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कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भारत-चीन विवाद

मुख्य परीक्षा:  सामान्य अध्ययन पेपर-2 

चर्चा में क्यों ?

  • पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी के बावजूद भारत-चीन संबंधों में नया तनाव उभरा है।
  • जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर दोनों देशों के बीच राजनयिक और रणनीतिक टकराव सामने आया है।
  • यह विवाद भारत की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

शक्सगाम घाटी का भौगोलिक स्थान:

  • शक्सगाम घाटी को ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है।
  • यह सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है।
  • उत्तर में चीन का शिनजियांग, तथा दक्षिण-पश्चिम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से लगती है।
  • क्षेत्रफल लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक है।
  • दुर्गम पर्वतीय भूभाग होने के कारण यहां स्थायी मानव बसावट सीमित है।

शक्सगाम घाटी का ऐतिहासिक संदर्भ:

  • 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के साथ यह क्षेत्र कानूनी रूप से भारत का हिस्सा बना।
  • हालांकि, भौगोलिक कठिनाइयों और पाकिस्तान के कब्जे के कारण भारत यहां भौतिक नियंत्रण स्थापित नहीं कर सका।
  • 1963 तक यह इलाका पाकिस्तान के नियंत्रण में रहा।

पाकिस्तान द्वारा शक्सगाम घाटी चीन को सौंपना:

  • 1963 में पाकिस्तान-चीन सीमा समझौता किया गया।
  • पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का लगभग 5,180 वर्ग किमी क्षेत्र चीन को सौंप दिया।
  • भारत ने इस समझौते को अवैध और अस्वीकार्य बताया।
  • पाकिस्तान के पास भारतीय क्षेत्र को सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

औपनिवेशिक काल की भूमिका:

  • 1936 में ब्रिटिश प्रभाव के तहत हुंजा के मीर ने कुछ उत्तरी क्षेत्रों पर अपने दावे छोड़े।
  • हालांकि, शक्सगाम घाटी और अघिल पर्वतमाला उनके नियंत्रण में बनी रही।
  • स्वतंत्रता के बाद यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के साथ भारत में सम्मिलित हुआ।

भारत के लिए शक्सगाम घाटी का रणनीतिक महत्व:

  • यह क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के बेहद नजदीक स्थित है।
  • सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है।
  • यहां से काराकोरम दर्रे तक पहुंच संभव है।
  • यह भारत को पाकिस्तान और चीन दोनों की सैन्य गतिविधियों पर निगरानी की क्षमता देता है।

दो मोर्चों पर उभरती सुरक्षा चुनौती:

  • पहले भारत का ध्यान सियाचिन में केवल पाकिस्तान मोर्चे पर था।
  • अब उत्तर से चीन की सक्रियता ने दो-मोर्चा खतरा पैदा कर दिया है।
  • चीन-पाकिस्तान के संभावित संयुक्त दबाव की आशंका बढ़ गई है।

चीन की “सलामी स्लाइसिंग” रणनीति:

  • चीन विवादित क्षेत्रों में छोटे-छोटे कदमों से नियंत्रण बढ़ाता है।
  • हर कदम अलग-अलग मामूली लगता है, लेकिन सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव लाता है।
  • शक्सगाम घाटी में चीन इसी रणनीति पर काम कर रहा है।

चीन का अवसंरचना विकास:

  • 2024 के मध्य तक चीन ने अघिल दर्रे (4,805 मीटर) के पार सड़क निर्माण पूरा किया।
  • यह सड़क निचली शक्सगाम घाटी तक जाती है।
  • इससे चीनी गश्त और निर्माण दल भारत-नियंत्रित सियाचिन से लगभग 50 किमी के भीतर पहुंच गए हैं।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और चिंता:

  • शक्सगाम क्षेत्र में विकास कार्यों को CPEC से जोड़ा जा रहा है।
  • इससे भारत की यह चिंता बढ़ी है कि दोनों देश मिलकर रणनीतिक दबाव बना सकते हैं।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया:

  • भारत ने स्पष्ट किया है कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है।
  • विदेश मंत्रालय ने 1963 के समझौते को अवैध बताया।
  • भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए “आवश्यक कदम” उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है।

चीन की स्थिति और विरोधाभास:

  • चीन भारत की आपत्तियों को खारिज करता है।
  • वह कश्मीर को भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताता है।
  • लेकिन स्वयं PoK में रणनीतिक निर्माण जारी रखता है।
  • यह चीन की नीति में स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

  • शक्सगाम घाटी भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में तनाव का नया केंद्र बन रही है।
  • यह विवाद केवल भूभाग का नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रश्न है।
  • आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोण में अहम भूमिका निभाएगा।
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