New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

जिराफ़ की आबादी 

चर्चा में क्यों 

जिराफ़ संरक्षण फ़ाउंडेशन (GCF) के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार अफ्रीका में जिराफ़ की संख्या में अत्यधिक कमी देखी गई है। 

प्रमुख बिंदु 

  • 1980 के दशक में अफ्रीका में 1.55 लाख से अधिक जिराफ़ थे, जिनकी संख्या कम होकर केवल 1.17 लाख रहन गई है। यह लगभग 30% की गिरावट को प्रदर्शित करता है। 
  • जिराफ़ एक शाकाहारी जानवर है, जो दुनिया का सबसे लंबा (लगभग 14-17 फीट) स्तनधारी हैं। 
  • जिराफ़ ने स्वयं को विभिन्न आवासों के लिये अनुकूलित कर लिया है जो अब रेगिस्तान के साथ-साथ जंगल में भी जीवित रह सकते हैं। 
  • इनकी चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं- उत्तरी जिराफ़, दक्षिणी जिराफ़, मसाई जिराफ़ और जालीदार जिराफ़। इनमें से तीन विलुप्त होने के कगार पर हैं तथा उत्तरी जिराफ़ इन चारों में सबसे दुर्लभ है। 
  • वर्ष 2016 में आई.यू.सी.एन. (IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में जिराफ़ को ‘संवेदनशील’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 

कमी के कारण

  • आवास क्षति, नागरिक अशांति व हस्तक्षेप, अवैध शिकार का खतरा। 
  • कृषि और अन्य निर्माण गतिविधियों के लिये बबूल के पेड़ों की कटाई।  
  • बबूल इनके मुख्य खाद्य स्रोत होते हैं।
  • चमड़े, माँस और शरीर के अंगों के लिये शिकार करना। 

जिराफ़ कंज़र्वेशन फ़ाउंडेशन (GCF) : यह 17 अफ्रीकी देशों में जिराफ़ संरक्षण को समर्पित एक संगठन है, जिसका उद्देश्य जिराफ़ के भविष्य को सुरक्षित करने और अफ्रीका में उनके आवास के संरक्षण के लिये जागरूकता व समर्थन बढ़ाना है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X