संदर्भ
हाल ही में, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला डा सिल्वा की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने दुर्लभ पृथ्वी (Rare Earth) तत्वों सहित कुल नौ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर कर द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान की है।
भारत-ब्राजील संबंधों के बारे में
ऐतिहासिक और बहुपक्षीय पृष्ठभूमि
- भारत एवं ब्राजील के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ की नींव पर टिके हैं। वस्तुतः 1948 में शुरू हुए राजनयिक संबंध आज ऊर्जा, रक्षा एवं वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में एक सामरिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।
- दोनों राष्ट्र BRICS, G20, IBSA एवं BASIC जैसे वैश्विक समूहों के माध्यम से एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की पुरजोर वकालत करते हैं।
आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध
- ब्राजील, लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में भारत का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापारिक विनिमय लगभग $12-15 बिलियन है।
- भारत डीजल, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात करता है जबकि ब्राजील से कच्चा तेल, सोना, सोया तेल व लौह अयस्क जैसे कच्चे माल का आयात करता है।
- दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक इस व्यापार को $30 बिलियन तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। व्यापारिक सुगमता के लिए ब्राजील ने भारतीय व्यापारियों हेतु 10 वर्षीय वीजा की भी घोषणा की है।
सहयोग के उभरते प्रमुख क्षेत्र
- खनिज एवं दुर्लभ पृथ्वी तत्व सुरक्षा: चीन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से भारत ने ब्राजील के साथ दुर्लभ खनिजों के दोहन हेतु समझौता किया है। ब्राजील के पास इन खनिजों का विशाल भंडार है जिसका लाभ भारत अपने EV (इलेक्ट्रिक वाहन) और रक्षा उद्योगों के लिए उठाएगा।
- रक्षा एवं डिजिटल नवाचार: रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा में सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर एवं ब्लॉकचेन जैसी भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए एक ‘डिजिटल पार्टनरशिप’ का रोडमैप तैयार किया है।
- ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन: नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ब्राजील की जैव ईंधन (Biofuels) विशेषज्ञता और भारत की सौर ऊर्जा क्षमता मिलकर ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
निष्कर्ष
यह यात्रा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण (Diversification) लाने और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह साझेदारी न केवल चीन जैसे देशों पर निर्भरता घटाएगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करेगी।