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भारत का पहला ड्रोन-एआई संचालित कृत्रिम वर्षा प्रयोग जयपुर में शुरू

चर्चा में क्यों ?

  • भारत ने जल संकट से निपटने और कृषि व पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना शुरू कर दिया है। 
  • इस कड़ी में जयपुर के रामगढ़ बांध पर देश का पहला ड्रोन-एआई संचालित क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) प्रयोग शुरू किया गया है। 
  • यह कदम जल संसाधनों के पुनरुद्धार और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 
  • इस पहल से सूखे क्षेत्रों में वर्षा बढ़ाने और जल संकट कम करने की नई संभावनाएं खुलती हैं।

परियोजना का विवरण और भागीदारी

  • यह पायलट प्रोजेक्ट राजस्थान सरकार और भारत-अमेरिका की तकनीकी कंपनी जेनएक्स एआई के सहयोग से संचालित हो रहा है। 
  • प्रयोग में ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर लक्षित बादलों में क्लाउड सीडिंग की जाएगी ताकि वर्षा को प्रेरित किया जा सके। 
  • इसे कृषि एवं आपदा राहत मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और विधायक महेंद्र पाल मीणा की उपस्थिति में शुरू किया गया, जहां स्थानीय ग्रामीणों ने भी भाग लिया।

रामगढ़ बांध क्यों चुना गया ?

  • रामगढ़ बांध, जो 129 वर्षों से जलाशय का काम करता आ रहा है, पिछले 20 वर्षों से सूखा पड़ा है और 1981 के बाद से पूरी क्षमता से कभी नहीं भरा। 
  • इस बांध को पुनर्जीवित करना जयपुर की पेयजल आपूर्ति में सुधार के साथ-साथ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि के लिए भी लाभकारी होगा।
  • पहले मानसागर बांध पर विचार किया गया था, लेकिन उसके छोटे आकार और शहर के निकटता के कारण यह स्थल रामगढ़ बांध में परिवर्तित किया गया।

रामगढ़ बांध का ऐतिहासिक महत्व

  • 1897 में महाराजा माधो सिंह द्वितीय ने इसकी नींव रखी।
  • 1903 में इसका निर्माण पूरा हुआ।
  • 1931 में वायसराय लॉर्ड इरविन ने यहां से राजपूताना की पहली पेयजल योजना शुरू की।
  • 1982 में यहां एशियाई खेलों की नौकायन प्रतियोगिता भी आयोजित हुई।
  • यह बांध जमवारामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का मुख्य जल स्रोत भी रहा है।

ड्रोन-एआई क्लाउड सीडिंग तकनीक कैसे काम करती है ?

  • क्लाउड सीडिंग में बादलों में सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का छिड़काव किया जाता है, जो जल वाष्प को वर्षा की बूंदों में बदलने के लिए संघनन नाभिक का काम करते हैं।
  • इस प्रयोग में ताइवान निर्मित ड्रोन हजारों फीट ऊंचाई पर उड़ते हुए लक्षित बादलों में सोडियम क्लोराइड का छिड़काव करेंगे, जिससे वर्षा उत्पन्न होगी और बांध में जल स्तर बढ़ेगा।
  • यह तकनीक अमेरिका, रूस और यूरोप के कई देशों में पहले से सूखा कम करने के लिए उपयोग में लाई जा रही है।

बहु-विभागीय समन्वय

  • इस परियोजना में कृषि विभाग, मौसम विज्ञान विभाग, जल संसाधन और सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के बीच समन्वय शामिल है।
  • डीजीसीए ने ड्रोन उड़ानों की अनुमति दी है और प्रयोग से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण एक महीने तक किया जाएगा।

राजस्थान में पूर्व क्लाउड सीडिंग प्रयास

  • पहले चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा बांध पर क्लाउड सीडिंग का प्रयास हुआ था, जो असफल रहा। लेकिन अब बेहतर एआई और ड्रोन तकनीक की वजह से सफलता की संभावना बढ़ी है।

भारत में क्लाउड सीडिंग का इतिहास

  • 1951 में पश्चिमी घाट में पहला भू-आधारित क्लाउड सीडिंग प्रयास।
  • 1952 में हाइड्रोजन से भरे गुब्बारों द्वारा रसायनों का छिड़काव।
  • 1957-66 में वर्षा में 20% वृद्धि सहित कई प्रयोग।
  • 1973-86 में विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा वृद्धि के सफल परिणाम।

जयपुर प्रयोग का महत्व

  • यह पहला ऐसा प्रयास है जिसमें आधुनिक ड्रोन और एआई आधारित तकनीक का उपयोग हो रहा है, जिससे सटीकता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।
  • रामगढ़ बांध को पुनर्जीवित करके जल संकट कम होगा, पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
  • यह परियोजना भारत की जलवायु लचीलापन और सूखा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करती है।
  • यदि सफल रहा, तो इसे अन्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।

प्रश्न :-भारत का पहला ड्रोन-एआई संचालित क्लाउड सीडिंग प्रयोग कहाँ शुरू हुआ है ?

(a) मुंबई

(b) जयपुर

(c) चित्तौड़गढ़

(d) दिल्ली

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