संदर्भ
हाल ही में, भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के अवसर पर ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और सामाजिक प्रभाव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है। विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन दुबई में ‘भविष्य की सरकारों को आकार देना’ विषय के तहत हुआ है।
ग्लोबल टीचर प्राइज: एक परिचय
- ग्लोबल टीचर प्राइज एक प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार है, जो ऐसे शिक्षक को प्रदान किया जाता है जिसने शिक्षा के माध्यम से अपने छात्रों और समुदाय के जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया हो।
- इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों की भूमिका के महत्व को रेखांकित करना और समाज में उनके असाधारण योगदान को वैश्विक मंच पर सम्मानित करना है।
पात्रता और मूल्यांकन मानदंड
- यह पुरस्कार विश्व के सभी देशों के शिक्षकों के लिए खुला है, चाहे वे सार्वजनिक, निजी या वैकल्पिक विद्यालयों सहित किसी भी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत हों।
- उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियों, कक्षा के भीतर उनके शैक्षणिक परिणामों और समुदाय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयासों के आधार पर किया जाता है।
- चयन प्रक्रिया में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है कि शिक्षक ने छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को किस हद तक प्रभावित किया है। साथ ही, यह भी देखा जाता है कि उन्होंने संसाधनों की कमी या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद किस प्रकार प्रभावी शिक्षण सुनिश्चित किया।
नामांकन और पुरस्कार स्वरूप
- ग्लोबल टीचर प्राइज के लिए शिक्षक स्वयं आवेदन कर सकते हैं या उन्हें अन्य व्यक्तियों द्वारा नामांकित किया जा सकता है।
- इस पुरस्कार के अंतर्गत 10 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है जो इसे शिक्षा के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित और उच्चतम सम्मानित पुरस्कारों में शामिल करती है।
आयोजन और संस्थागत सहयोग
इस पुरस्कार का प्रस्तुतीकरण जीईएमएस एजुकेशन द्वारा किया जाता है, जबकि इसका आयोजन वर्की फाउंडेशन द्वारा यूनेस्को के सहयोग से किया जाता है। यह साझेदारी शिक्षा को वैश्विक विकास और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
रूबल नागी के बारे में
- रूबल नागी का जन्म 8 जुलाई, 1980 को जम्मू एवं कश्मीर में हुआ था। वे कुशल मूर्तिकार, आर्ट इंस्टॉलेशन एक्सपर्ट और पेंटर हैं।
- रूबल नागी ने शिक्षा के प्रति अपने जुनून की शुरुआत 24 साल पहले केवल एक छोटे से कमरे और 30 बच्चों के साथ की थी। आज उनकी संस्था ‘रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन’ पूरे भारत में 800 से ज्यादा एजुकेशन सेंटर सफलतापूर्वक चला रही है। इन केंद्रों के माध्यम से उन बच्चों तक पहुंच बनाई जाती है, जिन्हें कभी स्कूल जाने का अवसर नहीं मिला।
- रूबल नागी को झुग्गियों की दीवारों को ‘शैक्षिक भित्ति चित्रों’ (Educational Murals) में बदलने के लिए वैश्विक सम्मान मिला है। वे दीवारों पर ऐसी पेंटिंग्स बनाती हैं जो बच्चों को खेल-खेल में साक्षरता और अंकगणित सिखाती हैं।
- ये चित्र न केवल पढ़ाई बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता के बारे में भी बच्चों को शिक्षित करते हैं।
- वर्ष 2022 में रूबल नागी ने अपनी किताब ‘द स्लम क्वीन’ प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने ग्लोबल टीचर प्राइज वर्की फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। साल 2026 में इस पुरस्कार का 10वां संस्करण आयोजित किया गया, जहां जीईएमएस (GEMS) एजुकेशन के सहयोग से इसे प्रेजेंट किया गया।
- यह सम्मान दुनियाभर के उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने पढ़ाने के तरीके से समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया हो।