
- 16 दिसंबर को भारत में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- यह दिन 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय और पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
- इस युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च बलिदान के कारण इसे शहीद दिवस के रूप में भी स्मरण किया जाता है।

1971 युद्ध की पृष्ठभूमि और मूल कारण
भारत–पाक विभाजन की त्रुटिपूर्ण संरचना (1947)
- 1947 में पाकिस्तान का गठन दो भौगोलिक रूप से अलग हिस्सों में हुआ:
- पश्चिमी पाकिस्तान
- पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश)
- दोनों के बीच लगभग 1600 किमी भारतीय भूभाग था।
- भाषा, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में गहरा अंतर मौजूद था।
भाषायी एवं सांस्कृतिक भेदभाव
- पूर्वी पाकिस्तान की बहुसंख्यक आबादी बंगाली भाषी थी।
- 1948 में पाकिस्तान ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रीय भाषा घोषित किया।
- इसके विरोध में 1952 का भाषा आंदोलन हुआ, जिसमें कई छात्रों की मृत्यु हुई।
- इससे पूर्वी पाकिस्तान में असंतोष और अलगाव की भावना गहराई।
राजनीतिक उपेक्षा और सत्ता का केंद्रीकरण
- सत्ता, सेना और प्रशासन पर पश्चिमी पाकिस्तान का वर्चस्व था।
- पूर्वी पाकिस्तान:
- जनसंख्या में बहुसंख्यक होने के बावजूद
- सत्ता और संसाधनों में नगण्य भागीदारी
- राजस्व का बड़ा हिस्सा पश्चिमी पाकिस्तान पर खर्च होता था।
1970 का आम चुनाव और सत्ता हस्तांतरण से इनकार
- 1970 के आम चुनावों में:-
- शेख मुजीबुर्रहमान की अवामी लीग को स्पष्ट बहुमत मिला।
- संवैधानिक रूप से उन्हें सरकार बनानी थी, लेकिन:
- जनरल याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो ने सत्ता सौंपने से इनकार किया।
- यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन था।
‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ (मार्च 1971)
- 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया।
- उद्देश्य:
- बंगाली नेताओं, छात्रों और बुद्धिजीवियों को कुचलना
- परिणाम:
- व्यापक नरसंहार
- महिलाओं पर अत्याचार
- लाखों नागरिकों की हत्या
शरणार्थी संकट और भारत पर प्रभाव
- पाकिस्तानी दमन के कारण:
- लगभग 1 करोड़ बंगाली शरणार्थी भारत आए।
- सर्वाधिक प्रभावित राज्य:
- पश्चिम बंगाल
- त्रिपुरा
- असम
- प्रभाव:
- भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ
- सामाजिक और प्रशासनिक संकट
मुक्ति बाहिनी और भारत का अप्रत्यक्ष समर्थन
- पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति बाहिनी नामक सशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हुआ।
- भारत ने:
- शरणार्थियों को आश्रय
- मानवीय सहायता
- कूटनीतिक समर्थन दिया
- प्रारंभ में भारत ने प्रत्यक्ष युद्ध से परहेज किया।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत की रणनीति
- भारत ने वैश्विक मंचों पर पाकिस्तानी अत्याचारों को उजागर किया।
- अगस्त 1971: भारत–सोवियत मैत्री संधि पर हस्ताक्षर
- परिणाम:
- अमेरिका–चीन–पाकिस्तान धुरी का संतुलन
- भारत को रणनीतिक सुरक्षा मिली
युद्ध की तात्कालिक शुरुआत और प्रमुख घटनाएँ
युद्ध की अवधि
- युद्ध की शुरुआत: 3 दिसंबर 1971
- युद्ध की समाप्ति: 16 दिसंबर 1971
तात्कालिक कारण
- 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने: भारत के पश्चिमी हवाई अड्डों पर हवाई हमला किया।
- इसके बाद भारत ने: पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर युद्ध की घोषणा की।
मुख्य घटनाएँ
- भारतीय सेना ने पूर्वी मोर्चे पर तीव्र और निर्णायक अभियान चलाया।
- थलसेना, वायुसेना और नौसेना के संयुक्त अभियानों ने पाकिस्तान को कमजोर किया।
- 16 दिसंबर 1971 को:
- पाकिस्तान ने 93,000 सैनिकों सहित आत्मसमर्पण किया।
युद्ध का परिणाम
- पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बना।
- भारत को:
- सैन्य
- राजनीतिक
- रणनीतिक स्तर पर ऐतिहासिक सफलता मिली।
- यह युद्ध भारत के इतिहास की सबसे निर्णायक और बड़ी जीत माना जाता है।
विजय दिवस का महत्व
- भारतीय सेना की वीरता, साहस और बलिदान का प्रतीक।
- शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का दिन।
- हर वर्ष:
- सैन्य परेड
- स्मरण सभाएँ
- श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
- युवाओं और विद्यार्थियों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का विकास।
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