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ब्रॉन्को टेस्ट: भारतीय क्रिकेटरों के लिए नया फिटनेस मापदंड

संदर्भ

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस को उच्च स्तर पर बनाए रखने और उनकी एरोबिक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक नया फिटनेस टेस्ट ‘ब्रॉन्को टेस्ट’ शुरू किया गया है जोकि रग्बी-केंद्रित है।

ब्रॉन्को टेस्ट के बारे में 

  • ब्रॉन्को टेस्ट रग्बी खेल से प्रेरित एक फिटनेस टेस्ट है, जिसमें खिलाड़ी को 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की कई शटल रन पूरी करनी होती हैं। 
  • इन तीन दूरी की दौड़ को एक सेट माना जाता है। एक खिलाड़ी को बिना रुके पांच ऐसे सेट पूरे करने होते हैं जो कुल मिलाकर 1,200 मीटर की दूरी होती हैं। 
  • भारतीय खिलाड़ियों को यह टेस्ट 6 मिनट के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
  • यह टेस्ट खिलाड़ियों की एरोबिक क्षमता, सहनशक्ति एवं तेजी से रिकवरी करने की क्षमता को मापता है।
  • बी.सी.सी.आई. के बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कुछ शीर्ष खिलाड़ी पहले ही इस टेस्ट से गुजर चुके हैं।

यो-यो टेस्ट से तुलना

  • यो-यो टेस्ट: इस टेस्ट में खिलाड़ी को 20 मीटर की दूरी पर रखे मार्करों के बीच बढ़ती गति से दौड़ना होता है, जिसमें प्रत्येक 40 मीटर की दौड़ के बाद 10 सेकंड का विश्राम मिलता है। भारतीय टीम के लिए न्यूनतम यो-यो स्तर 17.1 निर्धारित है।
  • 2 किमी. टाइम ट्रायल: तेज गेंदबाजों के लिए इस टेस्ट का बेंचमार्क 8 मिनट 15 सेकंड और बल्लेबाजों, विकेटकीपरों एवं स्पिनरों के लिए 8 मिनट 30 सेकंड है।
  • ब्रॉन्को टेस्ट: यह टेस्ट यो-यो टेस्ट की तुलना में अधिक तीव्र है क्योंकि इसमें बिना विश्राम के लगातार 1,200 मीटर की दौड़ शामिल है। यह टेस्ट विशेष रूप से तेज गेंदबाजों की सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता को परखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारतीय टीम को कैसे मदद मिलेगी

  • ब्रॉन्को टेस्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय क्रिकेटरों, खासकर तेज गेंदबाजों, की फिटनेस को बेहतर बनाना है। 
  • हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान कुछ तेज गेंदबाजों का फिटनेस स्तर अपेक्षित नहीं था। 

इस टेस्ट के प्रमुख लाभ

  • बेहतर सहनशक्ति: यह टेस्ट खिलाड़ियों की एरोबिक क्षमता को बढ़ाएगा, जो लंबे टेस्ट मैचों में महत्वपूर्ण है।
  • तेज गेंदबाजों पर ध्यान: ले रूक्स का मानना है कि तेज गेंदबाजों को जिम में समय बिताने के बजाय अधिक दौड़ने की जरूरत है, जिससे उनकी सहनशक्ति एवं मैदान पर प्रदर्शन में सुधार होगा।
  • स्पष्ट फिटनेस मानक: ब्रॉन्को टेस्ट से स्पष्ट फिटनेस मापदंड स्थापित होंगे, जिससे खिलाड़ियों को लगातार उच्च स्तर की फिटनेस बनाए रखने में मदद मिलेगी।
  • टीम की समग्र तैयारी: यह टेस्ट न केवल तेज गेंदबाजों बल्कि सभी खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की मांगों के लिए बेहतर तैयार करेगा।
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