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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ‘हरित पटाखों’ को अनुमति

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में, दिल्ली सरकार ने पटाखे विरोधी अभियान (Anti-Firecracker Campaign) की शुरुआत करने का फैसला लिया है। इसके अनुसार अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सिर्फ ‘हरित पटाखे’ (Green Firecrackers) ही बनाए, बेचे एवं प्रयोग किये जा सकेंगे।
  • ध्यातव्य है कि दिल्ली में वर्ष 2018 में आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तथा वर्ष 2019 में केवल हरित’ पटाखों की अनुमति दी गई थी।

‘हरित पटाखे’

  • ‘हरित पटाखे (Green Firecrackers) इस प्रकार निर्मित होते हैं कि इन्हें जलाने पर जल-अणु उत्पन्न होतें हैं और इन पटाखों से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन के स्तर में भी बहुत कमी आती है। इसके अलावा, इन पटाखों से उत्पन्न जल-अणु, धूल-कणों का अवशोषण भी करते हैं। इन पटाखों की आवाज़ भी कम होती है।
  • सामान्य पटाखों के मुकाबले हरित पटाखों के प्रयोग से नाइट्रस ऑक्साइड और सल्फर-डाई-ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों तथा ‘पर्टिकुलेट मैटर्स’ आदि के उत्सर्जन में 30- 35% तक की कमी आती है, इनसे पोटैशियम तत्वों का उत्सर्जन भी 50-60% कम हो जाता है। इनकी निर्माण लागत भी कम होती है।

CSIR-NEERI द्वारा विकसित हरित पटाखे निम्नलिखित हैं-

1. स्वास (SWAS) या सेफ वॉटर रिलीज़र : इन पटाखों के प्रयोग से SO2, NOx और पार्टिकुलेट मैटर आदि कम (30-35%) उत्सर्जित होते हैं। इनकी आवाज़ लगभग 105-110 dBA की सीमा में होती है। ये हरित पटाखे निर्माण के अगले तीन हफ्तों तक ख़राब नहीं होते।

2. स्टार (STAR) या सेफ थर्माइट क्रैकर

3. सफल (SAFAL) या (सेफ मिनिमल एल्युमीनियम) : इन पटाखों के द्वारा सामान्य पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन कम (35-40%) होता है। इनके निर्माण में एल्यूमीनियम (केवल शुरुआत के लिए फ्लैश पाउडर के रूप में) का न्यूनतम उपयोग होता है। इनकी ध्वनि तीव्रता भी 110-115 dBA सीमा में है।

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