New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

चिकशुलूब प्रभाव 

(प्रारंभिक परीक्षा :  भारत एवं विश्व का भूगोल)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र:1-विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ)

चर्चा में क्यों

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर लगभग 3 बिलियन वर्ष पूर्व क्षुद्रग्रह की टक्कर से आई विशाल सुनामी (Megatsunami) को पृथ्वी के चिकशुलूब प्रभाव (Chicxulub Impact) के समान बताया है। 

प्रमुख बिंदु

  • शोधकर्ताओं ने जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया है कि मंगल ग्रह के महासागरीय क्षेत्र में स्थित एक क्रेटर का व्यास लगभग 110 किलोमीटर है जो लगभग 3.4 बिलियन वर्ष पूर्व एक क्षुद्रग्रह की टक्कर से बना होगा। 
  • वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की इस घटना को पृथ्वी पर घटित हुए चिकशुलूब प्रभाव के समान बताया है, जो मंगल ग्रह पर सुनामी एवं भूकंप का कारण बना होगा। 

चिकशुलूब प्रभाव 

  • लगभग 66 मिलियन वर्ष पूर्व एक बड़े क्षुद्रग्रह (लगभग 10 किमी. चौड़ा) के पृथ्वी से टकराने के कारण मेक्सिको के समीप महासागर में एक विशाल क्रेटर का निर्माण हुआ तथा 1.5 किमी. ऊँची सुनामी की लहरें उत्पन्न हुई। 
  • यह क्रेटर मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप के नीचे दबा हुआ है जिसका व्यास लगभग 180 किमी. और गहराई लगभग 20 किमी. है। 
  • इस क्रेटर का केंद्र चिकशुलूब नामक मेक्सिको के शहर के समीप स्थित है जिस पर इस क्रेटर का नाम पड़ा है।
  • विदित है कि इस घटना के कारण डायनासोर सहित सभी पौधों और जीवों की लगभग 75% प्रजातियाँ  विलुप्त हो गई थी।

Megatsunami

क्षुद्र ग्रह

  • क्षुद्रग्रह मुख्यतया चट्टानी आकाशीय पिंड हैं, जिन्हें लघु ग्रह भी कहा जाता है। ये सूर्य की परिक्रमा करते हैं तथा ग्रहों की तुलना में बहुत छोटे होते हैं। 
  • क्षुद्रग्रह को उनकी उपस्थिति के संदर्भ में तीन वर्गों में विभाजित किया गया है। पहले वर्ग में मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच मुख्य क्षुद्रग्रहों की पट्टी में लगभग 1.1-1.9 मिलियन क्षुद्रग्रहों के पाए जाने का अनुमान लगाया गया है।
  • दूसरा वर्ग ट्रोज़न का है, जो एक बड़े ग्रह के साथ कक्षा को साझा करते हैं। नासा द्वारा बृहस्पति, वरुण और मंगल के साथ-साथ वर्ष 2011 में पृथ्वी की कक्षा में भी ट्रोज़न की उपस्थिति दर्ज की गई थी। 
  • तीसरे वर्ग में पृथ्वी के करीब से परिक्रमा करने वाले नियर-अर्थ एस्ट्रोइड्स (NEA) को रखा गया है, जिनकी संख्या 1,400 से अधिक है। इन्हें संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों (Potentially Hazardous Asteroid  : PHA) के रूप में जाना जाता है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X