों की बहुत मांग है और इसकी पूर्ति आमतौर पर आयात से होती है। 
  • क्रिटिकल खनिज नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, कृषि, फार्मास्युटिकल, उच्च तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, परिवहन, गीगाफैक्ट्रीज़ के निर्माण आदि जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- निम्नलिखित क्रिटिकल खनिजों पर विचार कीजिए।

  1. लिथियम 
  2. निकल
  3. तांबा
  4. ग्रेफाइट
  5. मैंगनीज

भारत उपर्युक्त में से किस/किन खनिज/खनिजों की 100% आयात पर निर्भर है?

(a) केवल 1

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 2, 3 और 4

(d) केवल 1, 4 और 5

उत्तर- (b)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- क्रिटिकल खनिज  देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। विवेचना कीजिए।

स्रोत- indian express, PIB

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