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वित्तीय क्षेत्र स्थिरता मूल्यांकन रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम, रिपोर्ट एवं सूचकांक, आर्थिक और सामाजिक विकास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र- 3: आर्थिक विकास, भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ‘भारत : वित्तीय क्षेत्र स्थिरता मूल्यांकन’ संबंधी अध्ययन पत्र जारी किया है। 

वित्तीय क्षेत्र स्थिरता मूल्यांकन रिपोर्ट के बारे में

  • IMF द्वारा वर्ष 2024 के दौरान किए गए आकलन के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की गई है। हालिया रिपोर्ट वित्तीय क्षेत्र आकलन कार्यक्रम (FSAP) का हिस्सा है। 
  • वित्तीय क्षेत्र आकलन कार्यक्रम (FSAP) किसी देश के वित्तीय क्षेत्र का गहन विश्लेषण प्रदान करती है जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एवं विश्व बैंक (WB) के बीच एक संयुक्त पहल है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष 

  • रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में किए गए पिछले मूल्यांकन के बाद से भारत की वित्तीय प्रणाली अधिक लचीली एवं विविधतापूर्ण बन गई है तथा वर्ष 2010 के दशक के संकटपूर्ण प्रकरणों से उबरते हुए इसने महामारी के दौरान भी लचीलापन दिखाया है। 
  • नवीनतम भारत वित्तीय क्षेत्र स्थिरता आकलन रिपोर्ट वित्तीय प्रणाली में सकारात्मक विकास पर प्रकाश डालती है। 

बैंकिंग एवं गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र 

  • रिपोर्ट के अनुसार बैंक एवं एन.बी.एफ.सी. गंभीर मैक्रो-वित्तीय परिदृश्यों में भी मध्यम ऋण देने के लिए पर्याप्त रूप से पूँजीकृत हैं। 
    • हालाँकि, कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ऋण जारी रखने के लिए अपने पूंजी आधार को मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • प्राथमिक ऋण देने वाले क्षेत्र प्राय: मैक्रो-वित्तीय आघातों के प्रति लचीले हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी कमज़ोरी दिखाई देती है। 
  • रिपोर्ट में कुछ गैर-प्रणालीगत NBFC और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) में कमज़ोरियों का भी उल्लेख किया गया है जिनमें आधारभूत स्थितियों के तहत ऋणात्मक या न्यूनतम से कम पूँजी स्तर है। 
  • विनियमन एवं पर्यवेक्षण के संदर्भ में NBFC के लिए विवेकपूर्ण आवश्यकताओं तथा बड़ी NBFC के लिए बैंक की तरह ही तरलता कवरेज अनुपात (LCR) की शुरुआत की प्रशंसा की गई है। 

प्रतिभूति बाजार 

  • रिपोर्ट में प्रतिभूति बाज़ारों के लिए भारत के नियामक ढाँचे में उल्लेखनीय सुधारों पर प्रकाश डाला गया है और इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं के साथ संरेखित किया गया है। 
  • कॉर्पोरेट ऋण बाज़ार विकास निधि (CDMDF) की स्थापना जैसी प्रमुख पहलों को बाज़ार स्थिरता बढ़ाने के लिए स्वीकार किया गया है।

बीमा क्षेत्र 

रिपोर्ट में भारत के बीमा क्षेत्र को भी मजबूत एवं वृधिशील के रूप में मान्यता दी गई है जिसमें जीवन व सामान्य बीमा दोनों शामिल है। इस क्षेत्र की स्थिरता का श्रेय बेहतर विनियमन एवं डिजिटल नवाचारों को दिया जाता है। 

साइबर सुरक्षा जोखिम 

  • साइबर सुरक्षा के संदर्भ में आई.एम.एफ. ने बैंकों, वित्तीय बाजार अवसंरचना (FMI), महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों और प्रतिभूति बाजार में अन्य प्रासंगिक हितधारकों के लिए मौजूद रूपरेखाओं का मूल्यांकन किया।
    • इसमें भारतीय अधिकारियों की साइबर सुरक्षा जोखिम निगरानी में प्रगति का उल्लेख किया गया है। 
  • इस संदर्भ में बैंकों के लिए लचीलेपन में वृद्धि करने के उद्देश्य से क्रॉस-सेक्टोरल और बाजार-व्यापी घटनाओं को कवर करने के लिए साइबर सुरक्षा संकट सिमुलेशन व तनाव परीक्षणों के विस्तार की सिफारिश भी की गई है। 

सुझाव 

  • IMF ने ऋण जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने और व्यक्तिगत ऋणों, संपार्श्विक मूल्यांकन, संबंधित उधारकर्ता समूहों, बड़ी जोखिम सीमाओं और संबंधित-पक्ष लेनदेन पर पर्यवेक्षण को उन्नत करने का सुझाव दिया है। 
  • परिसंपत्ति-आधारित एवं डिजिटल ऋण के लिए कानूनी, कर व सूचनात्मक अवसंरचनाओं को मजबूत करके वित्तीय रूप से वंचित क्षेत्रों की ऋण तक पहुँच बढ़ाना।  
  • उभरते जोखिमों के संदर्भ में साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन एवं सिस्टम-वाइड संक्रमण पर सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। 
    • जलवायु परिवर्तन से संबंधित वित्तीय जोखिमों के मानचित्रण के लिए बारीकी के साथ बेहतर डाटा कवरेज का सुझाव है।
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