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ग्रेट निकोबार परियोजना : नई प्रजातियों की खोज

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)

चर्चा में क्यों

हाल ही में ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना क्षेत्र से एक नया साँप और संभावित नई पक्षी प्रजाति सहित 40 से अधिक नई प्रजातियाँ खोजी गई हैं।

नई खोजों के बारे में

  • नई साँप की प्रजाति : लाइकोडॉन इरविनी (Lycodon irwini)
    • ऑस्ट्रेलियाई ज़ूकीपर स्टीव इरविन के नाम पर इसका नाम रखा गया।
    • अब तक इस साँप की केवल चार रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिससे इसकी दुर्लभता स्पष्ट होती है।
    • अत्यंत सीमित क्षेत्रीय फैलाव के कारण इसे IUCN लाल सूची में “संकटग्रस्त (Endangered)” वर्ग में रखने की सिफारिश की गई है।
  • नई पक्षी प्रजाति : ग्रेट निकोबार क्राके (रैलिना समूह)
    • इसे पिछले 10 वर्षों में केवल तीन बार कैमरे में दर्ज किया गया है।
    • इसके विशिष्ट शारीरिक लक्षण इसे विज्ञान के लिए एक नई प्रजाति बना सकते हैं।
    • इसकी जैविकी, वितरण, जनसंख्या आदि के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
  • अन्य खोजें (2021–2025)
    • लगभग 40 नई प्रजातियाँ; जैसे- 2 मेढ़क, 4 केकड़े, 2 गेक्को, कई कीट: मक्खियाँ, पतंगे, भृंग आदि।
    • इनमें से लगभग आधी प्रजातियाँ सिर्फ वर्ष 2025 में खोजी गई हैं।

मुख्य निष्कर्ष

  • ग्रेट निकोबार द्वीप क्षेत्र में 650 पादप प्रजातियाँ और 1,800 से अधिक जीव-जंतु प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • यहाँ लगभग 24% स्थानिकता (endemism) दर्ज की गई है, यानी कई प्रजातियाँ केवल यहीं पाई जाती हैं।
  • लगातार हो रही नई खोजें स्पष्ट करती हैं कि यह क्षेत्र भारत के सबसे समृद्ध उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में से एक है।
  • वैज्ञानिक समुदाय का मत है कि यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है और इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पूर्व निदेशक असद रहमानी के अनुसार, ग्रेट निकोबार भारत का “सबसे बेहतरीन उष्णकटिबंधीय वर्षावन” है और इसे पूर्ण संरक्षण की आवश्यकता है।

महत्व

  • जैव विविधता संरक्षण: नई प्रजातियों की खोज दर्शाती है कि यह क्षेत्र वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • पारिस्थितिक संवेदनशील ज़ोन: यहाँ की वनस्पति और जीव-जंतुओं की दुर्लभता और स्थानिकता इसे राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम पर्यावरण: चल रही मेगा परियोजना के बीच इन खोजों ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को और मजबूत आधार प्रदान किया है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान: नई प्रजातियों की निरंतर खोज इस क्षेत्र को जीव विज्ञान, पारिस्थितिकी और संरक्षण विज्ञान के लिए हॉटस्पॉट बनाती है।
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