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भारतीय स्टार्ट-अप्स के लिये क्राउडफंडिंग

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

वर्तमान में भारत के बहुत से स्टार्टअप्स निवेश की कमी से जूझ रहे हैं। इक्विटी क्राउडफंडिंग स्टार्ट-अप्स के लिये एक व्यवहार्य फंडिंग प्रणाली प्रदान करता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा जांच के बाद इसकी अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।

क्या है क्राउडफंडिंग 

क्राउडफंडिंग व्यक्तिगत निवेशकों के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पूंजी जुटाने की एक विधि है। क्राउडफंडिंग मुख्यत: सोशल मीडिया और वेबसाइटों के माध्यम से ऑनलाइन की जाती है। 

वर्तमान परिदृश्य

  • भारतीय स्टार्ट-अप ने विगत वर्ष वैश्विक निवेशकों का ध्यान अत्यधिक आकर्षित किया है। हालाँकि, जनवरी 2022 तक शुरू किये गए स्टार्ट-अप में से केवल 7% ही वेंचर कैपिटल निवेशकों से धन जुटाने में सफल रहे हैं।
  • गैर-निधिकृत स्टार्ट-अप को न केवल पूँजी जुटाने के लिये माध्यमों की आवश्यकता होती है, बल्कि वित्त पोषित स्टार्ट-अप भी जोखिमपूर्ण  पूँजी एवं निजी इक्विटी निवेशकों पर अपनी निर्भरता कम करने के साधनों की तलाश में रहते हैं।

क्राउडफंडिंग की आवश्यकता

  • एक आँकड़े के अनुसार, महामारी के दौरान भारतीय परिवारों की संपत्ति और बचत में वृद्धि हुई है। 
  • गौरतलब है कि विगत दो वर्षों में स्टॉक, म्युचुअल फंड, क्रिप्टोकरेंसी आदि में पर्याप्त मात्रा में धन का निवेश किया गया है। 
  • क्राउडफंडिंग चैनल के माध्यम से खुदरा निवेशकों को उच्च जोखिम लेने की अनुमति देना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 
  • यह न केवल छोटे निवेशकों को स्टार्ट-अप पारितंत्र से लाभान्वित करेगा, बल्कि स्टार्ट-अप कंपनियों के लिये धन का एक अधिक स्थायी स्रोत भी प्रदान करेगा।
  • सामुदायिक क्राउडफंडिंग में सामाजिक या धर्मार्थ कारणों के लिये धन जुटाया जाता है। भारत में यह कानूनी तौर पर मान्य है । 

विनियामक चुनौतियाँ

  • सेबी द्वारा वर्ष 2014 में इक्विटी क्राउडफंडिंग पर एक परामर्श पत्र जारी किये जाने के बाद ज्यादा प्रगति नहीं हुई है, जो प्रमुख चुनौतियों में से एक है।
  • सबसे बड़ी विनियामक चुनौती निवेशकों की सुरक्षा को लेकर है। एंजेल और वेंचर निवेशकों द्वारा निवेश की गई पूँजी के संदर्भ में यदि कंपनी डिफॉल्ट करती है, तो निवेशकों की पूँजी की स्थिति क्या रहेगी?
  • संदिग्ध परियोजनाओं में पैसा लगाने हेतु निवेशकों को ठगने के लिये इस प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा सकता है। 
  • सोशल मीडिया एवं इंटरनेट पर चलाए जा रहे फंड जुटाने के अभियान से विदेशों से भी पैसा जुटाया जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और मनी लॉन्ड्रिंग का उल्लंघन हो सकता है।
  • कंपनी अधिनियम, 2013 (जो इक्विटी शेयरों के सार्वजनिक और निजी प्लेसमेंट के लिये नियम निर्धारित करता है) और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम को संशोधित करने की आवश्यकता है, जिससे व्यवसायों को इन प्लेटफार्मों के माध्यम से इक्विटी जारी करने की अनुमति मिल सके।

आगे की राह

  • भारतीय संदर्भ में योग्य संस्थागत खरीददारों (Qualified Institutional Buyers : QIBs), कंपनियों, उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्तियों और पात्र खुदरा निवेशकों (Eligible Retail Investors : ERI) को क्राउडफंडिंग के माध्यम से निवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिये ।
  • ई.आर.आई. की न्यूनतम वार्षिक आय 25 लाख हो सकती है और उन्हें कम से कम दो वर्षों के लिये कर रिटर्न दाखिल करना चाहिये। प्रत्येक क्राउडफंडिंग अभियान में निवेश के लिये 1 लाख की सीमा होनी चाहिये। 
  • प्रत्येक क्राउडफंडिंग अभियान का आकार 10 करोड़ तक सीमित होना चाहिये और   सेबी के पास सभी वित्तीय जानकारी दर्ज करानी चाहिये। 
  • इनके माध्यम से जारी किये गए शेयरों को संस्थागत व्यापार मंच (Institutional Trading Platform: ITP) पर सूचीबद्ध एवं व्यापार किया जा सकता है। 
  • यह न केवल क्राउडफंडिंग अभियानों में निवेशकों को तरलता प्रदान करेगा, बल्कि आई.टी.पी. प्लेटफॉर्म स्टार्ट-अप निवेश के लिये एक सक्रिय केंद्र भी बन सकता है।
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