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भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट

चर्चा में क्यों

हाल ही में, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (NWAI) ने ‘भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट’ (IBPR) के तहत गंगा (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) और ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) नदियों के मध्य कार्गो परिवहन सेवा का सफलतापूर्वक संचालन किया है।

प्रमुख बिंदु

  • इस रूट के माध्यम से स्व-चालित जहाज एमवी लाल बहादुर शास्त्री से भारतीय खाद्य निगम के लिये कुल 200 मीट्रिक टन खाद्यान्न को पटना से बांग्लादेश होते हुए असम के पांडु बंदरगाह तक पहुँचाया गया।  
  • इसके पश्चात् एक अन्य जहाज एमवी राम प्रसाद बिस्मिल के माध्यम से 1800 मीट्रिक टन टाटा स्टील को हल्दिया से पांडु बंदरगाह तक पहुँचाया गया है। विदित है कि यह ब्रह्मपुत्र नदी पर चलने वाला अब तक का सबसे लंबा जहाज है।
  • भारत और बांग्लादेश के बीच नौवहन क्षमता में सुधार के लिये, आई.बी.पी.आर. के दो हिस्सों, सिराजगंज- दाईख्वावा और आशुगंज-जकीगंज को 80:20 अनुपात के आधार पर लगभग 305 करोड़ रुपए (80% भारत द्वारा और 20% बांग्लादेश द्वारा वहन किया जा रहा है) में विकसित किया जा रहा है। 

महत्त्व

  • इस परियोजना से पूर्वोत्तर भारत के सभी स्थलरुद्ध राज्यों के आर्थिक एवं समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह जलमार्ग न केवल इस क्षेत्र में भौगोलिक बाधा को दूर करेगा बल्कि व्यवसाय और क्षेत्र के लोगों के लिये किफायती, तेज और सुविधाजनक परिवहन भी प्रदान करेगा।
  • भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने अंतर्देशीय जलमार्ग के माध्यम से एन.डब्ल्यू.-1, भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और एन.डब्ल्यू.-2 पर कई बुनियादी ढाँचा निर्माण की परियोजनाओं को शुरू किया है। 

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण 

  • शिपिंग और नेविगेशन को सुलभ बनाने व अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिये वर्ष 1986 में आई.डब्ल्यू.ए.आई. की स्थापना की गयी। इसका  मुख्यालय नोएडा में स्थित है।
  • यह प्राधिकरण राष्ट्रीय जलमार्गों पर अंतर्देशीय जल परिवहन से संबंधित बुनियादी ढाँचों के विकास और रखरखाव के लिये परियोजनाओं का क्रियान्वयन करता है।

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