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सरकारी प्रतिभूतियों का बढ़ता बाजार 

प्रारंभिक परीक्षा - सरकारी प्रतिभूति, ट्रेजरी बिल, नकद प्रबंधन बिल, दिनांकित सरकारी प्रतिभूति, राज्य विकास ऋण
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र 3 - भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने से संबंधित विषय

सन्दर्भ 

  • हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों का व्यापार, जुलाई से सितंबर (2022-23 की दूसरी तिमाही) में 27.67 लाख करोड़ तक पहुँच गया जो पिछले दो वर्षों का उच्चतम स्तर है। 
  • 2022-23 की पहली तिमाही की तुलना में इसमें 8.64% की वृद्धि हुई है। 
  • पिछली तिमाही की तुलना में 2022-23 की दूसरी तिमाही में उच्च ट्रेडिंग वॉल्यूम सरकारी प्रतिभूतियों में व्यापारियों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
  • सरकारी प्रतिभूतियों के कारोबार में केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों का हिस्सा पहली तिमाही के 76% से बढ़कर दूसरी तिमाही में 82% हो गया।
  • जबकि राज्य सरकार बॉन्ड में लेन-देन पहली तिमाही के 8% से गिरकर 5% हो गया।

सरकारी प्रतिभूति

  • सरकारी प्रतिभूति केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा जारी एक व्यापार योग्य साधन है।
  • इन्हें जोखिम-मुक्त गिल्ट-एज्ड इंस्ट्रूमेंट के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ये सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और इसलिए डिफ़ॉल्ट का कोई खतरा नहीं होता है।
  • केंद्र सरकार ट्रेजरी बिल और दिनांकित प्रतिभूतियां दोनों जारी करती है।
  • राज्य सरकारें सिर्फ दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण कहा जाता है।
  • सरकारी प्रतिभूतियाँ दो प्रकार की होती हैं।
    • लघु अवधि 
      • इनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है। 
      • ये वर्तमान में तीन कार्यकालों में जारी किए जाते हैं -91 दिन, 182 दिन और 364 दिन। 
      • उदाहरण- ट्रेजरी बिल।
    • दीर्घावधि
      •  इनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष या उससे अधिक होती है। 
      • उदाहरण- सरकारी बांड (दिनांकित प्रतिभूतियां)।

सरकारी प्रतिभूतियों के प्रकार 

1. ट्रेजरी बिल (टी-बिल) 

  • ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए मुद्रा बाजार के अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
  • ट्रेजरी बिल वर्तमान में तीन अवधियों में जारी किए जाते हैं, अर्थात् 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन। 
  • ट्रेजरी बिल जीरो कूपन सिक्योरिटीज हैं और इन पर कोई ब्याज प्रदान नहीं किया जाता है।
  • इन्हें छूट पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है। 
  • उदाहरण के लिए, 100/- (अंकित मूल्य) का 91 दिन का ट्रेजरी बिल 98.20 पर जारी किया जा सकता है, यानी 1.80 की छूट पर और 100/- के अंकित मूल्य पर भुनाया जाएगा। 

2. नकद प्रबंधन बिल (CMB) 

  • CMB भारत में एक अपेक्षाकृत नया वित्तीय साधन है, इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2010 में लॉन्च किया गया था।
  • CMB शून्य-कूपन उपकरण हैं जो ट्रेजरी बिलों की तरह होते हैं, इनके बीच एकमात्र अंतर परिपक्वता अवधि का है।
  • CMB, 91 दिनों से कम की परिपक्वता अवधि वाले अति-अल्पकालिक निवेश विकल्प हैं, जबकि  ट्रेजरी बिल की परिपक्वता अवधि 91 से 364 दिनों तक की होती है।

3. दिनांकित सरकारी प्रतिभूति

  • दिनांकित सरकारी प्रतिभूति भारत में उपलब्ध सरकारी सुरक्षा का एक अन्य प्रकार है। 
  • दिनांकित सरकारी प्रतिभूति, टी-बिल और  CMB के विपरीत, लंबी अवधि के मुद्रा बाजार की प्रतिभूतियां हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि 5 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक होती है।
  • इन उपकरणों पर ब्याज दर, जिसे अक्सर कूपन दर के रूप में जाना जाता है, या तो निर्धारित या परिवर्तनशील होती है।

4. राज्य विकास ऋण (SLD) 

  • SDL सिर्फ राज्य सरकारों द्वारा उनकी आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने और बजटीय मांगों को पूरा करने के लिए जारी किए जाते हैं।
  • ये दिनांकित सरकारी प्रतिभूति जैसे ही होते हैं, इन दोनों के बीच एकमात्र अंतर यह है कि SDL राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं जबकि दिनांकित सरकारी प्रतिभूति केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाती हैं।
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