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जेनु कुरुबा जनजाति

चर्चा में क्यों ?

  • वर्ष 2025 में, जेनु कुरुबा जनजाति ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नागरहोल टाइगर रिजर्व के भीतर अपने पैतृक गांवों में लौटकर फिर से घर बसाना शुरू कर दिया।

प्रमुख बिंदु :-

  • जेनु कुरुबा जनजाति के लगभग 50 से अधिक परिवार जो 40 वर्ष पहले जबरन वन संरक्षण के नाम पर विस्थापित कर दिए गए थे, अब अपने पारंपरिक आवासों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं।
  • यह घटना भारत में स्वदेशी जनजातीय अधिकारों और भूमि से गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बन गई है।

जेनु कुरुबा जनजाति 

स्थान और वर्गीकरण

  • स्थिति: मुख्य रूप से कर्नाटक के कोडागु और मैसूर क्षेत्रों में।
  • वर्गीकरण: भारत सरकार द्वारा PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Group) के रूप में मान्यता प्राप्त।

नाम का अर्थ और पारंपरिक जीवन शैली

  • “जेनु” का अर्थ है शहद (कन्नड़ भाषा में), जो उनकी पारंपरिक आजीविका को दर्शाता है।
  • यह जनजाति वन आधारित जीवन पर निर्भर रही है – विशेषतः शहद संग्रह, पशुपालन और वनोपज पर।
  • इन्हें अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे – थेन कुरुम्बा और कट्टू नायकर

आवास और बस्तियां

  • ये लोग हादी नामक छोटी बस्तियों में रहते हैं जो जंगलों के भीतर या किनारे पर बसी होती हैं।
  • इनकी जीवनशैली अर्ध-खानाबदोश (semi-nomadic) है, जो मुख्यधारा प्रशासन या धार्मिक नियंत्रण से काफी हद तक स्वतंत्र होती है।

सामाजिक संरचना

  • समुदाय में एक संगठित पदानुक्रम (hierarchy) होता है:
    • यजमान (प्रमुख नेता)
    • गुड्डा (अनुष्ठानिक प्रमुख)
  • धार्मिक मामलों को छोड़कर, लगभग सभी सामुदायिक निर्णय आंतरिक परामर्श प्रणाली के तहत लिए जाते हैं।

महत्व और चुनौती

  • जेनु कुरुबा समुदाय की यह वापसी केवल भूमि पुनः अधिग्रहण नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आत्मसम्मान की वापसी भी है।
  • यह घटना भारतीय संविधान के पंचम अनुसूची, वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 जैसे कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act – FRA, 2006)

  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006, जिसे वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) या एफआरए 2006 के रूप में भी जाना जाता है,
  • एक ऐतिहासिक भारतीय कानून है जो वन में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को वन अधिकारों और भूमि उपयोग अधिकारों को मान्यता देता है। 
  • इसका उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को दूर करना तथा उन समुदायों की भलाई सुनिश्चित करना है, जो अपनी आजीविका, निवास और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर हैं।

प्रश्न :-'जेनु कुरुबा' जनजाति मुख्य रूप से किस राज्य में पाई जाती है?

(a) ओडिशा

(b) छत्तीसगढ़

(c) कर्नाटक

(d) महाराष्ट्र

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