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डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) ने भारत तथा नेपाल में भाषा एआई, बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और समावेशी डिजिटल पारितंत्रों को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने हेतु नेपाल की काठमांडू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीपीआई-एआई) के साथ एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते से संबंधित प्रमुख बिंदु 

  • यह साझेदारी समावेशी विकास, सामाजिक सशक्‍तीकरण और क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर भारत और नेपाल के साझा विज़न को प्रतिबिंबित करती है। 
  • यह एमओयू केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लोगों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने, भाषाई विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने और भाषा, साक्षरता तथा डिजिटल बाधाओं को दूर कर, पूरे क्षेत्र में अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की एक पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है। 

एमओयू के क्षेत्र: 

  • एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान उच्च गुणवत्ता वाले नेपाली भाषा डेटासेट, स्पीच संग्रह (corpora) और बहुभाषी एआई संसाधन जिनमें स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-स्पीच, मशीन ट्रांसलेशन और बहुभाषी संवादात्मक एआई क्षमताओं के विकास में सहयोग करेंगे।
  • यह साझेदारी भारत-नेपाल क्षेत्र की अल्प-संसाधनयुक्त और कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं की भाषाई एवं साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण को भी समर्थन प्रदान करेगी, जिससे उन समुदायों को अपनी मातृ-भाषा में एआई-सक्षम उपकरणों तथा सेवाओं तक पहुँच मिल सके, जिनकी भाषाएं डिजिटल विलुप्ति के जोखिम का सामना कर रही हैं। 
  • भाषिणी के खुले और अंतर-संचालनीय भाषा प्रौद्योगिकी पारितंत्र के माध्यम से यह सहयोग नेपाल सरकार को नागरिकों तक डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार उनकी पसंदीदा भाषाओं में करने में सहायता प्रदान करेगा, जिससे अंतिम छोर तक भाषा, साक्षरता और डिजिटल पहुँच संबंधी बाधाओं को कम किया जा सकेगा।  
  • यह एमओयू प्राकृतिक भाषा संसाधन (एनएलपी), बहुभाषी एआई तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, क्षमता विकास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रायोगिक परियोजनाओं की भी परिकल्पना करता है, जिसके अंतर्गत दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, भाषा विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाएगा। 
  • इस साझेदारी से नेपाल के नागरिकों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और पेशेवरों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल वाणिज्य तथा सार्वजनिक सेवाओं तक बहुभाषी पहुँच को सक्षम बनाकर, नेपाल के भीतर तथा क्षेत्रीय और वैश्विक बाजारों में नए आर्थिक और सामाजिक अवसरों का सृजन करने की भी अपेक्षा की जाती है। 

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) के बारे में 

  • डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी), एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन और भाषा प्रौद्योगिकी के लिए भारत की राष्ट्रीय पहल है। 
  • नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी (एनएचएलटी) के माध्यम से भाषिणी शासन, सार्वजनिक मंचों और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में विस्तार-योग्य वाक् तथा पाठ-आधारित एआई सेवाएं उपलब्ध कराता है। 
  • यह मंच 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन देता है, प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक इन्फरेंस को प्रोसैस करता है तथा 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाक् भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को समर्थन प्रदान करता है। 
  • डीआईबीडी मुक्त-स्रोत नवाचार, बहुभाषी एआई अनुसंधान, डेटासेट निर्माण, स्टार्टअप संवर्धन और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा देता है, जिससे भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारितंत्र को सुदृढ़ किया जा सके। 
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