डीआरडीओ ने समुद्री जल विलवणीकरण झिल्ली विकसित की

चर्चा में क्यों?

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने समुद्री जल विलवणीकरण के लिए स्वदेशी नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमेरिक झिल्ली विकसित की है।
    • समुद्री जल विलवणीकरण एक प्रक्रिया है जिससे समुद्र के खारे पानी से नमक और अशुद्धियां निकालकर पीने योग्य ताजा पानी बनाया जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह विकास डीआरडीओ की कानपुर स्थित प्रयोगशाला, रक्षा सामग्री भंडार और अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने किया है।
  • झिल्ली को भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के जहाजों में उपयोग के लिए तैयार किया गया है।
  • इस तकनीक से खारे पानी की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।
  • इसे रिकॉर्ड आठ महीनों के अंदर विकसित किया गया है।

तकनीकी परीक्षण और स्वीकृति

  • डीएमएसआरडीई ने भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर तटरक्षक बल के अपतटीय गश्ती पोत (ओपीवी) में विलवणीकरण संयंत्र के प्रारंभिक तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक किए हैं।
  • परीक्षण परिणाम पूरी तरह से संतोषजनक रहे हैं।
  • 500 घंटे के परिचालन परीक्षण के बाद भारतीय तटरक्षक बल अंतिम स्वीकृति प्रदान करेगा।

भविष्य की संभावनाएँ

  • वर्तमान में यह झिल्ली अपतटीय गश्ती पोत पर परीक्षण के चरण में है।
  • कुछ आवश्यक सुधारों के बाद यह झिल्ली तटीय क्षेत्रों में समुद्री जल विलवणीकरण के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी।
  • यह पहल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप डीएमएसआरडीई द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO):

  • यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की अनुसंधान एवं विकास विंग है।
  • इसका गठन वर्ष 1958 में किया गया था।
  • इसका मुख्यालय दिल्ली में है।
  • इसका उद्देश्य अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ भारत को सशक्त बनाना है।

प्रश्न.  डीआरडीओ ने समुद्री जल विलवणीकरण के लिए किस प्रकार की झिल्ली विकसित की है? 

(a) नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमेरिक झिल्ली

(b) कार्बन नैनोट्यूब झिल्ली

(c) सिलिका बेस्ड झिल्ली

(d) सिरेमिक झिल्ली

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