New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम

संदर्भ 

  • भारत सरकार नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी तथा सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद के 16वें सम्मेलन के दौरान 'समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम' का शुभारंभ किया जाएगा। यह पहल प्रत्येक बच्चे को जन्म से लेकर जीवन के पहले तीन वर्षों तक व्यापक, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है।  

समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में  

  • जीवन के शुरुआती तीन वर्ष किसी भी बच्चे के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि माने जाते हैं। 
  • इसी सोच को केंद्र में रखते हुए यह कार्यक्रम पहले तीन साल संपूर्ण देखभाल के विज़न पर आधारित है।

उद्देश्य : 

  • इसका उद्देश्य केवल बच्चों को बीमारियों से बचाना ही नहीं, बल्कि उनके पोषण, मस्तिष्क के शुरुआती विकास, सीखने की क्षमता और संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण को भी सुनिश्चित करना है।

प्रमुख विशेषताएं 

एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं की नई व्यवस्था:

  • समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम समुदाय आधारित दो प्रमुख योजनाओं - घर पर नवजात शिशु की देखभाल (HBNC) और छोटे बच्चों की घर पर देखभाल (HBYC) को एकीकृत कर एक व्यापक ढांचे में संचालित करेगा। 
  • इससे जन्म से लेकर 36 महीने की आयु तक बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी और देखभाल का एक समन्वित मॉडल विकसित होगा। 

जोखिम वाले बच्चों पर विशेष ध्यान:

  • इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जोखिम-आधारित देखभाल प्रणाली है। 
  • पहली बार ऐसे नवजात शिशुओं और बच्चों की पहचान की जाएगी जिन्हें विशेष स्वास्थ्य जोखिम है। उनकी स्थिति के अनुसार अतिरिक्त घरेलू भ्रमण (होम विज़िट) किए जाएंगे।
    • जोखिम वाले नवजात शिशुओं के लिए जन्म के बाद पहले 42 दिनों में 9 तक होम विज़िट की व्यवस्था होगी।
    • जोखिम वाले बच्चों के लिए 36 महीने की आयु तक 8 अतिरिक्त होम विज़िट सुनिश्चित की जाएंगी।
    • इससे समय रहते स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उचित उपचार संभव हो सकेगा। 

आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संयुक्त भूमिका:

  • कार्यक्रम में समुदाय स्तर पर कार्यरत आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इनके समन्वित प्रयासों से बच्चों और माताओं को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी।
  • इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND) पर वेल-बेबी सेशन आयोजित किए जाएंगे तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रत्येक माह शिशु शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, जोखिम की पहचान और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।

मातृ मानसिक स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल विकास पर विशेष बल:

  • यह कार्यक्रम केवल बच्चों के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रसव के बाद माताओं के मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग भी इसकी महत्वपूर्ण विशेषता होगी। साथ ही, घर-घर जाकर दी जाने वाली सेवाओं के दौरान अभिभावकों को निम्न विषयों पर भी जागरूक किया जाएगा -
  • आयु के अनुसार खेल एवं गतिविधियाँ,
    • प्रारंभिक शिक्षा,
    • सुरक्षित पालन-पोषण,
    • परिवार की सक्रिय भागीदारी,
    • बच्चों के भावनात्मक एवं सामाजिक विकास की आवश्यकताएँ। 
  • इस प्रकार कार्यक्रम प्रारंभिक बचपन विकास (Early Childhood Development) को स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बनाएगा।

डिजिटल तकनीक से सटीक निगरानी:

  • कार्यक्रम को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से भी जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS), चाइल्ड ट्रैकिंग एप्लिकेशन, रेफरल सिस्टम और अलर्ट मैकेनिज्म का उपयोग किया जाएगा।
  • ये प्रणालियाँ जननी पोर्टल, यू-विन (U-WIN) पोर्टल, मातृ, प्रसवकालीन, शिशु मृत्यु निगरानी और समीक्षा (एमपीसीडीएसआर- MPCDSR) पोर्टल, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के.) 2.0 तथा पोषण ट्रैकर से एकीकृत रहेंगी। 
  • आभा (ABHA) एवं बाल-आभा आईडी के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे सेवाओं की निरंतरता और निगरानी अधिक प्रभावी बन सकेगी।

शहरी और वंचित वर्गों तक पहुँच:

  • कार्यक्रम केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। झुग्गी-बस्तियों, प्रवासी परिवारों तथा कम सुविधा वाले शहरी इलाकों में रहने वाले बच्चों तक भी घर-आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में समानता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

डिजिटल युग की चुनौतियों का समाधान 

  • आज के समय में छोटे बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और घटती शारीरिक गतिविधियों को देखते हुए कार्यक्रम में अभिभावकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी शामिल किए गए हैं। 
  • इनमें बच्चों को आयु के अनुरूप खेल, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया है, ताकि उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR