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Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

ग्रीनलैंड क्रिस्टल ब्लू लेक्स

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

एक अध्ययन के अनुसार, चरम मौसमी घटनाओं के कारण ग्रीनलैंड में 7,500 से अधिक क्रिस्टल नीली रंग की प्राचीन झीलों का रंग परिवर्तित होकर भूरा हो गया है। क्रिस्टल नीले रंग से तात्पर्य झीलों के साफ-सुथरा होने से हैं।   

झीलों मे रंग परिवर्तन का कारण 

  • तापमान में वृद्धि : ग्रीनलैंड में प्राय: पतझड़ के मौसम में बर्फबारी होती है किंतु असामान्य गर्मी के कारण बर्फ पिघलने से लगातार वर्षा हुई। 
  • पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना : तापमान में वृद्धि के कारण पर्माफ्रॉस्ट के भी पिघलने से अत्यधिक मात्रा में कार्बन, लोहा, मैग्नीशियम एवं अन्य तत्वों का पर्यावरण में प्रसार हुआ और बारिश के साथ ये सभी तत्त्व मिट्टी से बहकर झीलों में प्रवेश कर गए, जिससे उनका रंग भूरा हो गया।
  • वायुमंडलीय नदियाँ एवं उनका तीव्र प्रभाव : शोधकर्ताओं के अनुसार, गर्मी एवं वर्षा में वृद्धि का कारण कई वायुमंडलीय नदियाँ थी। 
    • वायुमंडलीय नदी जलवाष्प का एक लंबा एवं संकीर्ण स्तंभ है जो स्थल पर आने पर तीव्र वर्षा या हिमपात का कारण बनती है। 

झीलों मे रंग परिवर्तन का प्रभाव 

  • कार्बन चक्र में परिवर्तन : भौतिक एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन के कारण झीलें अधिक अपारदर्शी हो गईं। इससे उनकी सतह पर पहुँचने वाले सूर्य के प्रकाश में कमी आने के कारण प्लवक की जैव विविधता में कमी आई। इसका नकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र के कार्बन चक्र पर पड़ा। 
  • कार्बन की मात्रा में वृद्धि : तापमान वृद्धि के कारण ये झीलें कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करने के बजाय इसका स्रोत बन गई हैं जिससे उनसे निष्कर्षित होने वाली इस ग्रीनहाउस गैस के प्रवाह में 350% की वृद्धि हुई है।
  • जल गुणवत्ता संबंधी चिंताएँ : पर्माफ्रॉस्ट से घुले कार्बनिक कार्बन और पोषक तत्वों के प्रवाह से बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है जिससे पानी की गुणवत्ता नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है। 
  • स्वास्थ्य जोखिम : पर्माफ्रॉस्ट से निकलने वाली धातुओं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याएँ भी हो सकती हैं।
    • घुलनशील कार्बनिक सामग्री में वृद्धि पेयजल उपचार प्रक्रियाओं के साथ क्रिया करके क्लोरीनीकृत उपोत्पाद उत्पन्न कर सकती है जो कैंसरकारी हो सकता है।
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