संदर्भ
संघीय बजट 2026–27 ने भारत की तकनीकी आकांक्षाओं को नई दिशा देते हुए भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा की है। ऐसे समय में जब सेमीकंडक्टर लगभग हर आधुनिक डिजिटल एवं औद्योगिक प्रणाली की बुनियाद बन चुके हैं, यह पहल घरेलू क्षमताओं को गहराई देने और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में सशक्त भागीदार बनाने का स्पष्ट नीतिगत संकेत देती है।
सेमीकंडक्टर: आधुनिक अर्थव्यवस्था की अदृश्य रीढ़
- सेमीकंडक्टर कंप्यूटिंग, मोबाइल संचार, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों की आधारशिला हैं।
- आई.एस.एम. 1.0 के अंतर्गत भारत ने डिजाइन, निर्माण, असेंबली एवं परीक्षण सहित पूर्ण-स्टैक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की दिशा में ठोस प्रगति की है। यह यात्रा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के व्यापक दृष्टिकोण और नीति-निर्माण से उत्पादन-तैयारी की ओर भारत के संक्रमण को दर्शाती है।
- इन उपलब्धियों पर आगे बढ़ते हुए आई.एस.एम. 2.0 का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नेटवर्क में एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी एवं दीर्घकालिक साझेदार के रूप में स्थापित करना है।
क्षेत्रीय दृष्टिकोण: भारत का उभरता सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र
- भारत धीरे-धीरे वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। बड़े निवेश, विनिर्माण क्षमता का विस्तार और सेमीकॉन इंडिया 2025 जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच भारत की क्षमता में बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं। उद्योग अनुमानों के अनुसार, भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार—
- 2023 में लगभग 38 बिलियन डॉलर
- 2024–25 में 45–50 बिलियन डॉलर और
- 2030 तक 100–110 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।
- यह वृद्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की रणनीति से प्रेरित है जो भारत को न केवल एक विनिर्माण आधार बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भी स्थापित कर रही है।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 की नींव
- दिसंबर 2021 में स्वीकृत आई.एस.एम. 1.0 को ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज का समर्थन प्राप्त है जिसके तहत—
- सिलिकॉन फैब्स
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर इकाइयाँ
- असेंबली, टेस्टिंग एवं पैकेजिंग सुविधाएँ
- चिप डिजाइन के लिए 50% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- दिसंबर 2025 तक 6 राज्यों में ₹1.60 लाख करोड़ के निवेश वाली 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएँ एक लचीले और स्वदेशी सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही हैं।
सेमीकंडक्टर 2.0 की ओर
- आई.एस.एम. 2.0 के तहत फोकस केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री का उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP) का विकास तथा घरेलू व वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का सुदृढ़ीकरण शामिल है।
- वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए इस मिशन को ₹1,000 करोड़ का आवंटन दिया गया है जिसमें उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों पर विशेष जोर है ताकि तकनीकी नवाचार को गति मिले और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल प्रस्तुत किया जा सके।
- भारत का अगला लक्ष्य उन्नत तकनीकी नोड्स में प्रवेश करना है। आई.एस.एम. 2.0 के तहत 3 नैनोमीटर और 2 नैनोमीटर नोड्स तक पहुँचने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।
- वर्ष 2035 तक भारत का उद्देश्य विश्व के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होना है जबकि 2029 तक घरेलू जरूरतों के 70–75% चिप्स देश में ही डिजाइन एवं निर्मित करने की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है।
स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ: विविधता एवं पैमाना
भारत में स्वीकृत परियोजनाएँ उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, एयरोस्पेस एवं पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा करेंगी। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कई परियोजनाएँ स्वदेशी असेंबली, टेस्टिंग एवं पैकेजिंग तकनीकों का उपयोग कर रही हैं जिससे बाहरी निर्भरता कम होगी और तकनीकी गहराई बढ़ेगी।
आई.एस.एम. के अंतर्गत प्रमुख योजनाएँ
- सेमीकंडक्टर फैब्स योजना: वेफर फैब्रिकेशन इकाइयों को 50% तक वित्तीय सहायता
- डिस्प्ले फैब्स योजना: AMOLED और LCD डिस्प्ले निर्माण को समर्थन
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर व ATMP/OSAT योजना: पैकेजिंग एवं परीक्षण इकाइयों के लिए पूंजीगत सहायता
- डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI): चिप डिजाइन स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान
2026–27 में अपेक्षित प्रभाव
- संशोधित सेमीकंडक्टर कार्यक्रम का उद्देश्य है—
- पूंजी निवेश को गति देना
- उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करना
- तथा डिजाइन एवं विनिर्माण में घरेलू क्षमताओं का विस्तार करना
- वित्तीय वर्ष 2026–27 में कुल ₹8,000 करोड़ की अनुमानित वित्तीय निकासी के साथ यह कार्यक्रम भारत की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को नई ऊँचाई देगा।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन का महत्व
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, सेमीकंडक्टर ऊर्जा नेटवर्क, वित्तीय बाजारों, दूरसंचार, स्वास्थ्य, परिवहन और रक्षा प्रणालियों का मूल आधार हैं। कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों को उजागर किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कुछ गिने-चुने देशों पर अत्यधिक निर्भरता कितना बड़ा जोखिम है।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन इसी चुनौती का रणनीतिक उत्तर है—डिजाइन, विनिर्माण और नवाचार में स्वदेशी क्षमता विकसित कर भारत न केवल अपनी तकनीकी संप्रभुता मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी अधिक लचीला बना रहा है।
डिजाइन, माइक्रोप्रोसेसर एवं प्रतिभा विकास
- डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना, DHRUVA 64 जैसे स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर और RISC-V आधारित पहलें भारत को कोर सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बना रही हैं।
- इसके साथ-साथ चिप्स टू स्टार्टअप, AICTE कार्यक्रम, NIELIT स्मार्ट लैब्स और उद्योग साझेदारियों के माध्यम से एक मजबूत सेमीकंडक्टर प्रतिभा पाइपलाइन विकसित की जा रही है।
निष्कर्ष
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण से आगे बढ़कर उसके समेकन एवं वैश्विक एकीकरण की दिशा में निर्णायक कदम है। बढ़ा हुआ बजटीय समर्थन, स्पष्ट तकनीकी रोडमैप और सशक्त डिजाइन व कौशल रणनीति भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण एवं नवाचार का भरोसेमंद वैश्विक केंद्र बनाने की नींव रखती है। आने वाले दशक में यह मिशन भारत को न केवल तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उसे दुनिया के अग्रणी सेमीकंडक्टर राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।