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डॉर्नियर 228 विमान

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited: HAL) के साथ 2,312 करोड़ का अनुबंध किया है। इस समझौते के तहत तटरक्षक बल के लिए आठ डॉर्नियर (Dornier 228) विमान खरीदे जाएंगे। यह सौदा स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

डॉर्नियर 228: एक बहुउद्देश्यीय उपयोगिता विमान  

  • डॉर्नियर 228 दो इंजन वाला एक टर्बोप्रॉप शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (STOL) विमान है जिसे यात्रियों, माल परिवहन व विशेष मिशनों के लिए विकसित किया गया है। 
  • इसका उपयोग समुद्री गश्ती, सीमा निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों तथा लॉजिस्टिक परिवहन कार्यों में व्यापक रूप से किया जाता है। 

निर्माण पृष्ठभूमि 

इस विमान का मूल विकास 1980 के दशक की शुरुआत में जर्मनी की कंपनी Dornier GmbH द्वारा किया गया था। भारत में इसका लाइसेंस प्राप्त उत्पादन एच.ए.एल. द्वारा किया जाता है और वर्तमान में इसका निर्माण कानपुर स्थित संयंत्र में हो रहा है। 

प्रमुख वेरिएंट 

  • डॉर्नियर 228-100/200: प्रारंभिक 15 और 19 सीटों वाले संस्करण
  • डॉर्नियर 228 एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन): आधुनिक ग्लास कॉकपिट और पाँच-ब्लेड प्रोपेलर से युक्त उन्नत मॉडल
  • हिंदुस्तान-डॉर्नियर 228: एचएएल द्वारा निर्मित नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए अनुकूलित संस्करण
  • समुद्री गश्ती संस्करण: निगरानी रडार और मिशन-विशिष्ट प्रणालियों से सुसज्जित
  • एयर एम्बुलेंस/वीआईपी संस्करण: चिकित्सा और विशेष परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित

तकनीकी विशेषताएँ 

  • यात्री एवं माल क्षमता: यह विमान अधिकतम 19 यात्रियों या समकक्ष कार्गो भार वहन करने में सक्षम है जिससे यह एक प्रभावी हल्का कम्यूटर विमान बनता है।
  • इंजन: यह दो गैरेट TPE331 टर्बोप्रॉप इंजनों से संचालित होता है जो ईंधन दक्षता, विश्वसनीयता और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं।
  • एस.टी.ओ.एल. क्षमता: विशेष पंख डिजाइन के कारण यह छोटी तथा कच्ची हवाई पट्टियों से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। यही विशेषता इसे दूरस्थ एवं तटीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनाती है। 
  • उच्च सहनशक्ति: एच.ए.एल. द्वारा निर्मित मानक संस्करण लगभग 5-6 घंटे तक निरंतर उड़ान भर सकता है जो निगरानी अभियानों के लिए पर्याप्त है।
  • संरचनात्मक डिजाइन: आयताकार धड़ और बड़े साइड-लोडिंग दरवाजों के कारण इसमें कार्गो, स्ट्रेचर या मिशन उपकरणों को आसानी से लादा जा सकता है।
  • उन्नत एवियोनिक्स (एनजी संस्करण): ग्लास कॉकपिट, डिजिटल डिस्प्ले व ऑटोपायलट जैसी आधुनिक प्रणालियाँ पायलट की स्थितिजन्य जागरूकता और उड़ान सुरक्षा को बढ़ाती हैं।
  • समुद्री निगरानी उपकरण: समुद्री संस्करण 360° निगरानी रडार, इन्फ्रारेड सेंसर और रियल-टाइम डेटा लिंक से लैस होता है जिससे तटीय क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी एवं संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।

सामरिक और औद्योगिक महत्व 

  • यह विमान भारतीय तटरक्षक बल की तटीय निगरानी, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा और तस्करी-रोधी अभियानों को मजबूती प्रदान करेगा।
  • ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के अंतर्गत की गई यह खरीद स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
  • इसके निर्माण से रोजगार के अवसर सृजित होते हैं और एच.ए.एल. की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सहायक उद्योगों को भी लाभ मिलता है।  
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