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अंतरिक्ष यात्रा एवं मानव शरीर से संबंधित चुनौतियाँ

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, अंतरिक्ष)

संदर्भ 

  • जैसे-जैसे मानव चंद्रमा और आगे चलकर मंगल ग्रह पर लंबे अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी कर रहा है, वैसे-वैसे वैज्ञानिकों के सामने यह समझना एक बड़ी चुनौती बन गया है कि अंतरिक्ष यात्रा मानव शरीर को किस तरह प्रभावित करती है। 
  • यह पहले से ज्ञात है कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण और अंतरिक्ष विकिरण अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं किंतु इनके सूक्ष्म जैविक व तंत्रिका संबंधी प्रभाव को समझना अब भी जरूरी है।

अंतरिक्ष में प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर अध्ययन 

  • इसी दिशा में सऊदी अरब के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया एक अध्ययन साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ। 
  • इस शोध में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजी गई मानव प्रतिरक्षा कोशिकाओं ‘टीएचपी-1 मोनोसाइट्स’ का विश्लेषण किया गया। 
  • अध्ययन से पता चला है कि अंतरिक्ष के वातावरण ने इन कोशिकाओं की जीन अभिव्यक्ति में बड़े बदलाव किए। वस्तुतः जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) कोशिकाओं को यह निर्देश देती है कि वे कैसे कार्य करें। 

जीन गतिविधि में बदलाव एवं संभावित जोखिम 

  • शोध में यह सामने आया है कि हृदय क्रिया, तंत्रिका तंत्र तथा दृष्टि एवं गंध जैसी इंद्रियों से जुड़े जीन असामान्य रूप से अधिक सक्रिय हो गए। 
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि ये परिवर्तन अंतरिक्ष यात्रियों में देखी जाने वाली समस्याओं, जैसे- हृदय संबंधी जोखिम और नींद में समस्या, से जुड़े हो सकते हैं। 
  • इसके विपरीत डी.एन.ए. की मरम्मत एवं कोशिका विभाजन में सहायक जीनों की सक्रियता में कमी पाई गई, जो लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से जुड़े संभावित खतरों की ओर संकेत करती है।

मस्तिष्क पर अंतरिक्ष यात्रा का प्रभाव 

  • मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव वैज्ञानिकों के लिए विशेष चिंता का विषय हैं। पहले के अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि गुरुत्वाकर्षण के अभाव में मस्तिष्क खोपड़ी के भीतर अपनी स्थिति बदलता है, हालांकि ये अध्ययन पूरे मस्तिष्क की औसत गति तक सीमित थे।
  • इस संदर्भ में, जर्मनी और अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक अध्ययन में मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले परिवर्तनों की गहराई से जांच की गई। 
  • शोधकर्ताओं ने 26 अंतरिक्ष यात्रियों के मिशन से पहले व बाद के एम.आर.आई. स्कैन का विश्लेषण किया और उनकी तुलना 24 लोगों के एक नियंत्रण समूह से की, जिन्हें 60 दिनों तक सिर नीचे करके लेटने वाले अध्ययन में शामिल किया गया था ताकि भारहीनता के प्रभावों की नकल की जा सके।

प्रमुख निष्कर्ष

  • अध्ययन में पाया गया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्र अलग-अलग तरीकों से खिसकते और अस्थायी रूप से विकृत होते हैं। 
  • गति व संवेदनाओं को नियंत्रित करने वाले हिस्सों में सर्वाधिक परिवर्तन दर्ज किए गए। 
  • लगभग एक वर्ष अंतरिक्ष में बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में सप्लीमेंट्री मोटर कॉर्टेक्स औसतन 2.52 मिमी. ऊपर की ओर स्थानांतरित पाया गया। 
  • इसके अलावा पोस्टीरियर इंसुला में अधिक बदलाव होने पर पृथ्वी पर लौटने के बाद संतुलन परीक्षणों में प्रदर्शन कमजोर रहने की प्रवृत्ति देखी गई। 

अध्ययन की सीमाएँ

  • शोधकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि अध्ययन की कुछ सीमाएँ हैं। इनमें- 
    • प्रतिभागियों की संख्या सीमित होना
    • मस्तिष्क के अत्यंत सूक्ष्म क्षेत्रीय परिवर्तनों को पूरी तरह दर्ज न कर पाना 
    • मिशन के बाद अलग-अलग समय पर परीक्षण किया जाना और 
    • गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों की सटीक नकल करने में अवनति परीक्षण की सीमित क्षमता शामिल है। 

आगे की राह

इन सीमाओं के बावजूद शोध दल का मानना है कि उनका अध्ययन सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के विभिन्न अवधियों के संपर्क में आने से उत्पन्न मस्तिष्क के क्षेत्रीय विरूपण और स्थिति में होने वाले बदलावों का एक उन्नत व विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है जो भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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