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दृष्टिबाधित छात्रों के लिये वरदान बनता ब्रेल मानचित्र

चर्चा में क्यों?

देश भर में दृष्टिबाधित छात्र ‘डिजिटल एम्बॉसिंग’ (उभरे अक्षर) तकनीक का उपयोग करके बनाए गए ब्रेल मानचित्रों का उपयोग कर सकेंगें। 

डिजिटल एम्बॉसिंग तकनीक

  • डिजिटल एम्बॉसिंग तकनीक में प्रिंटिंग प्लेट, मोल्ड, रसायन और सॉल्वेंट्स की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें कोई प्रदूषक या अपशिष्ट उत्सर्जित नहीं होता है और कुल ऊर्जा उपयोग में कमी आती है।
  • विषयगत मानचित्र भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार किये जाते हैं। अंतिम रूप से ब्रेल मानचित्र प्राप्त करने के लिये 3-D एम्बॉसिंग के लिये ए.आई. तकनीक का प्रयोग करते हैं।
  • इस प्रौद्योगिकी का डिजाइन और कार्यान्वयन राष्ट्रीय एटलस एवं थीमैटिक मानचित्रण संगठन ने किया है।

राष्ट्रीय एटलस एवं थीमैटिक मानचित्रण संगठन (NATMO)

natmo

  • इसकी स्थापना वर्ष 1956 में हुई। इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित है। 
  • यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है। यह भारत की एकमात्र एजेंसी है जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय एटलस का संकलन करती है। 

संगठन के अन्य प्रमुख कार्य

  • विभिन्न आँकड़ों के आधार पर विषयगत मानचित्रों को तैयार करके प्रकाशन करना।
  • नवीनतम तकनीक का उपयोग करके डिजिटल मैपिंग करना।
  • नेत्रहीनों के लिये विभिन्न प्रकार के मानचित्र विकसित करना।
  • आधुनिक कार्टोग्राफिक सेवाओं में अनुसंधान एवं विकास करना। 
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