केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम, 2025

संदर्भ 

  • केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम, 2025 और तंबाकू उत्पादों से जुड़े कर परिवर्तनों को अधिसूचित कर दिया है। नया नियम 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो रहा है। इसके प्रमुख उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करना हैं।
  • इस कदम के साथ ही जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त हो जाएगा और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में संशोधन किए जाएंगे, जिससे तंबाकू उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होगी तथा उनका कर ढांचा अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनेगा।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम, 2025

यह अधिनियम केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 में संशोधन करता है और तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर कर ढांचे को अद्यतन करता है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • उत्पाद शुल्क दरों में बदलाव: जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति के बाद तंबाकू पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाकर समग्र कर भार को बनाए रखने और बढ़ाने का प्रयास किया गया है। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं-

उत्पाद

पहले का उत्पाद शुल्क

नया उत्पाद शुल्क

अविनिर्मित तंबाकू

64%

70%

चबाने वाला तंबाकू

25%

100%

हुक्का/गुड़ाखू तंबाकू

25%

40%

पाइप/सिगरेट धूम्रपान मिश्रण

60%

325%

सिगरेट

₹200–₹735 प्रति हजार स्टिक

₹2,700–₹11,000 प्रति हजार स्टिक 

  • जन स्वास्थ्य उद्देश्य: यह कदम वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुरूप है ताकि सिगरेट की वास्तविक कीमतें आय में वृद्धि की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ें। इसका उद्देश्य तंबाकू की खपत को नियंत्रित करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालना है।
  • 3जी.एस.टी. दरों का पुनर्गठन : बीड़ी पर 18% जी.एस.टी. लागू होगा। अन्य सभी तंबाकू उत्पादों पर 40% जी.एस.टी. निर्धारित किया गया है। चबाने वाले तंबाकू, गुटखा, खैनी, जर्दा आदि पर पैकेज पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर जी.एस.टी. मूल्यांकन होगा।

जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति उपकर: अंत की ओर

  • जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति उपकर एक अतिरिक्त शुल्क है जो जी.एस.टी. के कार्यान्वयन से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए चुनी गई वस्तुओं पर लगाया जाता है। इसकी शुरुआत जुलाई 2017 में हुई थी और इसे मूल रूप से पांच वर्षों के लिए लागू किया गया था।
  • कोविड-19 महामारी के कारण इसे 31 मार्च, 2026 तक बढ़ाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों को मुआवजा देने के लिए केंद्र द्वारा लिए गए 2.7 लाख करोड़ रुपए के ऋण को चुकाना था।

नवीन बदलाव

1 फरवरी, 2026 से यह उपकर पूरी तरह समाप्त हो रहा है। तंबाकू उत्पादों, पान मसाला, कार्बोनेटेड और कैफीनयुक्त पेय, लग्जरी कारें, 350 सीसी से अधिक की मोटरसाइकिलें तथा कुछ आग्नेयास्त्र इससे प्रभावित होंगे। 

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