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जनगणना 2027: पहली डिजिटल व जाति-आधारित जनगणना

संदर्भ

केंद्र सरकार ने भारत की जनगणना 2027 आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस उद्देश्य के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय 12 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। जनगणना 2027 स्वतंत्र भारत की आठवीं और कुल मिलाकर देश की 16वीं जनगणना होगी। 

विधायी एवं बजट संबंधी विवरण

पैरामीटर

विवरण

जनगणना वर्ष

2027

स्वीकृत लागत

11,718.24 करोड़

महत्व

देश की 16वीं जनगणना; स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना

कानूनी ढाँचा

जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990

पिछली जनगणना

कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना संपन्न नहीं हो पाई थी।

  • एन.पी.आर. पर अस्पष्टता: वर्ष 2019 के विपरीत इस बार के सरकारी बयान में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अद्यतन करने के लिए अलग से बजटीय आवंटन का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • एन.पी.आर. स्थिति: एन.पी.आर. को पहली बार वर्ष 2010 में एकत्र किया गया था और वर्ष 2015 में अद्यतन किया गया था। इसमें पहले से ही 119 करोड़ निवासियों का डेटाबेस मौजूद है।
  • डेटा गोपनीयता: जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जनगणना डेटा को साझा करने पर रोक है जबकि एन.पी.आर. डेटा राज्य सरकारों और सरकारी एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है। 

डिजिटल पहल एवं कार्यप्रणाली

यह ‘पहली डिजिटल जनगणना’ होगी जिसमें निम्नलिखित कार्यप्रणाली को अपनाया जाएगा-

  1. डेटा संग्रह: डेटा को मोबाइल एप्लिकेशन (एंड्रॉइड एवं आईओएस) का उपयोग करके एकत्र किया जाएगा।
  2. प्रबंधन एवं निगरानी: संपूर्ण प्रक्रिया को वास्तविक समय में प्रबंधित और निगरानी करने के लिए एक समर्पित पोर्टल ‘जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS)’ विकसित किया गया है।
  3. एच.एल.बी. क्रिएटर: प्रभारी अधिकारियों द्वारा हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLB) क्रिएटर वेब मैप एप्लिकेशन का उपयोग एक नवाचार है। 
  4. स्वयं गणना: जनता को स्वयं गणना (Self-Enumeration) करने का विकल्प भी प्रदान किया जाएगा।

जनगणना-एक-सेवा (CAAS) और डेटा प्रबंधन

सरकार के अनुसार, जनगणना 2027 को ‘दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय अभ्यास’ माना जा रहा है। इसके तहत जनगणना-एक-सेवा (Census-as-a-Service) पहल शुरू की जाएगी, जिससे विभिन्न मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय व उपयोग-योग्य डेटा प्राप्त होगा। डेटा का प्रसार बेहतर विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स के माध्यम से किया जाएगा जिससे नीति-निर्माण के लिए आवश्यक सूचनाएँ त्वरित रूप से उपलब्ध हो सकें।

जातिगत गणना का समावेश

  • राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल को आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया।
  • इसका उद्देश्य देश की व्यापक सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय विविधता और उससे संबंधित चुनौतियों को देखते हुए जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (PE) में जातिगत आंकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र किया जाएगा।

 जनगणना का चरणबद्ध कार्यक्रम

जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है-

चरण

अवधि

विवरण

प्रथम

अप्रैल से सितंबर 2026

हाउसलिस्टिंग (मकानों की सूची बनाना) और आवास जनगणना। यह चरण राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित किया जाएगा।

द्वितीय 

फरवरी  2027

जनसंख्या गणना (Population Enumeration: PE)

गैर-समकालिक क्षेत्र: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू एवं कश्मीर के हिमपात से प्रभावित क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड राज्यों के लिए जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।

 रोजगार और क्षमता निर्माण

  • फील्ड स्टाफ की तैनाती: जनगणना कार्यों के आंकड़ों के संग्रह, निगरानी एवं पर्यवेक्षण के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा (जिसमें गणनाकर्ता, पर्यवेक्षक आदि शामिल हैं)।
  • रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर लगभग 18,600 तकनीकी कर्मचारियों को 550 दिनों के लिए नियुक्त किया जाएगा, जिससे लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
  • कर्मचारी: जनगणना अधिनियम, 1948 के अनुसार, आंकड़े दर्ज करने वाले गणनाकर्ता सभी सरकारी अधिकारी होते हैं जिनमें से अधिकांश स्कूल शिक्षक होते हैं, जो यह कार्य अपने नियमित कर्तव्यों के अतिरिक्त करते हैं और उचित मानदेय प्राप्त करते हैं। 

निष्कर्ष

जनगणना 2027 भारत के प्रशासनिक, सामाजिक एवं आर्थिक नियोजन में एक निर्णायक भूमिका निभाएगी। डिजिटल तकनीक और जातिगत आंकड़ों को शामिल करने से यह अभ्यास अधिक समावेशी, पारदर्शी और नीति-उन्मुख बनेगा, जिससे शासन एवं विकास योजनाओं की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार की अपेक्षा है। 

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