हाल ही में, भारत ने करण फ्राइज़ एवं वृंदावनी नामक दो अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाली कृत्रिम गौवंश नस्लों का आधिकारिक रूप से पंजीकरण किया है।
करण फ्राइज़ एवं वृंदावनी मवेशी नस्लों का परिचय
करण फ्राइज़ नस्ल
- इस नस्ल का विकास हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) ने किया है।
- यह नस्ल देशी थारपारकर गायों तथा होल्स्टीन-फ्रीसियन सांडों के क्रॉस ब्रीडिंग से तैयार की गई है।
- 10 महीने की दुग्धावधि के दौरान यह 3,500 किलोग्राम से अधिक दूध देने की क्षमता रखती है।
- कृत्रिम करण फ्राइज़ नस्ल उच्च दुग्ध उत्पादकता की विशेषताओं से युक्त होती है जिसमें दैनिक अधिकतम दुग्ध उत्पादन 46.5 किलोग्राम तक पहुँच सकता है।
वृंदावनी नस्ल
- इस नस्ल को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित आई.सी.ए.आर.–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने विकसित किया गया है।
- यह नस्ल होल्स्टीन-फ्रीसियन, ब्राउन स्विस और जर्सी जैसी विदेशी नस्लों को स्थानीय हरियाना गौवंश के साथ मिलाकर तैयार की गई है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बारे में
- स्थापना: 16 जुलाई, 1929 को रॉयल कमीशन ऑन एग्रीकल्चर की सिफारिशों के आधार पर सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत एक पंजीकृत संस्था के रूप में की गई थी।
- मुख्यालय: नई दिल्ली
- प्रमुख कार्य: यह संस्था कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करती है।
- अन्य तथ्य: देशभर में बागवानी, मत्स्य पालन एवं पशु विज्ञान सहित कृषि से संबंधित अनुसंधान एवं शिक्षा के समन्वय, दिशा-निर्देशन व प्रबंधन की शीर्ष संस्था के रूप में कार्य करती है।