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आईएनएस मोरमुगाओ 

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास) 

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, परियोजना 15बी वर्ग के दूसरे युद्धपोत आईएनएस मोरमुगाओ (INS Mormugao) को मुंबई में नौसेना डॉकयार्ड में कमीशन किया गया। इस श्रेणी के पहले जहाज आईएनएस विशाखापट्टनम को नवंबर 2021 में नौसेना में शामिल किया गया था। 

आईएनएस मोरमुगाओ के बारे में 

  • यह एक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत है जो 163 मीटर लंबा और 17 मीटर चौड़ा है। 
  • यह अत्याधुनिक हथियारों तथा सतह से सतह एवं सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से सुसज्जित है।
  • पश्चिमी तट पर अवस्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर ‘गोवा’ के नाम पर इस युद्धपोत का नाम ‘मोरमुगाओ’ रखा गया है। 

आईएनएस मोरमुगाओ का निर्माण

  • इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है जबकि इसके निर्माण का कार्य मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा किया गया है। 
  • वर्ष 2016 में इस युद्धपोत को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लॉन्च किया था जबकि इसका समुद्री परीक्षण गोवा मुक्ति के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वर्ष 2021 में शुरू किया गया था।

ins-mormugao

महत्त्व

  • आईएनएस मोरमुगाओ सबसे शक्तिशाली स्वदेश निर्मित युद्धपोतों में से एक है, जो देश की समुद्री क्षमताओं को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने और राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने में सहायक होगा।
  • यह विश्‍व के सबसे तकनीकी रूप से उन्नत मिसाइल वाहकों में से एक है जो परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध स्थितियों में लड़ने के लिये सुसज्जित है।
  • यह युद्धपोत 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है, जो डिजाइन और विकास में भारत की उत्कृष्टता और बढ़ती स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताओं का एक बेहतरीन उदाहरण है।

परियोजना 15बी 

  • परियोजना 15बी के तहत चार युद्धपोतों के निर्माण के लिये वर्ष 2011 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गए थे। इन सभी युद्धपोतों को वर्ष 2024 तक भारतीय नौसेना में शामिल किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इन्हें विशाखापट्टनम श्रेणी के जहाज़ों के रूप में जाना जाता है। इसके तहत देश में स्वदेशी तकनीक की मदद से विशाखापट्टनम, मोरमुगाओ, इंफाल और सूरत नामक चार युद्धपोतों का निर्माण किया जाएगा। 
  • इसके अंतर्गत निर्मित आईएनएस विशाखापट्टनम का वर्ष 2015 में , आईएनएस मोरमुगाओ का वर्ष 2016 में, आईएनएस इंफाल का वर्ष 2019 में तथा आईएनएस सूरत का वर्ष 2022 में जलावतरण किया गया।

परियोजना 15 एवं 15ए

  • भारत का स्वदेशी विध्वंसक निर्माण कार्यक्रम 1990 के दशक के अंत में दिल्ली श्रेणी (परियोजना 15) के तीन युद्धपोतों के साथ शुरू हुआ। इसके तहत ‘आईएनएस दिल्ली, आईएनएस मैसूर और आईएनएस मुंबई’ नामक युद्धपोतों का निर्माण किया गया।
  • इसके पश्चात् परियोजना 15ए के तहत कोलकाता वर्ग के तीन युद्धपोतों को भी भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस श्रेणी के तीन निर्देशित मिसाइल विध्वंसक युद्धपोतों में ‘आईएनएस कोलकाता, आईएनएस कोच्चि और आईएनएस चेन्नई’ को कमीशन किया गया।
  • इन सभी स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक युद्धपोतों का निर्माण देश के सबसे महत्त्वपूर्ण रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में से एक मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा किया जा रहा है। 
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