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ब्लू ड्रैगन : समुद्र की रहस्यमयी प्रजाति

संदर्भ

समुद्र की एक दुर्लभ प्रजाति ‘ब्लू ड्रैगन (Glaucus atlanticus)’ के बड़ी संख्या में तटों पर बहकर आने के कारण स्पेन के कई समुद्र तट हाल ही में बंद करने पड़े। यह एक असामान्य घटना है क्योंकि यह जीव सामान्यतः उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्रों में पाए जाते हैं, न कि भूमध्यसागर में।

Glaucus-atlanticus

ब्लू ड्रैगन के बारे में

  • ब्लू ड्रैगन एक छोटी समुद्री स्लग (Sea Slug) प्रजाति है जिसकी लंबाई मात्र 4 सेमी. तक होती है। 
  • इन्हें ग्लौकस अटलांटिकस (Glaucus atlanticus) कहा जाता है। ये समुद्र की सतह पर तैरते हैं और सामान्य स्लग की तरह समुद्र तल पर नहीं रहते हैं।
  • इन्हें ‘ब्लू ग्लॉक्स’, ‘सी स्वैलो’ या ‘ब्लू एंजल’ भी कहा जाता है।

विशेषताएँ

  • नीले और सफेद रंग के कारण समुद्र में आसानी से छिप जाते हैं।
  • उल्टे तैरते हैं और पेट में हवा का बुलबुला भरकर सतह पर बने रहते हैं।
  • इनके शरीर पर डंक जैसी जहरीली संरचनाएँ होती हैं।
  • इनका डंक जेलीफ़िश से भी अधिक तेज़ हो सकता है। 
  • ये समुद्री धाराओं (Currents) के साथ बहते रहते हैं।
  • इनका प्रमुख भोजन जेलीफ़िश और जहरीले पुर्तगीज मेन ओ वार (Portuguese man o’ war) जैसे सिफोनोफोरेस (Siphonophores) हैं।
  • ये शिकार के जहरीले डंक को अपने शरीर में संरक्षित कर लेते हैं तथा उसे और भी ज्यादा घातक बना देते हैं।

अनुकूल वातावरण

  • ब्लू ड्रैगन सामान्यतः प्रशांत, अटलांटिक एवं हिंद महासागर के गर्म उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। 
  • किंतु हाल के वर्षों में इनका विस्तार दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया तक देखा गया है। 

पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका

ब्लू ड्रैगन समुद्री खाद्य श्रृंखला में संतुलन बनाए रखते हैं। ये जेलीफ़िश जैसी प्रजातियों को नियंत्रित करते हैं जिससे समुद्र में अन्य जीवों की संख्या एवं संतुलन बना रहता है।

हालिया घटना: स्पेन के बीच बंद करना 

  • हाल ही में, स्पेन के विवर्स बीच (Guardamar del Segura), सांता बारबरा बीच (La Línea de la Concepción) और फामारा बीच (Lanzarote) पर इनकी बड़ी संख्या देखी गई।
  • भूमध्यसागर में इनकी उपस्थिति समुद्र के बढ़ते तापमान से जुड़ी मानी जा रही है।
  • इनके डंक से मनुष्यों में गंभीर दर्द, लालिमा, सूजन, उल्टी एवं चक्कर जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • हालांकि, यह डंक जानलेवा नहीं है किंतु पर्यटन स्थल पर इसके कारण खतरा बढ़ गया है।

खतरे

  • समुद्र तट पर तैराकों और पर्यटकों को चोट लगने का डर
  • समुद्र के गर्म होते तापमान के कारण इनकी संख्या और उपस्थिति में वृद्धि से तटीय पारिस्थितिकी में असंतुलन की आशंका
  • पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव 

आगे की राह

  • जलवायु परिवर्तन और समुद्र के तापमान में बढ़ोतरी पर गंभीर वैश्विक प्रयास
  • समुद्र तटों पर निगरानी और चेतावनी तंत्र को मजबूत करना
  • पर्यटकों को ऐसे जीवों के बारे में जागरूक करना
  • वैज्ञानिक शोध और नागरिक सहभागिता के माध्यम से इनके व्यवहार को समझना
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