New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM

बायोचार

(सामान्य अध्ययन, प्रश्नप्रत्र-3: जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा)

संदर्भ

स्वीडन के चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने डाइक्लोरो-डाइफेनिल-ट्राइक्लोरोइथेन (DDT) कीटनाशक से होने वाले पारिस्थितिक खतरों को प्रबंधित करने के लिए प्रदूषित मृदा को बायोचार के साथ मिलाकर एक नई विधि तैयार की है।

नई विधि के बारे में 

  • शोधकर्ताओं द्वारा प्रदूषित मृदा में बायोचार मिलाने के बाद मृदा में केंचुओं द्वारा डी.डी.टी. का अवशोषण आधा हो गया। 
    • यह मृदा के जीवों के लिए डी.डी.टी. की जैव उपलब्धता में कमी को दर्शाता है अर्थात मिट्टी की विषाक्तता में कमी हुई। इससे खाद्य श्रृंखला में जैव संचय के माध्यम से डी.डी.टी. के प्रसार का जोखिम कम हो गया था।
  • यह विधि पर्यावरणीय जोखिमों के कारण अनुपयोगी मानी जाने वाली भूमि पर कुछ फसलों को उगाने में सक्षम कर सकती है। 
  • इससे पोषक चक्रण, जल चक्रण एवं कार्बन भंडारण जैसी मृदा गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 

बायोचार के बारे में 

  • क्या है : चारकोल जैसा एक कार्बन समृद्ध पदार्थ
  • निर्माण : लकड़ी का कचरा, घास, फसल अवशेष आदि किसी भी जैविक (कार्बन युक्त) सामग्री से
  • निर्माण प्रक्रिया : पायरोलिसिस प्रक्रिया (Pyrolysis Process) द्वारा ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उच्च तापमान पर गर्म करके
    • इसमें 77% कार्बन, 3.90% पोटाश, 2.70% फास्फोरस एवं 0.46% नाइट्रोजन की मात्रा पाई जाती है।
    • पायरोलिसिस (Pyrolysis) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में विभिन्न कार्बनिक पदार्थों को गर्म करने की प्रक्रिया है।

बायोचार के लाभ 

  • मृदा स्वास्थ्य में सुधार : बायोचार दूषित पदार्थों को रोकता है और मिट्टी में मिलाए जाने पर मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है। 
  • जलवायु परिवर्तन शमन : यह विधि जलवायु परिवर्तन शमन के लिए भी उपयोगी हो सकती है क्योंकि यह मृदा में कार्बन के दीर्घकालिक भंडारण में योगदान दे सकता है।
  • लागत प्रभावी : बायोचार के साथ उपचार विधि भूमि को निम्न लागत पर उपयोगी बना सकता है।  
  • दीर्घकालिक प्रभाव : मृदा में बायोचार के बहुत धीरे-धीरे विघटित होने से इस विधि का प्रभाव लंबे समय तक बना रहेगा। 
  • फसल उत्पादकता में सुधार : बायोचार एक स्पंज की तरह काम करता है जिससे मृदा की जल एवं पोषक तत्वों की प्रतिधारण क्षमता में सुधार हो सकता है।
  • संभावनाएँ : डी.डी.टी. एवं मृदा में मौजूद अनेक धातुओं व पॉलीएरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसे विभिन्न अन्य प्रदूषकों के स्थिरीकरण के लिए बायोचार का उपयोग भविष्य में किया जा सकता है। 

डाइक्लोरो-डाइफेनिल-ट्राइक्लोरोइथेन (DDT)

  • डाईक्लोरो-डाईफेनिइल-ट्राईक्लोरोएथेन (Dichloro-Diphenyl-Trichloroethane : DDT) एक रंगहीन, स्वादहीन एवं गंधहीन क्रिस्टलीय रासायनिक यौगिक है।
  • इसका उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है। 
  • इसके कीटनाशी प्रभावों की खोज वर्ष 1939 में स्वीडेन के रसायनविद पॉल हर्मान मूलर (Paul Hermann Müller) ने किया था। 
    • इस खोज के लिए इन्हें वर्ष 1948 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • पहली बार इसका प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान आम जनता और सैनिकों में मलेरिया व टाईफाइड के प्रसार की रोकथाम के लिए किया गया था। 
  • वर्ष 1950 और 1960 के दशक में DDT का प्रयोग कृषि में तेजी से किया जाने लगा। 
    • इसके व्यापक उपयोग के कारण वन्य जीव एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के कारण अधिकांश देशों में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 
      • हालाँकि, अभी भी अनेक देशों द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR