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कूलिंग क्षेत्र में जलवायु निवेश 

(प्रारंभिक परीक्षा : पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे, जिनके लिये विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ 

हाल ही में, विश्व बैंक ने हीट वेव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करते हुए भारत के कूलिंग क्षेत्र में जलवायु निवेश के अवसर’ नामक रिपोर्ट को जारी किया है।  

रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • वर्ष 2030 के बाद से भारत में प्रत्येक वर्ष 160 से 200 मिलियन से अधिक लोग घातक हीट वेव के संपर्क में आ सकते हैं।
  • साथ ही, लगभग 34 मिलियन भारतीयों को हीट स्ट्रेस के कारण उत्पादकता में गिरावट से नौकरी के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
  • इसके अतिरिक्त, वर्ष 2037 तक कूलिंग की माँग वर्तमान स्तर से आठ गुना अधिक होने की संभावना है। इसका आशय है कि प्रत्येक 15 सेकंड में एक नए एयर कंडीशनर की माँग होगी, जिससे अगले दो दशकों में वार्षिक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 435% की वृद्धि होने की संभावना है।

रिपोर्ट के सुझाव

  • जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में हो रहे तापमान वृद्धि को रोकने के लिये वैकल्पिक और नवीन ऊर्जा कुशल तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिये। 
    • ऊर्जा कुशल तकनीकों में वर्ष 2040 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हो सकता है। साथ ही, लगभग 3.7 मिलियन रोजगार भी सृजित किया जा सकता है। इन ऊर्जा कुशल मार्ग को अपनाने से अगले दो दशकों में अपेक्षित कार्बन डाइऑक्साइड स्तरों में पर्याप्त कमी आ सकती है।
  • इस रिपोर्ट में भारत में कूलिंग के लिये एक स्थायी रोडमैप का सुझाव प्रस्तुत किया गया है, ताकि वर्ष 2040 तक वार्षिक रूप से 300 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जा सके। रिपोर्ट में तीन प्रमुख क्षेत्रों- भवन निर्माण, कोल्ड चेन और रेफ्रिजरेंट में निवेश को बढ़ावा देने को कहा गया है। 
  • विदित है कि भारत की कूलिंग रणनीति जीवन और आजीविका को बचाने में मदद कर सकती है, कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकती है और साथ ही भारत को ग्रीन कूलिंग निर्माण के लिये एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है। 

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान

इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भारत में पहले से ही लोगों को बढ़ते तापमान के अनुकूल बनाने में मदद करने के लिये रणनीति क्रियान्वित है। वर्ष 2019 में, भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सतत शीतलन उपाय प्रदान करने के लिये इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP) लॉन्च किया, जिसमें इमारतों एवं कोल्ड चेन में इनडोर कूलिंग, कृषि एवं फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रशीतन और यात्री परिवहन में एयर कंडीशनिंग शामिल हैं। इसका उद्देश्य वर्ष 2037-38 तक कूलिंग की माँग को 20 से 25% तक कम करना है।

  • इसमें डिस्ट्रिक्ट कूलिंग तकनीक (District Cooling technique) के लिये एक नीति बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया ताकि सबसे कुशल पारंपरिक कूलिंग समाधानों की तुलना में ऊर्जा की खपत को 20-30% तक कम किया जा सके।  
    • इस तकनीक के माध्यम से एक केंद्रीय संयंत्र में ठंडा पानी उत्पन्न किया जाता हैं जिसे पश्चात् इसे भूमिगत इन्सुलेटेड पाइपों के माध्यम से इमारतों में वितरित किया जाता है। यह इमारतों को ठंडा करने की लागत को कम करता है। 
  • परिवहन के दौरान उच्च तापमान के कारण भोजन और दवा की बर्बादी को कम करने के लिये कोल्ड चेन वितरण नेटवर्क में अंतराल को ठीक करने की सिफारिश की गई है। प्री-कूलिंग और रेफ्रिजरेटेड परिवहन में निवेश करके भोजन की हानि को लगभग 76% तक और कार्बन उत्सर्जन को 16% तक कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
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