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दूरसंचार क्षेत्र में आई.पी.आर. को बढ़ावा 

चर्चा में क्यों

हाल ही में जारी ‘राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति मसौदे (DNDCP)’ में दूरसंचार उद्योग में सार्वभौमिक रूप से बदलाव लाने की बात कही गई है। यह बौद्धिक संपदा अधिकार को बढ़ावा देने के लिये एक रणनीतिक रोडमैप की बात करता है।

प्रमुख बिंदु

  • इस मसौदे में भारत के दूरसंचार उद्योग से संबंधित बुनियादी ढाँचा, सेवा और सुरक्षा के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर प्रभाव जैसे व्यापक दृष्टिकोण को शामिल किया गया है
  • सैटेलाइट संचार को विनियंत्रित करने, वाई-फाई की क्षमता का अधिकतम प्रयोग करने आदि के संदर्भ में डी.एन.डी.सी.पी. वस्तुत: 'सभी के लिये ब्रॉडबैंड' जैसी पहल के लिये एक प्रभावी कदम हो सकता है।
  • इस मसौदे में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), 5G और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे भविष्य के नवाचारों को अपनाने पर जोर दिया गया है।

बौद्धिक संपदा अधिकार और रोडमैप

  • विदित है कि भारत सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति (NIPRP) जारी की, जो आई.पी.आर. (IPR) कानूनों को सख्त करने और उसे लागू करने पर केंद्रित थी। 
  • आई.पी.आर. का संरक्षण और व्यावसायीकरण भारत सरकार की विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आई.पी.आर. की सुरक्षा के संबंध में भारत की छवि बहुत अच्छी नहीं रही है और यह इंडोनेशिया, नाइजीरिया, यूक्रेन और वियतनाम जैसे देशों से भी पीछे रहा है।
  • वर्तमान मसौदे में दूरसंचार उद्योग में अनुसंधान एवं विकास रणनीति खंड के तहत आई.पी.आर. को कवर किया गया है। विशेष रूप से इसमें एन.आई.पी.आर.पी. में डिजिटल संचार से संबंधित कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क से संबंधित कानूनी व्यवस्था की समीक्षा का भी उल्लेख है।
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