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प्रकृति के स्मार्ट फिल्टर: सुंदरबन के मीठे पानी के स्पंज

(प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ 

  • जलीय प्रदूषण वर्तमान में वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे में वैज्ञानिक अब प्रकृति के उन रहस्यों को खोजने का प्रयास कर रहे हैं जो प्रदूषण का सामना करने में हमारे सबसे शक्तिशाली सहयोगी बन सकते हैं। 
  • हाल ही में बोस संस्थान (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) के शोधकर्ताओं ने सुंदरबन डेल्टा में पाए जाने वाले ‘मीठे पानी के स्पंज’ पर एक क्रांतिकारी अध्ययन किया है जो भविष्य के जल शोधन के लिए नई उम्मीद जगाता है।

क्या हैं (Freshwater Sponges) मीठे पानी के स्पंज

  • ये जीव पृथ्वी के सबसे प्राचीन बहुकोशिकीय जीवों (यूकैरियोट्स) में से एक हैं। दिखने में पौधे जैसे ये जीव वास्तव में जंतु हैं जो स्वच्छ धाराओं, झीलों एवं नदियों में डूबी हुई सतहों पर उगते हैं।
  • इन्हें प्रकृति का ‘जल शोधक’ कहा जाता है क्योंकि ये जीवित रहने के लिए बड़ी मात्रा में पानी को अपने शरीर के छिद्रों से छानते हैं। 

प्रजनन की विशेषताएँ

  • ये स्पंज लैंगिक एवं अलैंगिक दोनों तरीकों से प्रजनन करने में सक्षम होते हैं। अलैंगिक प्रजनन में स्पंज का कोई छोटा भाग अलग होकर एक नए स्पंज में विकसित हो सकता है। 
  • इसके अलावा इनमें जेम्यूल्स नामक छोटे प्रजनन संरचनाएँ बनती हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों (जैसे- सर्दी) में जीवित रहती हैं और अनुकूल मौसम आने पर नए स्पंज को जन्म देती हैं।  

जैव-सूचक एवं शोषक

  • ‘माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम’ में प्रकाशित यह शोध सुंदरबन के स्पंजों में मौजूद जीवाणु विविधता पर प्रकाश डालने वाला पहला अध्ययन है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
    • जहरीली धातुओं का संचय: शोध में किये गए अध्ययन से पता चला कि इन स्पंजों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) एवं कैडमियम जैसी घातक धातुओं को सोखने की अद्भुत क्षमता है। गंगा के मैदानी इलाकों में बढ़ते भारी धातु प्रदूषण के खिलाफ ये एक ‘जैविक हथियार’ की तरह काम कर सकते हैं।
    • विशेष जीवाणु समुदाय: स्पंज के भीतर रहने वाले बैक्टीरिया (सूक्ष्मजीव) आसपास के पानी से बिल्कुल भिन्न होते हैं। ये सहजीवी न केवल स्पंज को भोजन देते हैं बल्कि पानी को विषमुक्त करने में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। 
    • आनुवंशिक अनुकूलन: वैज्ञानिकों ने पाया कि स्पंज से जुड़े इन जीवाणुओं में ऐसे विशेष जीन (Gene) होते हैं जो धातु प्रतिरोध एवं विषहरण (Detoxification) में सक्षम हैं। अर्थात ये प्रदूषित वातावरण में केवल जीवित ही नहीं रहते हैं बल्कि उसे स्वच्छ करने का काम भी करते हैं।

भविष्य की राह: जैव उपचार (Bioremediation)

  • सुंदरबन के स्पंज अब केवल एक शोध का विषय नहीं रहे, बल्कि वे ‘जैव-संकेतक’ (Bio Indicators) के रूप में जल की गुणवत्ता निगरानी का एक प्रभावी जरिया बन गया है।
  • इस शोध ने ‘जैव उपचार’ (Bioremediation) के क्षेत्र में नए मार्ग खोले हैं जहाँ इन प्राकृतिक फिल्टरों का उपयोग करके नदियों एवं जलाशयों से विषाक्त धातुओं को निकाला जा सकता है। 
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