संदर्भ
हब-एंड-स्पोक मॉडल के बारे में
लाभ:
- इसके लाभ विमानन से भी आगे तक हैं। बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- विमानन केंद्र के विकास से लगभग 0.4 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन हो सकता है और 2030 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अतिरिक्त 30 बिलियन अमरिकी डॉलर का योगदान हो सकता है।
- वर्ष 2047 तक, इसके संचयी प्रभाव से लगभग 16 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों में सहायता मिल सकती है और यह अर्थव्यवस्था में लगभग 1.4 ट्रिलियन अमरिकी डॉलर का योगदान कर सकता है।
- हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत, अंतरराष्ट्रीय यात्री चेक-इन, आव्रजन और सीमा शुल्क औपचारिकताओं को स्पोक हवाई अड्डे पर ही पूरा करते हैं, जिससे यह उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए प्रस्थान का पहला बिंदु बन जाता है। उदाहरण के लिए, वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू करने वाले यात्री दिल्ली जैसे निर्धारित भारतीय हब हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने से पहले ही वाराणसी में प्रस्थान संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेते हैं।
सुरक्षा उपाय:
- सुरक्षा और संचालन की अखंडता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए, इस मॉडल में कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं।
- घरेलू-अंतरराष्ट्रीय संचालन के दोनों चरणों को अंतरराष्ट्रीय संचालन के रूप में ही माना जाता है। यात्रियों के आपस में मिक्स होने से बचने के लिए, घरेलू (डी) और अंतरराष्ट्रीय (आई) यात्रियों के लिए अलग-अलग फिजिकल बोर्डिंग कार्ड जारी किए जाते हैं, जिन पर उचित पहचान-चिह्न होते हैं।
- हब-एंड-स्पोक ढांचे के तहत यात्रा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को हब हवाई अड्डों पर सीमा शुल्क घोषणा सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध नहीं होती है।
वस्तुतः वाराणसी से हब-एंड-स्पोक अंतर्राष्ट्रीय संचालन की शुरुआत भारत के विमानन पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ी प्रगति का प्रतीक है और देश भर के नागरिकों के लिए समावेशी, कुशल और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हवाई कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।